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मनरेगा में मजदूरी करके बेटी को पढ़ाया, सिविल सेवा में चयनित होकर बढ़ाया मान

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18th Apr 2019
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श्रीधन्या का परिवार

गरीब और पिछड़ी पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं की सफलता की कहानियां हम सभी का दिल जीत लेती हैं। इन कहानियों से हमें पता चलता है कि कड़ी मेहनत से कोई भी सफलता हासिल कर लेता है।। इस बार UPSC की परीक्षा में ऐसे कई युवाओं ने बाजी मारी जिनकी राह में संघर्ष ही संघर्ष था। कुरिचिया जनजाति से ताल्लुक रखने वाली 25 वर्षीय श्रीधन्य सुरेश की प्रेरक कहानी कुछ ऐसी है।


केरल के वायनाड जिले की रहने वाली श्रीधन्या केरल में अपने समुदाय से ताल्लुक रखने वाली पहली महिला हैं जिसने यह परीक्षा पास की है। उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में 410 वीं रैंक हासिल की। श्रीधन्या के पिता एक दिहाड़ी मजदूर हैं जो गांव की बाजार में ही धनुष और तीर बेचने का काम करते हैं। इतने गरीब परिवार में जन्म लेने की वजह से श्रीधन्या को बचपन से ही बुनियादी सुविधाओं का आभाव रहा। श्रीधन्या के तीन भाई-बहन भी हैं जिनका गुजारा सिर्फ और सिर्फ पिता की आय पर निर्भर था। उनके पिता ने मनरेगा में मजदूरी करके अपने बच्चों को पाला।


श्रीधन्या के पिता ने कहा, "हमारे जीवन में तमाम कठिनाइयां थीं, लेकिन हमने कभी भी बच्चों शिक्षा से समझौता नहीं किया। आज श्रीधन्या ने हमें वो अनमोल तोहफा दिया है जिसके लिए हम संघर्ष करते रहे। हमें उस पर गर्व है।" श्रीधन्या ने सेंट जोसेफ कॉलेज से जूलॉजी में स्नातक की पढ़ाई करने के लिए कोझीकोड का रुख किया था और कालीकट विश्वविद्यालय से पोस्ट-ग्रेजुएशन किया।


श्रीधन्या सुरेश


पढ़ाई पूरी होने के बाद श्रीधन्या केरल के अनुसूचित जनजाति विकास विभाग में एक क्लर्क के रूप में काम करने लगीं। बाद में वे वायनाड में ही आदिवासी हॉस्टल की वार्डन बन गईं। सिविल सेवाओं में उनकी रुचि के बारे में बात करते हुए, उनके पिता कहते हैं, 'वायनाड में रहते हुए वह वहां के कलेक्टर श्रीराम समशिवा राव से काफी प्रभावित थी। उन्होंने श्रीधन्या को सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद वह सिविल सेवा कोचिंग के लिए तिरुवनंतपुरम चली गई।'


सिविल सेवा में चयनित होने के बाद श्रीधन्या अब अपने आदिवासी समुदाय के लोगों के लिए काम करने की चाहत रखती हैं। वे कहती हैं, 'मैं राज्य के सबसे पिछड़े जिले से ताल्लुक रखती हूँ। एक बड़ी जनजातीय आबादी होने के बावजूद यहाँ से कोई आदिवासी आईएएस अधिकारी नहीं हैं। यहां बहुत कम ही लोग हैं जो सिविल सेवा परीक्षा के बारे में जानते हैं। मुझे उम्मीद है कि लोग अब सिविल सेवा के लिए तैयारी करेंगे और सफल भी होंगे।' श्रीधन्या को सिविल सेवा में सफल होने के बाद केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तरफ से बधाई मिली।


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