6 साल पहले 1 लाख रु से शुरू किया था हौजरी गारमेंट्स का कारोबार, आज 3 करोड़ रु से ज्यादा टर्नओवर

By Ritika Singh
June 27, 2022, Updated on : Wed Aug 24 2022 14:36:49 GMT+0000
6 साल पहले 1 लाख रु से शुरू किया था हौजरी गारमेंट्स का कारोबार, आज 3 करोड़ रु से ज्यादा टर्नओवर
शैलेश केवल 10वीं कक्षा तक पढ़े हैं. लेकिन उनका कम पढ़ा लिखा होना, उनके कुछ करके दिखाने के जज्बे के आड़े नहीं आया.
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नोएडा के सेक्टर 65 की एक बिल्डिंग का बेसमेंट..सिलाई मशीनें धड़ाधड़ चल रही हैं...कुछ हाथ तरह-तरह के कपड़ों पर धागे की आड़ी टेढी लाइनें बनाने में व्यस्त हैं. कुछ हाथ कैंची से कपड़ा काट रहे हैं तो कुछ तैयार कपड़ों की पैकिंग में लगे हैं...


यह नजारा है हौजरी बिजनेस से जुड़े शैलेश कुमार (Shailash Kumar) की यूनिट का. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के एटा से ताल्लुक रखने वाले शैलेश के हौजरी कारोबार का टर्नओवर आज 3.35 करोड़ रुपये है. शैलेश केवल 10वीं कक्षा तक पढ़े हैं. लेकिन उनका कम पढ़ा लिखा होना, उनके कुछ करके दिखाने के जज्बे के आड़े नहीं आया. शैलेश को शुरू से ही बड़ा आदमी बनना था, वह कुछ अपना करना चाहते थे और पैसे कमाना चाहते थे. मेहनत, स्किल्स और किस्मत का ऐसा तालमेल बना कि शैलेश ने न केवल अपने सपने को सच कर दिखाया बल्कि वह दिनोंदिन कामयाबी की नई ऊंचाइयां छू रहे हैं.

1995 से नोएडा आना जाना किया शुरू

बचपन में पिता के गुजरने के बाद शैलेश की मां ने उन्हें पाला. 10वीं तक की पढ़ाई करने के बाद साल 1995 से उन्होंने नोएडा आना जाना शुरू किया और तलाश शुरू की कि वह क्या कर सकते हैं. वक्त गुजरता गया लेकिन मंजिल तक का रास्ता नहीं मिला. फिर उन्होंने नोएडा में 2000 के दशक की शुरुआत में अपने एक रिश्तेदार की मदद से सिलाई यूनिट्स में वर्कफोर्स उपलब्ध कराने का काम शुरू किया. शैलेश बताते हैं कि इस काम की मदद से उनकी कई लोगों से जान पहचान बनी. इन्हीं सब के बीच उन्होंने ठान लिया कि वह भी खुद का गारमेंट का बिजनेस शुरू करेंगे. लेकिन बिजनेस शुरू करने से पहले उससे जुड़े गुर सीखना जरूरी होता है. इसलिए शैलेश ने एक साल तक सिलाई की बारीकियां सीखीं. जब उन्हें लगा कि अब वह खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, तब उन्होंने साल 2016 में 1 लाख रुपये की पूंजी से पल्लवी एंटरप्राइजेस को शुरू किया.

केवल 2 सिलाई मशीन और 3 लोगों के साथ की थी शुरुआत

शैलेश के मुताबिक, जब उन्होंने शुरुआत की, उस वक्त उनकी यूनिट में केवल 2 सिलाई मशीन और 3 लोग थे. आज उनके यहां 10-12 लोग हैं. इनमें महिलाएं भी हैं. वर्कर्स का वेतन 15-16000 रुपये प्रतिमाह है. इतना ही नहीं वह श्रीराम एक्सपोर्ट के रजिस्टर्ड नाम से एक्सपोर्ट भी करते हैं. शैलेश की यूनिट में केवल हौजरी गारमेंट्स बनते हैं. एक्सपोर्ट के अलावा वह इनकी बिक्री ई-कॉमर्स के माध्यम से करते हैं. उनके ब्रांड का नाम एसएसडीएसएस फैशन है. प्रॉडक्ट की कीमत 99 रुपये से लेकर 1999 रुपये तक है. शैलेश का कहना है कि उन्होंने अभी तक अपने कारोबार को जितना भी विस्तार दिया है, वह उन्हें हुई कमाई की मदद से ही दिया है. इसके लिए उन्हें कोई लोन नहीं लेना पड़ा.

अभी रुका हुआ है एक्सपोर्ट

शैलेश बताते हैं कि कोरोना आने से पहले उनका माल जापान, फ्रांस और अमेरिका में एक्सपोर्ट होता था. लेकिन कोविड के आने के बाद हर जगह लॉकडाउन लगने से एक्सपोर्ट रुक गया. यह अब फिर शुरू होने जा रहा है. शैलेश ने यह भी बताया कि कोरोना आने से पहले उनके पास अमेरिका से एक बड़ा ऑर्डर आया था लेकिन लॉकडाउन की वजह से वह अटक गया. लेकिन ऑर्डर उनसे छिना नहीं है. वह इसके सिलसिले में जल्द ही अमेरिका जाने वाले हैं.

world-msme-day-success-story-of-shailash-kumar-who-has-hosiery-business-in-noida-with-more-than-3-crore-rs-turnover

लॉकडाउन के दौरान क्या किया?

लॉकडाउन के दौरान जब व्यवसाय ठप हो गए थे तो शैलेश ने अपनी सिलाई यूनिट में पीपीई किट बनाना शुरू किया. 3 महीनों तक वह केवल पीपीई किट बना रहे थे. इस दौरान वह थोक में ऑर्डर लेते थे और अपनी व कई अन्य यूनिट्स के साथ मिलकर उन्होंने 3 लाख पीपीई किट्स का निर्माण किया.

आगे क्या है प्लान

शैलेश की यूनिट में हर रोज 520 पीस तैयार होते हैं. शैलेश बताते हैं कि वह अपने इस बिजनेस से बेहद खुश हैं और इसे एक्सपेंड करने की सोच रहे हैं. उनकी योजना सेक्टर 65 में ही एक अन्य जगह पर यूनिट शिफ्ट करने की है. वहां वह 50 सिलाई मशीनें लगाएंगे और प्रॉडक्शन बढ़ाएंगे. इसे भी वह खुद की पूंजी से करने वाले हैं. इसके अलावा शैलेश की योजना टाइल्स बिजनेस में उतरने की भी है. वह गोवा में इस बिजनेस को शुरू करने वाले हैं.