Women’s Entrepreneurship Day: मिलिए उन महिलाओं से, जिन्होंने सपनों को Startup में बदला
Women’s Entrepreneurship Day 2025 पर मिलिए भारत की उन प्रेरक महिला उद्यमियों से, जिन्होंने छोटे विचारों को सफल स्टार्टअप में बदलकर न सिर्फ अपनी पहचान बनाई बल्कि देश के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाई.
हर साल 19 नवंबर को महिला उद्यमिता दिवस (Women’s Entrepreneurship Day) मनाया जाता है. यह दिन महिला उद्यमियों की उपलब्धियों को सम्मान देने और उनके व्यवसायिक प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है. यह एक वैश्विक पहल है, जिसे Women’s Entrepreneurship Development Organization (WEDO) ने शुरू किया था, और आज इसे 144 से अधिक देशों में अपनाया गया है.
महिला उद्यमिता दिवस को संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी मान्यता दी है. यह दिवस पहली बार 2014 में न्यूयॉर्क सिटी में मनाया गया था और अधिकांश संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों ने इसमें भाग लिया था. इसी अवसर पर WEDO द्वारा Pioneer Award भी दिया गया था.
इस दिन की शुरुआत इसलिए की गई थी ताकि उन चुनौतियों को पहचाना और दूर किया जा सके जो महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में आती हैं, जैसे शिक्षा की कमी, सांस्कृतिक बाधाएं, पूंजी की कमी और सही मार्गदर्शन न मिलना. इसका उद्देश्य महिलाओं को व्यापार की दुनिया में समान अवसर दिलाना और लिंग भेदभाव को समाप्त करना है. यह दिन महिलाओं को व्यापार में सशक्त बनाने और वैश्विक गरीबी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
आज के समय में महिलाएं न केवल स्टार्टअप जगत में बल्कि स्वतंत्र फ्रीलांसर और कॉर्पोरेट सलाहकार के रूप में भी सफल हो रही हैं. तकनीक और आर्थिक विकास के साथ-साथ अधिक महिलाएं अब उद्यमिता की ओर बढ़ रही हैं.
तो चलिए आज हम आपको मिलवाते हैं ऐसी महिलाओं से, जिन्होंने न सिर्फ अपना स्टार्टअप खड़ा किया, बल्कि उसे नई ऊंचाइयों तक ले जाकर देश के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं.
सारिका शेट्टी
मुंबई की सारिका शेट्टी के एक निजी अनुभव ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि क्यों न किराए को भी वित्तीय दुनिया में जगह दी जाए. और इस सोच से जन्म हुआ RentenPe का. साल 2022 में सारिका ने RentenPe की स्थापना की थी. इसका हेडक्वार्टर मुंबई में है और बेंगलुरु में भी ऑफिस है.

RentenPe का बिज़नेस मॉडल इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि इसमें किराएदार और मकान मालिक दोनों को फायदा हो. किरायेदार RentenPe ऐप से किराया चुका सकते हैं—चाहे UPI से हो, कार्ड से हो या डिजिटल पेमेंट मोड से. बदले में उन्हें कैशबैक और ऑफर मिलते हैं. सबसे अहम बात यह है कि उनका R Score™ लगातार बढ़ता है, जिससे उन्हें आगे चलकर होम लोन या पर्सनल लोन में आसानी होती है. वहीं मकान मालिकों को मिलते हैं—वेरिफाइड टेनेंट प्रोफाइल, जल्दी किराया पाने के विकल्प, जीरो डिपॉजिट सॉल्यूशन और एक स्ट्रक्चर्ड पेमेंट रिकॉर्ड.
अब कंपनी का लक्ष्य है टियर-1 और टियर-2 शहरों में तेजी से विस्तार किया जाए. साथ ही, क्रेडिट ब्यूरो और फिनटेक कंपनियों के साथ और साझेदारी की जाए. इसके अलावा, कंपनी UAE और खाड़ी देशों तक विस्तार करना चाहती है, जहाँ बड़ी संख्या में लोग किराए के घरों में रहते हैं.
दिशी सोमानी
दिशी सोमानी ने दिल्ली से Dishis Designer Jewellery की शुरुआत की थी. ग्वालियर के एक सफल कारोबारी घराने से आने वाली दिशी सोमानी के पिता इंजीनियर थे. दिशी ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ जेम्स एंड ज्वेलरी और IMT दुबई से फाइनेंस में MBA किया है. उन्होंने Axis Bank, ICICI Bank में बतौर फाइनेंस एक्सपर्ट जॉब करते हुए अपने करियर का आग़ाज़ किया.
बाद में, दिशी ने ज्वेलरी डिज़ाइन की कला के प्रति अपने जुनून को पूरा करते हुए, साल 2015 में अपने ब्रांड की शुरुआत की. इस बिजनेस में उन्होंने शुरुआत में महज 5000 रुपये का निवेश किया था. और आज उनके ब्रांड का सालाना टर्नओवर 75 लाख रुपये से अधिक है.

शुरुआती दिनों में, ब्रांड ने अपनी वेबसाइट पर लगभग 100 डिज़ाइन अपलोड किए और PC Jewellers, Snapdeal, और Flipkart जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म पर लिस्टिंग करके अपनी पहुँच का विस्तार किया, जिससे हमें अधिक से अधिक ग्राहकों से जुड़ने में मदद मिली.
ब्रांड के रेवेन्यू मॉडल और आंकड़ों (मार्च 2025) का खुलासा करते हुए, फाउंडर दिशी सोमानी बतातीं हैं, “हम ऑन-डिमांड ऑर्डरिंग मॉडल के जरिए रेवेन्यू हासिल करते हैं. वित्त वर्ष 2022-23 में, हम लगभग 0.60 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल करने में कामयाब हुए और वित्त वर्ष 2023-24 में हमारा रेवेन्यू 0.80 करोड़ था. ब्रांड ने दोनों वर्षों में 30% की लगातार वृद्धि दर के साथ तगड़ी ग्रोथ देखी है. हमारा वर्तमान रेवेन्यू 1 करोड़ रुपये है, और हम बेहद खुश हैं कि हम केवल व्यक्तिगत संसाधनों के साथ इतनी महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने में सफल रहे.”
सौम्या कल्लुरी
सौम्या कल्लुरी ने 2018 में Dwij की शुरुआत की, जिसका संस्कृत में मतलब होता है “दूसरा जन्म” या “नई ज़िंदगी.”
इस मुंबई-स्थित ब्रांड का मिशन है: पुराने कपड़ों को बचाकर उन्हें खूबसूरत, उपयोगी और टिकाऊ प्रोडक्ट्स में बदलना.
Dwij आज एक ऐसा सर्कुलर सिस्टम बना चुका है, जहां फेंके हुए फैब्रिक्स को दोबारा इस्तेमाल में लाया जाता है. यह ब्रांड पुराने डेनिम से टोट बैग, बैकपैक, स्लिंग बैग, और पाउच जैसी चीजें बनाता है. B2B (बिज़नेस-टू-बिज़नेस) स्तर पर Dwij ने अपनी सस्टेनेबल सोच और क्वालिटी प्रोडक्ट्स से कई दिग्गज कंपनियों का भरोसा जीता है. ब्रांड ने RBI, Marico, Alkem, Novo Nordisk, IIM Bombay, Godrej, Bajaj और Marsh McLennan जैसे बड़े क्लाइंट्स को अपने अपसायकल्ड बैग्स और कॉर्पोरेट गिफ्टिंग प्रोडक्ट्स सप्लाई किए हैं.

शुरुआत में Dwij सिर्फ एक सिंपल टोट बैग बनाता था. लेकिन टीम ने देखा कि असर तब ही पड़ेगा जब लोग रोज़मर्रा में इन बैग्स का इस्तेमाल करें. इसलिए महामारी के दौरान Dwij ने दिशा बदली और ऑफिस, ट्रैवल और स्कूल बैग्स, साथ ही होम डेकोर प्रोडक्ट्स बनाना शुरू किया.
बेहतर क्वालिटी और स्टाइल के साथ यह एक प्रीमियम, सस्टेनेबल लाइफस्टाइल ब्रांड के रूप में उभरा. आज Dwij के SKU (प्रोडक्ट्स की वैराइटी) बढ़कर 66 से 162 हो चुके हैं. वित्त वर्ष 22 से अब तक कंपनी का रेवेन्यू 6 गुना और प्रोडक्ट सेल्स 3.5 गुना बढ़ चुकी हैं. Dwij की टीम में 15 दर्जी, कटर और एम्ब्रॉयडरी आर्टिस्ट हैं, साथ ही तीन महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के करीब 30-35 महिलाएं जुड़ी हैं.
रिद्धि शर्मा
जब रिद्धि शर्मा 2018 में माँ बनीं, तो उन्हें एक ऐसी समस्या का सामना करना पड़ा जिसने आगे चलकर हजारों ज़िंदगियाँ बदल दीं. अपने नवजात बच्चे के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद आयुर्वेदिक उत्पाद तलाशते हुए, उन्हें कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिस पर वह पूरी तरह भरोसा कर सकें.
तब उन्होंने तय किया: अगर बाज़ार में नहीं है, तो मैं खुद बनाऊंगी.

2020 में रिद्धि ने सिर्फ ₹2 लाख से BabyOrgano की शुरुआत की. उनका मकसद था: प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक पैरेंटिंग के बीच के अंतर को खत्म करना. जो सफर एक इम्यूनिटी-बूस्टिंग प्रोडक्ट से शुरू हुआ था, आज 10 लाख (1 मिलियन) से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच चुका है और बच्चों के लिए 20 से अधिक टॉक्सिन-फ्री वेलनेस प्रोडक्ट्स उपलब्ध करा रहा है.
इस महीने BabyOrgano ने ₹20 करोड़ की फंडिंग हासिल की है, जिसका नेतृत्व RPSG Capital Ventures ने किया. कंपनी का लक्ष्य है कि 2027 तक 5 मिलियन (50 लाख) पेरेंट्स तक पहुँचा जाए और आयुर्वेदिक किड्स वेलनेस को वैश्विक स्तर तक ले जाया जाए.
एक आईटी प्रोफेशनल से माँ और फिर सफल उद्यमी बनने तक का रिद्धि का सफर प्रेरणादायक है. उनकी दादी के पुराने नुस्खे आज पूरे भारत में परिवारों को ‘पहले आयुर्वेद’ अपनाने की प्रेरणा दे रहे हैं.
तेजस्विनी अल्लिकांती
तेजस्विनी अल्लिकांती एक ऐसे परिवार में पली-बढ़ी जहाँ शिक्षा की गहरी जड़ें थीं. उनके दादाजी प्रधानाचार्य थे. बचपन से ही सीखना उनके जीवन का हिस्सा रहा है. उन्होंने जल्दी ही समझ लिया था कि व्यक्तिगत ध्यान कितना फर्क लाता है। उन्होंने 10वीं में टॉप किया और IIT बॉम्बे से पढ़ाई पूरी की.

upGrad में दो साल काम करते हुए उन्हें यह समझ आया कि हर छात्र अलग तरीके से सीखता है. तभी उन्होंने महसूस किया कि पर्सनलाइज्ड लर्निंग कोई विलासिता नहीं, बल्कि आवश्यकता है. जब GenAI (जनरेटिव एआई) आया, तो उन्हें लगा कि अब शिक्षा को व्यक्तिगत स्तर पर बड़े पैमाने पर पहुँचाया जा सकता है, और इसी सोच ने उन्हें LearnMigo शुरू करने की प्रेरणा दी.
सफर आसान नहीं था. बाज़ार में बदलाव, सोच में रुकावटें और VC फंडिंग की मंदी ने कई बार रास्ता रोका, लेकिन उनका मकसद कभी नहीं डगमगाया.
आज वही उद्देश्य उन्हें Masai में ले आया है, जहाँ वे बड़े स्तर पर व्यक्तिगत शिक्षा को सबके लिए सुलभ बनाने पर काम कर रहीं है. तेजस्विनी बताती हैं, “यहीं मुझे मेरा इकिगाई (जीवन का उद्देश्य) मिला है. यह सपना पूरा करना कि हर विद्यार्थी, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में हो, अपनी खुद की सफलता की राह पा सके.”
महिला उद्यमिता दिवस हमें याद दिलाता है कि हर विचार, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, दुनिया बदलने की ताकत रखता है, अगर उसमें किसी महिला की लगन और आत्मविश्वास शामिल हो.
इन प्रेरक कहानियों से यही सीख मिलती है कि उद्यमिता केवल बिज़नेस नहीं, बल्कि बदलाव का माध्यम है. हर उस महिला को सलाम, जो अपने सपनों को हकीकत में बदल रही है और भारत को आत्मनिर्भर बना रही है.



