वीकली रिकैप: पढ़ें इस हफ्ते की टॉप स्टोरीज़!

By रविकांत पारीक
April 03, 2022, Updated on : Sun Apr 03 2022 04:39:53 GMT+0000
वीकली रिकैप: पढ़ें इस हफ्ते की टॉप स्टोरीज़!
यहाँ आप इस हफ्ते प्रकाशित हुई कुछ बेहतरीन स्टोरीज़ को संक्षेप में पढ़ सकते हैं।
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इस हफ्ते हमने कई प्रेरक और रोचक कहानियाँ प्रकाशित की हैं, उनमें से कुछ को हम यहाँ आपके सामने संक्षेप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिनके साथ दिये गए लिंक पर क्लिक कर आप उन्हें विस्तार से भी पढ़ सकते हैं।

खेती का आधुनिकीकरण करने वाला स्टार्टअप

धीरेश कुमार, पारस जैन और निशांत चौहान द्वारा 2019 में स्थापित Neem Tree Agro Solutions एक 'फिजिटल' (फिजिकल + डिजिटल) अप्रोच को फॉलो करता है। यह एक फुल-स्टैक सॉल्यूशन ऑफर करता है और हर नुक्कड़ पर पूरी तरह कार्यात्मक खुदरा दुकानों के साथ, बुवाई से लेकर कटाई तक सब कुछ संभालता है।

Neem Tree Agro Solutions

टेक्नोलॉजी की मदद से खेती की समस्या को हल करने के लिए धीरेश कुमार, पारस जैन और निशांत चौहान द्वारा 2019 में स्थापित, दिल्ली स्थित Neem Tree Agro Solutions एनटी-किसान नामक डेटा-संचालित फसल वृद्धि एप्लिकेशन ऑफर करता है। यह निर्णय लेने की सुविधा प्रदान करता है और किसानों को कुशलतापूर्वक और भरपूर फसल उगाने में मदद करता है।


ऐप कई पहलुओं पर नजर रखता है जो उपज की मात्रा और गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इन इनपुट कारकों (मिट्टी के प्रकार, मौसम की भविष्यवाणी, मिट्टी के स्वास्थ्य और पोषक तत्वों) को ध्यान में रखते हुए, एनटी-किसान उत्पाद की गुणवत्ता और मात्रा पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रभावों का विश्लेषण और भविष्यवाणी करता है।


नीम ट्री एग्रो सॉल्यूशंस के सह-संस्थापक और सीईओ धीरेश कुमार ने योरस्टोरी को बताया, “यात्रा बुवाई के समय से ही शुरू हो जाती है। मौसम के पूर्वानुमान और मिट्टी के मापदंडों के आधार पर, किसान को पांच सर्वोत्तम फसलों की सिफारिश की जाती है जो वह बो सकता है। हर सिफारिश कृषि मानकों के लिए अद्वितीय है।”


एक बार फसल बोने के बाद, वर्तमान में एंड्रॉइड यूजर्स के लिए उपलब्ध ऐप, वैज्ञानिक तकनीकों के व्यवस्थित कार्यान्वयन पर सुझाव देने और महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने के साथ-साथ मौसम, सिंचाई, उर्वरक और कीटनाशकों के उपयोग के बारे में लगातार अपडेट साझा करेगा।


एग्रीटेक स्टार्टअप किसानों से मिलने और समस्याओं से खुद को परिचित करने के लिए साप्ताहिक या मासिक आधार पर फील्ड विजिट भी करता है।

सपनों का घर बनानी वाली महिला आंत्रप्रेन्योर

भावना खन्ना ने अपने बचपन के सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत और कदम-कदम पर संघर्षों का सामना किया। लेकिन, कभी हार नहीं मानी।

भावना खन्ना

भावना खन्ना

मूलरूप से दिल्ली की रहने वाली भावना खन्ना ने बचपन से ही अपने आसपास बड़ी-बड़ी इमारतें देखीं थीं। कई बिल्डिंग्स तो उन्होंने खुद अपनी आँखों के सामने बनते देखी थी, जो आज ऊपर से नीचे तक कांच से लैस चमचमाती हुई दिखाई देती हैं। इन ऊंची-ऊंची इमारतों को देखने के बाद उन्होंने बचपन में ही तय कर लिया था कि मुझे आर्किटेक्चर बनना है और मैं भी इसी तरह की बिल्डिंग बनाऊँगी।


वह कहती हैं, “मुझे अच्छे से याद है कि वह मेरा 13वां बर्थडे था। इस जन्मदिन पर पापा ने मुझे बिल्डिंग ब्लॉक का गेम गिफ्ट दिया था। इस ब्लॉक्स को जोड़कर कोई भी बिल्डिंग बनाई जा सकती थी। वो गेम मिलने के बाद मैं दिनभर उसी में लगी रहती और जिस वक्त वह खेल रही होती मैं सारी दुनिया भूल जाती। उस खेल को खेलते-खेलते घरौंदा बनाते-बिगाड़ते मैं बड़ी हो गई पता ही नहीं चला।”


भावना ने बारहवीं तक की पढ़ाई दिल्ली में रहकर ही पूरी की। इसके बाद पांच साल के कोर्स में एडमिशन ले लिया और कॉलेज की शुरुआत कर दी। कोर्स पूरा करने के बाद जॉब मिल गई। सैलरी पैकेज अच्छा था। लेकिन, एक साल काम करते-करते यह समझ आ चुका था कि शायद नौकरी नहीं होगी। क्योंकि उन्हें किसी के इंस्ट्रक्शन पर काम करना पसंद नहीं था।


एक रिपोर्ट के मुताबिक वह कहती हैं, “मेरे पास खुद के आइडियाज थे। इसलिए मैंने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया। मैंने अपनी स्किल्स को और समय दिया और खुद के काम की शुरुआत कर दी। मैंने अपनी कंपनी का 'अस्त्रिद इंडिया' रखा। इस फील्ड में मेरा अनुभव एकदम नया था। कोई गॉड फादर भी नहीं था जिसकी मदद ले सकूँ। इसलिए शुरुआती दौर से ही संघर्षों से सामना होने लगा था।”


साल 2016 में भावना की कंपनी को पहला प्रोजेक्ट मिला। हालांकि, प्रोजेक्ट बहुत बड़ा नहीं था। तीन बाई तीन की एक शेल्फ बनानी थी। लेकिन यह उनके और उनकी टीम के लिए किसी बड़े अवसर से कम नहीं था। इसलिए पूरी टीम ने साथ मिलकर दिनरात कड़ी मेहनत की और अपना सर्वश्रेष्ठ दिया।

अजमेरा रियल्टी की कहानी

अजमेरा ग्रुप ऑफ कंपनीज की स्थापना 1968 में हुई थी। स्वर्गीय छोटेलाल एस अजमेरा ने इसे एक सिविल कॉन्ट्रैक्टिंग फर्म के रूप में शुरू किया था। पांच दशकों बाद आज यह रियल एस्टेट की दिग्गज कंपनियों में से एक है, जो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड है और जो धीरे-धीरे विदेशों में भी अपना विस्तार कर रही है।

अजमेरा ग्रुप ऑफ कंपनीज

दूसरी पीढ़ी के उद्यमी और अजमेरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के डायरेक्टर धवल अजमेरा ने योरस्टोरी के साथ खुलकर की गई बातचीत में बताया कि कैसे एक छोटा फैमिली बिजनेस रियल एस्टेट के बड़े नामों में से एक बन गया,और इसकी पांच दशक की लंबी पुरानी कहानी के पीछे क्या राज रहा है।


धवल बताते हैं कि कैसे उनके चाचा, छोटेलाल एस अजमेरा (जिन्हें छोटूभाई के नाम से भी जाना जाता है) ने गुजरात के एक छोटे से गांव वासवदा से मुंबई में आकर एक साधारण लड़के के रूप में शुरुआत की और भारत की सबसे प्रसिद्ध रियल एस्टेट कंपनियों में से एक और NSE में लिस्टेड अजमेरा समूह की स्थापना की।


छोटेलाल एस अजमेरा व्यवसाय की दुनिया में किस्मत आजमाने के लिए 1968 में अपनी औपचारिक शिक्षा छोड़ दी। वह जानते था कि अगर वह कुछ प्रभावशाली बनाना चाहता है और एक विरासत पीछे छोड़ना चाहते हैं, तो उन्हें अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलना होगा।


धवल याद करते हैं कि जब छोटूभाई मुंबई आए, तो उन्होंने तेल के व्यापार, कपड़ा व्यापार, निर्माण, फाउंड्री, कागज, आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में छोटी नौकरियों के साथ प्रयोग करके अपने सफर की शुरुआत की।


कई क्षेत्रों में हाथ आजमाने के बाद उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट फैब्रिकेशन, अनुभव जुटाना और शुरुआती पूंजी इकठ्ठा करना शुरू किया, जिससे वे खुद की सिविल कॉन्ट्रैक्टिंग फर्म खोल सकें।


धवल कहते हैं, “उनका बिजनेस आगे बढ़ रहा था, लेकिन वह रुकने वाले नहीं थे। एक दशक की कड़ी मेहनत ने उन्हें एक अपरंपरागत रास्ता अपनाने और मिड-बजट वाले आवासीय सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। यह 1975 की बात है और उसके बाद से कभी उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।”

हर महीने 1.2 लाख रुपये कमाने वाली 13 वर्षीय छात्रा

मुंबई के धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल की छात्रा अनुष्का पोद्दार ने टीनएजर्स के लिए एक पर्सनल केयर लाइन शुरू की है, जिसमें अभी शैंपू और कंडीशनर बनाए जाते हैं।

अनुष्का पोद्दार

बतौर टीनएजर, अनुष्का पोद्दार ने पर्सनल केयर के मामले में ट्वीन्स और टीनएजर्स के सामने आने वाली समस्याओं को समझा।


वह कहती हैं, "मुझे पता था कि टीनएजर्स और युवा वयस्कों को मुँहासे, एक्जिमा और ब्रेकआउट जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ता है, और विभिन्न प्रकार के बालों और त्वचा के लिए सही पोषण की आवश्यकता होती है। पिछले साल, गर्मियों के दौरान, जब मैंने अपनी माँ के 'फेमस' ब्रांडों का इस्तेमाल किया तो मुझे त्वचा की एलर्जी की समस्या का सामना करना पड़ा। रिसर्च के बाद, मैंने महसूस किया कि वयस्कों और बच्चों के लिए कई ब्रांड हैं, लेकिन टीनएजर्स के लिए भारत में बहुत कम मुख्यधारा के पर्सनल केयर प्रोडक्ट हैं।”


धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल, मुंबई की एक छात्रा, अनुष्का कहती हैं कि वह हमेशा व्यवसाय की दुनिया में इसे बड़ा बनाने की ख्वाहिश रखती थीं और एलन मस्क, स्टीव जॉब्स और बिल गेट्स जैसों से प्रेरित थीं जिन्होंने लोगों की जिंदगियों पर प्रभाव डालते हुए बड़े व्यापारिक समूह बनाए हैं।


अपने दोस्तों के साथ रिसर्च करने और बात करने से अनुष्का को एहसास हुआ कि वह अकेली नहीं थी जो इस "स्टेज" से गुजर रही थीं।


इस प्रकार एक टीनएजर्स पर फोकस्ड पर्सनल केयर प्रोडक्ट लाइन Snazz बनाने का आइडिया आया।


अनुष्का बताती हैं, "Snazz किशोरों और किशोरों की त्वचा और बालों की आवश्यकताओं के लिए कस्टमाइज है, और मुँहासे और बालों के टूटने सहित आम समस्याओं का समाधान करता है। पोषण के सही स्तर, अद्वितीय सुगंध, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ पैकेजिंग और बोल्ड थीम के साथ, हमारा उद्देश्य भ्रमित किशोरों को अंततः उनकी पर्सनल केयक समाधान खोजने में मदद करना है। Snazz की टैगलाइन "Be What You Want" इस ब्रांड की खासियत को दर्शाती है।"

यूक्रेन की मदद के लिए आगे आए गुजराती लोक गायक

लोक गायिका गीताबेन रबारी और गायक सनी जाधव ने एक इवेंट में लोक गीत और भजन गाए और इसकी तस्वीरें गीताबेन ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर साझा कीं, जिनमें NRI कम्यूनिटी के लोग यूक्रेन के लोगों की मदद के लिए डॉलरों की बौछार करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

लोक गायिका गीताबेन रबारी और गायक सनी जाधव

लोक गायिका गीताबेन रबारी और गायक सनी जाधव

जब से रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है, दुनिया भर के लोग यूक्रेन की जनता की मदद के लिए एकजुटता से खड़े हो रहे हैं। लाखों लोग अपने युद्धग्रस्त देश से भागने के लिए मजबूर यूक्रेनी लोगों को समर्थन देने के लिए लगातार दान और धन जुटा रहे हैं। हाल ही में, दो गुजराती लोक गायकों ने एक इवेंट में परफॉर्म कर बड़ी रकम जुटाई है, जिसके बाद से इन दोनों की काफी तारीफ हो रही है।


इंटरनेट पर वायरल हो रहे वीडियो में, गुजराती लोक गायिका गीताबेन रबारी और गायक सनी जाधव पारंपरिक जातीय पोशाक में एक स्टेज पर बैठे हुए लोकप्रिय लोक गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति देते हुए दिखाई दे रहे हैं। जैसे-जैसे वे दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते जाते हैं, उन पर डॉलरों की बारिश होती दिखाई देती है। इतने ज्यादा डॉलर हैं कि मानों स्टेज पर डॉलरों की बाढ़ आ गई है।


कलाकार इस सप्ताह की शुरुआत में डलास में एक संगीत कार्यक्रम लोक दयारो में परफॉर्म कर रहे थे, जो अमेरिका में उनके भव्य संगीत दौरे का एक हिस्सा था, जिसे मनपसंद समूह द्वारा ऑर्गेनाइज किया गया था। अब ये दोनों काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं क्योंकि वीडियो और तस्वीरों में उत्साही एनआरआई उन पर नकदी की बौछार करते नज़र आ रहे हैं।


जैसे ही क्लिप वायरल हुई, गीताबेन ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि सूरत लेउवा पटेल समाज (SLPS) द्वारा अमेरिका में आयोजित उनके एक शो ने 3,30,000 डॉलर (करीब 2.5 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। रबारी ने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, "मनपसंद समूह और हमें इस नेक काम का हिस्सा बनने पर बहुत गर्व है।"

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