जानिए क्या और कैसे होता है शेयर मैनिपुलेशन, किसे होता है इससे फायदा-नुकसान

बहुत से लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर ये शेयर मैनिपुलेशन क्या होता है और कैसे होता है. सवाल ये भी है कि आखिर शेयर मैनिपुलेट करने से किसे फायदा होता है और किसका नुकसान होता है.

जानिए क्या और कैसे होता है शेयर मैनिपुलेशन, किसे होता है इससे फायदा-नुकसान

Tuesday February 28, 2023,

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गौतम अडानी (Gautam Adani) के खिलाफ हिंडनबर्ग की रिपोर्ट (Hindenburg Report) आने के बाद से कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई. गौतम अडानी पर आरोप लगा था कि उन्होंने शेयर मैनिपुलेशन (Share Manipulation) किया है. यानी शेयरों की कीमत में गड़बड़ी की है और उन्हें अपने फायदे के लिए ऊपर चढ़ाया है. ऐसे में बहुत से लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर ये शेयर मैनिपुलेशन क्या होता है और कैसे होता है. सवाल ये भी है कि आखिर शेयर मैनिपुलेट करने से किसे फायदा होता है और किसका नुकसान होता है. आइए जानते हैं इसके बारे में.

पहले जानिए क्या होता है शेयर मैनिपुलेशन

शेयर मैनिपुलेशन का सीधा सा मतलब है शेयरों की कीमतों में गड़बड़ी करना. यानी अगर कोई कंपनी खुद के शेयरों की कीमत या कोई भी शख्स किसी भी शेयर की कीमत तो गलत तरीके से बढ़ाता है तो उसे शेयर मैनिपुलेशन कहते हैं.

कैसे किया जाता है शेयर मैनिपुलेशन?

शेयर मैनिपुलेशन का कोई एक निश्चित तरीका नहीं है. इसे इनसाइडर ट्रेडिंग के जरिए भी किया जाता है. इनसाइडर ट्रेडिंग के तहत कुछ लोगों का एक ग्रुप एक ही कंपनी के शेयर को बार-बार आपस में ही खरीदता-बेचता है और शेयरों की कीमत को ऊपर चढ़ाता है.

शेयर मैनिपुलेशन का जो आरोप गौतम अडानी पर लगा है, उसमें दावा किया गया है उन्होंने शेल कंपनियां बनाकर ऐसा किया. शेल कंपनियों के जरिए शेयर मैनिपुलेशन का मतलब है कि इन कंपनियों के जरिए अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों को खरीदा गया होगा. इससे बाजार में सप्लाई होने वाले शेयरों की संख्या बहुत कम हो गई होगी. ऐसे में शेयरों को खरीदने की डिमांड तो आई, लेकिन सप्लाई बहुत कम होने की वजह से शेयरों के दाम बेतहाशा ऊपर चढ़ते चले गए. खैर, ऐसा वाकई में हुआ था या नहीं ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा.

किसे होता है मैनिपुलेशन का फायदा-नुकसान?

शेयर मैनिपुलेशन अगर कोई कंपनी करती है तो इसका फायदा उसे सबसे ज्यादा होता है. दरअसल, शेयर मैनिपुलेशन के जरिए वह अपने शेयरों के दाम बहुत ज्यादा बढ़ा लेती है और फिर उन शेयरों के बदले बैंक से लोन लेती है. शेयरों की कीमत अच्छी होती है तो हर कोई लोन आसानी से दे देता है, लेकिन कीमत कम होने पर लोन मिलना मुश्किल होता है.

वहीं दूसरी ओर, इसका फायदा निवेशकों को भी खूब होता है. उन्हें अपने निवेश पर तगड़ा रिटर्न मिलता हुआ दिखता है. अगर वह छोटे निवेशक हैं और समय से शेयर बेचकर निकल जाते हैं तब तो उन्हें मुनाफा होता है, वरना अगर वह लंबे वक्त तक रुकते हैं और ये पता चल जाता है कि शेयर मैनिपुलेशन के जरिए दाम बढ़ाए गए हैं, तो अचानक से शेयरों में भारी गिरावट आती है, जिससे निवेशकों को ही सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है. शेयरों में गिरावट से कंपनी को भी नुकसान होता है, क्योंकि उसने उन शेयरों के दम पर ही लोन लिया था.