क्या है SBI की एन्युइटी डिपॉजिट स्कीम? कैसे कराती है मंथली इनकम

SBI की यह स्कीम उन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद है, जिन्हें कहीं से बड़ी धनराशि मिली है और आय का कोई दूसरा बड़ा स्त्रोत नहीं है.

क्या है SBI की एन्युइटी डिपॉजिट स्कीम? कैसे कराती है मंथली इनकम

Thursday August 25, 2022,

3 min Read

अक्सर हम सुनते हैं कि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का ब्याज, मैच्योरिटी पर ही मिलेगा. लेकिन SBI (State Bank of India) की एक फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम ऐसी भी है, जो आपको मंथली इनकम कराती है. इस स्कीम का नाम है. इसके तहत ग्राहक वन टाइम डिपॉजिट करके हर महीने एक फिक्स्ड अमाउंट पा सकते हैं. SBI की यह स्कीम उन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद है, जिन्हें कहीं से बड़ी धनराशि मिली है और आय का कोई दूसरा बड़ा स्त्रोत नहीं है. उदाहरण के तौर पर रिटायर हो चुके कर्मचारी. आइए जानते हैं SBI की इस स्कीम की डिटेल...

कौन खोल सकता है अकाउंट

SBI एन्युइटी डिपॉजिट स्कीम में नाबालिग सहित कोई भी व्यक्ति अकाउंट खोल सकता है. स्कीम का लाभ देशभर में मौजूद SBI शाखाओं में लिया जा सकता है. अकाउंट सिंगल या ज्वॉइंट में खुलवाया जा सकता है. साथ ही अकाउंट को SBI की एक ब्रांच से दूसरे में ट्रांसफर करने की सुविधा है.

डिपॉजिट लिमिट और ब्याज दर

SBI एन्युइटी डिपॉजिट स्कीम में कोई अधिकतम डिपॉजिट लिमिट नहीं है. ब्याज दर SBI की फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दर के समान है. SBI में अभी एफडी पर विभिन्न मैच्योरिटी पीरियड के लिए ब्याज दर 2.90 फीसदी सालाना से लेकर 5.65 फीसदी सालाना तक है. 60 वर्ष या उससे अधिक की आयु वाले वरिष्ठ नागरिकों को देय ब्याज दर, 3.40 फीसदी सालाना से लेकर 6.45 फीसदी सालाना तक है. SBI स्टाफ और SBI पेंशनभोगियों को देय ब्याज दर, लागू ब्याज दर से 1.00% अधिक होगी.

बैंक के मुताबिक Annuity Deposit Scheme में ब्याज का भुगतान जिस दिन अकाउंट खोला गया, उसके अगले महीने की उसी तारीख से शुरू होगा. जमा अवधि 3, 5, 7 या 10 साल है. याद रहे भुगतान TDS (Tax Deducted at Source) काटने के बाद खाते में होगा.

मिनिमम मंथली इनकम

मंथली इनकम, मिनिमम 1000 रुपये से शुरू होगी और इसी के आधार पर आपके द्वारा चुनी गई जमा अवधि के लिए डिपॉजिट अमाउंट निर्धारित होगा. ध्यान रहे कि चूंकि यह स्कीम मासिक भुगतान वाली है, इसलिए इसमें आपके द्वारा जमा किया गया मूलधन धीर-धीरे घटता जाएगा.

ओवरड्राफ्ट सुविधा

विशेष मामलों में एन्युइटी के बैलेंस अमाउंट के 75 फीसदी तक ओवरड्राफ्ट/लोन लिया जा सकता है. ओवरड्राफ्ट दिए जाने के बाद केवल ऋण खाते में ही एन्युइटी की राशि का भुगतान होगा. स्कीम के तहत अकाउंट को जमाकर्ता की मृत्यु की स्थिति में मैच्योरिटी से पहले बंद कर सकते हैं. 15 लाख रुपये तक के डिपॉजिट्स के लिए भी समय पूर्व भुगतान की अनुमति है, लेकिन प्रीमैच्योर क्लोजर पर पेनल्टी लगेगी.