जितने हिस्से में फैला है आयरलैंड, 2021 में उसके बराबर जंगल कर दिए गए साफ़

By Prerna Bhardwaj
November 03, 2022, Updated on : Thu Nov 03 2022 13:01:50 GMT+0000
जितने हिस्से में फैला है आयरलैंड, 2021 में उसके बराबर जंगल कर दिए गए साफ़
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ग्लास्गो में कॉर- 26 जलवायु शिखर सम्मेलन में भले ही सौ देशों ने 2030 तक वनों की कटाई पर रोक लगाने पर अपनी सहमति जताई है, पर मौजूदा स्थिति चिंताजनक है.  तमाम नियम कानूनों के बाद भी वनों की कटाई तेजी से चल रही है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि 1990 के बाद से 420 मिलियन हेक्टेयर (एक अरब एकड़) जंगल नष्ट हो गए हैं.


2014 में संयुक्त राष्ट्र ने 2020 तक वनों की कटाई को आधा करने और 2030 तक इसे समाप्त करने के लिए एक समझौते की घोषणा की. फिर, 2017 में इसने 2030 तक दुनिया भर में वनाच्छादित भूमि को 3% बढ़ाने का एक और लक्ष्य निर्धारित किया. लेकिन वनों की कटाई ‘एक खतरनाक दर’ पर जारी रही, 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्राजील, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और इंडोनेशिया सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों में से हैं. जहां वनों की कटाई लगातार जारी है. आईए जानते हैं कि दुनिया में कितना घटा गया वन क्षेत्र.


खाद्य अनाज की बढ़ती मांग, तेल और कोयला खनन कार्यों के लिए जंगलों को काट रहे हैं. वनों की कटाई के लिए जंगलों में सड़कों का निर्माण भी जिम्मेदार है.एक अनुमान के अनुसार कृषि और लकड़ी की मांगों को पूरा करने के लिए 40% से अधिक जंगल पूरी दुनिया में साफ हो चुके हैं.


वनकटाई की वजह से 10-12 प्रतिशत ग्रीनहाउस गैस एमिशन होता है.


एक रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2021 में विश्वभर में 6.8 मिलियन हेक्टेयर- रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड के बराबर- के एरिया वनकटाई की गई है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वनकटाई का 98 प्रतिशत हिस्सा ट्रॉपिकल रीजन में हुआ है.

इतने बड़े पैमाने पर जंगल खत्म हो रहे हैं, भारत में क्या है इसको लेकर नियम?

भारत में ‘वृक्ष प्रत्यारोपण नीति 2020’ के अनुसार विकास योजनाओं के तहत किसी भी पेड़ को अब अनावश्यक रूप से हटाया नहीं जा सकेगा. पेड़ को काटने और प्रत्यारोपण से बचने के लिए डिजाइन में हर संभव बदलाव करने की कोशिश करनी होगी. यदि संभव न हो तो ही पेड़ को काटा या प्रत्यारोपित किया जा सकेगा. वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत प्रतीपूरक वनीकरण करना एक अनिवार्य शर्त है. इसमें वन भूमि को गैर-वन वाले कार्यों के लिए ट्रांसफर की जाती है. विकास कार्यों के दौरान काटे गए 80 फीसदी पेड़ों का प्रत्यारोपण अनिवार्य किया गया है. विकास परियोजना के तहत पेड़ों के नुकसान के एवज में अब 1 वृक्ष की जगह 10 पौधे लगाने होंगे. प्रत्यारोपण होने के 1 साल बाद तक 80 फीसदी पेड़ों को संरक्षित किया जाना होगा.


केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने लोकसभा में बताया है कि सिर्फ वर्ष 2020-21 में ही देश के विभिन्न हिस्सों में 30 लाख 97 हजार 721 पेड़ काटे गए थे.


पेड़ों को काटने को लेकर जब भी सवाल उठता है तो प्रशासन यह जवाब देकर खुद को आरोपमुक्त करते हैं कि वे कानून के अनुसार पौधे लगाकर इसकी भरपाई कर रहे हैं. है. लेकिन ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जिसमें यह पता चला है कि वनों को काटकर जो पेड़ लगाए जाते हैं, उसमें से या तो अधिकतर सूख जाते हैं या मवेशी वगैरह उन्हें खा जाते हैं और उनका रखरखाव अच्छे से नहीं किया जाता है. दूसरे शब्दों में कहें तो यदि सरकार यह दावा करती है कि उसने इतने पेड़ों को काटकर इतने पौधे लगाए हैं, इसका मतलब ये नहीं है कि उसमें से सभी पौधे, पेड़ में तब्दील हो जाएंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि पौधों को पेड़ों में तब्दील होने का आंकड़ा और भी कम है.

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