नारियल से पैसे कमाने वाले किसानों की मेहनत बचा रहा कोच्चि का यह स्टार्टअप

By yourstory हिन्दी
May 12, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:32:07 GMT+0000
नारियल से पैसे कमाने वाले किसानों की मेहनत बचा रहा कोच्चि का यह स्टार्टअप
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विजय वर्गीज

केरल के लैंडस्केप में खड़े लंबे ताड़ के पेड़, कच्चा नारियल पानी और नीरा का एक समृद्ध स्रोत हैं। बता दें कि ताड़ या खजूर (पाम ट्रीज) के पेड़ से निकलने वाले ताजे रस को नीरा कहा जाता है। नीरा को ताड़ और नारियल के वृक्ष से प्राप्त किया जाता है। ताड़ के वृक्ष से प्राप्त नीरा जब तक यह ताजा रहता है तब तक यह नीरा रहता है, लेकिन जैसे ही यह सड़ता है यह ताड़ी बन जाता है। नीरा को नारियल के पेड़ से भी प्राप्त किया जाता है। नारियल पेड़ के फूलों के गुच्छे (inflorescence) से जो रस निकलता है वही नीरा होता है।


दरअसल नीरा निकालने के लिए नारियल के बंद फूलों के गुच्छों को बांध कर तैयार किया जाता है। इसके बाद फूलों की नोक काटी जाती है और फिर उन नोकों से टपकने वाली नीरा इकट्ठी की जाती है। आवश्यक पोषक तत्वों और खनिजों का स्रोत, नीरा का उपयोग ताड़ की चीनी निकालने, सिरप, शहद और गुड़ को बनाने के लिए भी किया जाता है। जब इसे सुखाया जाता है तब यही कोकोनट शुगर (नारियल चीनी) बन जाता है। इसी नीरा को जब नेचुरल फर्मेंटेशन की प्रक्रिया से गुजारा जाता है तब यह ताड़ी (एल्कोहलिक ड्रिंक) में तब्दील हो जाती जाती है। हालांकि, नीरा को निकालने की प्रक्रिया काफी कठिन होती है। इसे आमतौर पर सूर्योदय से पहले निकाला जाता है और इसमें काफी मेहनत लगती है। एक फूल के गुच्छे से नीरा निकालने के लिए एक व्यक्ति को तीन महीने तक एक दिन में तीन बार 30 फीट तक चढ़ना पड़ता है।


35 वर्षीय चार्ल्स विजय वर्गीज कहते हैं, "कोच्चि में बड़े होते हुए, मैंने नीरा निकालने की समस्या को समझा। मैं हमेशा सोचता था कि यह प्रक्रिया स्वचालित (automated) क्यों नहीं हो सकती है।" वर्षों बाद, उन्होंने कोच्चि स्थित एनएवीए (NAVA) डिजाइन एंड इनोवेशन की स्थापना की, जिसने नीरा निकालने वाला सैपर (Sapper) विकसित किया। सैपर को नीरा निकालने वाले व्यक्ति की उत्पादकता को 72 गुना तक बढ़ाने के दावे से विकसित किया गया। इस ऑटोमैटेड एक्सट्रैक्टर का उपयोग करते हुए, एक टैपर (नीरा निकालने वाला शख्स) को केवल दो बार पेड़ पर चढ़ने की ज़रूरत होती है, एक बार डिवाइस को लगाने और फिर उसे निकालने के लिए। NAVA को औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (DIPP), स्टार्टअप इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त है।

नीरा निकालने की मशीन

बाजार पर पकड़

अगस्त 2016 में स्थापित हुआ NAVA अब केरल स्टार्टअप मिशन का सदस्य है। चार्ल्स तमिलनाडु के एम कुमारसामी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनियर हैं। ग्रेजुएशन के बाद, उन्होंने इमेज कॉलेज ऑफ आर्ट्स, एनिमेशन एंड टेक्नोलॉजी (ICAT), चेन्नई से 3डी एनीमेशन में पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स किया। उन्होंने 2005 में केरल कार्टून अकादमी पुरस्कार भी जीता है।


चार्ल्स ने उसके बाद 10 साल तक मिडिल ईस्ट में काम किया। मिडिल ईस्ट में काम करने के दौरान उन्होंने अपनी कंपनी के बारे में योजना बनाई थी - उन्होंने ओमान में खिमजी रामदास में सहायक इकाई प्रबंधक के रूप में काम करते हुए अपनी कंपनी का पंजीकरण कराया था। जुलाई 2017 में, उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और केरल के मेकर विलेज में अपनी कंपनी को इनक्यूबेट किया।


उनके परिवार के पास एक नारियल का खेत है जहाँ वे वर्षों से ताड़ी निकाल रहे हैं। वे कहते हैं, "कोच्चि में कंपनी शुरू करने का मतलब था कि मैं अपने नारियल के खेत में प्रयोग कर सकता हूं।" NAVA की टीम में एक फुल-टाइम ट्रेडिशनल टैपर, दो पार्ट-टाइम टैपर शामिल हैं, जो फीडबैक के साथ मदद करते हैं, और चार्ल्स सहित पांच इंजीनियर भी हैं। 


नीरा निकालने वाली डिवाइस (एक्सट्रैक्टर extractor) काम कैसे करता है?

नारियल के पेड़ से नीरा निकालने के लिए पेड़ पर चढ़कर इस डिवाइस को नारियल के बंद फूलों के गुच्छों में सेट करना होता है। एक पतली और लंबी पाइप डिवाइस को नीचे जमीन पर टैंक के साथ जोड़ती है, जहां नीरा एकत्र किया जाता है। डिवाइस को इंस्टॉल करने के बाद उसका स्विच ऑन किया जाता है जिसके बाद वह डिवाइस मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से फार्म मैनेजर को उसकी सूचना भेजती है। इंस्टॉलेशन के बाद, रोबोट सेंसर नीरा निकालने के लिए नारियल फूल के गुच्छे की नोकों को बारीक काट देता है।


चार्ल्स कहते हैं, "वैक्यूम एक्सट्रैक्शन की मदद से, ट्यूब कॉलेक्शन टैंक में नीरा जमा करता है।" हर दिन, औसतन 1.5 लीटर नीरा निकाला जाता है। लगभग तीन महीने के बाद, ये डिवाइस फार्म मैनेजर को एक और नोटीफिकेशन भेजती है, जिसमें बताया जाता है कि पूरे फूल के गुच्छे से नीरा निकाल लिया गया है और अब डिवाइस हटा ली जाए। बस इसके बाद नीरा निकालने वाले शख्स को पेड़ पर चढ़ना होता है डिवाइस निकाल दी जाती है। इस तरह से नीरा निकालने वाले शख्स को केवल दो बार ही पेड़ पर चढ़ना होता है। 


चार्ल्स कहते हैं, "डिवाइस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग करती है, और पूरी तरह से एक इंटीग्रेटेड बैटरी सौर ऊर्जा पर चलती है।" डिवाइस नीरा के फ्लो और नारियल की पकने की उम्र की पहचान करने के लिए सेंसर का उपयोग करता है।


रास्ते में चुनौतियां

NAVA इंडोनेशिया, फिलीपींस, ब्राजील, श्रीलंका, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, पापुआ न्यू गिनी, तंजानिया, मैक्सिको, म्यांमार और भारत सहित दुनिया के सभी शीर्ष नारियल उत्पादक देशों को टार्गेट करता है। इसके लिए, चार्ल्स ने एक अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट सहयोग संधि के लिए आवेदन किया है जो कि 30 महीनों में समाप्त हो जाती है। चार्ल्स कहते हैं, "मैंने एक पूर्ण पेटेंट के लिए आवेदन किया है, इसके लिए पैसों का प्रबंधन करना एक चुनौती थी। पूर्ण पेटेंट के लिए 15 लाख रुपये की आवश्यकता थी और मुझे इसके लिए लोन लेना पड़ा।" NAVA अगले छह महीनों में सभी 11 देशों में अपने उत्पाद का पेटेंट कराएगी। दूसरी चुनौती पारंपरिक भारतीय टैपरों के बीच प्रोडक्ट के बारे में जागरूकता पैदा करने की है। वे कहते हैं, "वे (नीरा निकालने वाले शख्स) मानते हैं कि हमारी डिवाइस उनकी नौकरियों को ले डूबेगी, लेकिन वास्तविकता में, यह डिवाइस उनकी उत्पादकता को 72 गुना तक बढ़ाएगी।"


चार्ल्स का कहना है कि वर्तमान में प्रोटोटाइप स्टेप में NAVA न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद (MVP) पर काम कर रहा है जो अधिक AI और मशीन भाषा (ML) कौशल का उपयोग करेगा।


नारियल व्यापार और भविष्य की योजना

IMARC ग्रुप के अनुसार, भारतीय कृषि उपकरण बाजार 2018 और 2023 के बीच 6.33 प्रतिशत के सीएजीआर पर 2023 तक 1,245 अरब रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। स्टार्टअप क्लाइमेट कंडीशन्स की निगरानी करने, ग्रीनहाउस को स्वचालित करने और खेतों और फसलों का प्रबंधन करने के लिए तेजी से इनोवेशन कर रहे हैं। बार्टन ब्रीज, फार्म अगेन, ग्रोलिंक, काउलर और फार्मलॉग ऐसे स्टार्टअप्स में से हैं।


NAVA की नीरा टैपिंग डिवाइस अपनी तरह की इकलौती खास डिवाइस है और चार्ल्स इसको युनिक बनाए रखने के लिए पेटेंट करा रहा हैं। स्टार्टअप में चार्ल्स ने अपनी बचत के 10 लाख रुपये निवेश किए इसके अलावा बैंक से 15 लाख रुपये और मेकर विलेज से 5 लाख रुपये सॉफ्ट लोन लिया। बाद में, NAVA ने केरल स्टार्टअप मिशन से अनुदान प्राप्त किया, और भारत पेट्रोलियम का अंकुर अनुदान जीता।


स्टार्टअप ने एक साल के समय में कॉमर्शियल डिवाइस लॉन्च करने की योजना बनाई है। चार्ल्स कहते हैं, "हमारी योजना 7,000 रुपये से 10,000 रुपये के बीच है।" NAVA वर्तमान में श्रीलंका और फिलीपींस के बड़े नीरा निर्माताओं के साथ बातचीत कर रही है। एक बार जब डील हो जाएगी, तो योजना “पार्ट्स के थोक प्रोडक्शन के लिए निर्माताओं के साथ” साझेदारी करने की होती है। चार्ल्स कहते हैं, "असेंबलिंग और पैकेजिंग हमारे द्वारा ही किया जाएगा।"


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