दो देशों के बीच के फासले कम करने वाली 'समझौता एक्सप्रेस' क्यों बंद हुई

दो देशों के बीच के फासले कम करने वाली 'समझौता एक्सप्रेस' क्यों बंद हुई

Saturday February 18, 2023,

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भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद ये दो देश ऐसे बंटे जिसका असर आज भी भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव में दिखता है.  इन दोनों देशों को एक रखने की कोशिशों में से एक कोशिश थी ‘समझौता एक्सप्रेस.’ मुल्क तो बंटा, कई परिवारों के लोग दो अलग-अलग देशों के निवासी हो गए, लेकिन इनके पर्व-त्यौहार एक ही थी. ऐसे में ईद-दीवाली व अन्य कई प्रमुख अवसर पर दोनों देशों के लोग सीमाएं लांघकर अपनों के बीच एक-दुसरे के पास आते हैं.


‘समझौता एक्सप्रेस’ एक ऐसी रेल सेवा थी जिससे दोनों देशों के लोग एक-दूसरे की यात्रा आसानी से कर सकें.


इस ट्रेन सेवा को भारतीय रेलवे और पाकिस्तान रेलवे के बीच एक समझौते के साथ स्थापित किया गया था, जिसमें एक बार में 6 महीने के लिए ट्रेन में भारतीय रेक और लोकोमोटिव (locomotive) का इस्तेमाल किया जाता था और बचे हुए 6 महीने में पाकिस्तान का. इसलिए, छह महीने के लिए यह भारतीय रेलवे द्वारा और छह महीने के लिए पाकिस्तान रेलवे द्वारा चलाई जाती थी.


इसी कारण इस पहल को ‘शांति का सन्देश’ भी कहा गया था.

‘समझौता एक्सप्रेस’ का इतिहास

‘समझौता एक्सप्रेस’ 22 जुलाई, 1976 को ‘शिमला समझौते’ के तहत अटारी-लाहौर के बीच चलना शुरू हुई थी. शिमला समझौता भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री, इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो के बीच 1972 में हुआ था.


शुरुआत में यह ट्रेन अटारी (उत्तर रेलवे, फिरोजपुर मंडल) से लाहौर तक के लिए चलती थी. भारतीय रेलवे रविवार को दिल्ली से अटारी और अटारी से दिल्ली के बीच इस ट्रेन का परिचालन करता था जबकि पाकिस्तान में यह ट्रेन लाहौर से अटारी के बीच चलाई जाती थी. यात्री अटारी स्टेशन पर ट्रेन बदलते थे. 80 के दशक के अंत में पंजाब में तनाव बढ़ने के बाद से भारतीय रेलवे ने अटारी से इसका चलना बंद कर दिया और यह पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से चलने लगी थी.

कई बार बाधित हुई ‘समझौता एक्सप्रेस’ ट्रेन सेवा

दोनों देशों के बीच की दूरियां मिटाने वाली यह रेल सेवा इन दो देशों के बीच पैदा होने वाले तनाव की भेंट चढ़ती रही है. जब भी दोनों देशों के बीच तनातनी होती है, यह सेवा रोक दी जाती थी. फिर साल 2019 में ‘समझौता एक्सप्रेस’ की सेवा हमेशा के लिए निलंबित कर दी गई.

पहली बार इस ट्रेन का परिचालन 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए हमले के बाद रोका गया. इसके बाद 27 दिसंबर 2007 को पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद एक बार फिर इस ट्रेन का परिचालन रोक दिया गया.

‘समझौता एक्सप्रेस’ ब्लास्ट

18 फरवरी 2007 में ट्रेन दिल्ली से लाहौर के लिए निकलते ही बम ब्लास्ट का शिकार हुई. इसमें 68 लोगों की मौत हो गई और 12 लोगों के घायल होने का दावा किया जाता है. मारे गए लोगों में अधिकांश पाकिस्तानी मूल के लोग थे.


5 अगस्त, 2019 को भारत सरकार द्वारा कानून लाकर जम्मू-कश्मीर को खास दर्जा देने वाली धारा 370 को खत्म कर दिए जाने के बाद

'समझौता एक्सप्रेस' की सेवा हमेशा के लिए निलंबित कर दी गई.


Edited by Prerna Bhardwaj