विश्व कविता दिवस: नामचीन कवियों की चुनिंदा प्रेरक कविताएं

By रविकांत पारीक
March 21, 2021, Updated on : Sun Mar 21 2021 04:46:15 GMT+0000
विश्व कविता दिवस: नामचीन कवियों की चुनिंदा प्रेरक कविताएं
यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) ने वर्ष 1999 में 30 वें सत्र के दौरान कवियों और कविता की सृजनात्मक महिमा को सम्मान देने के लिए यह दिवस मनाने का निर्णय लेते हुए इसकी घोषणा की थी।
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हर साल, 21 मार्च को विश्व कविता दिवस (World Poetry Day) मनाया जाता है। यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) ने वर्ष 1999 में 30 वें सत्र के दौरान कवियों और कविता की सृजनात्मक महिमा को सम्मान देने के लिए यह दिवस मनाने का निर्णय लेते हुए इसकी घोषणा की थी। विश्व कविता दिवस के अवसर पर भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और साहित्य अकादमी की ओर से सबद-विश्व कविता उत्सव का आयोजन किया जाता है।

क्या है इस दिवस का उद्देश्य

विश्व कविता दिवस मनाने का उद्देश्य यही है कि विश्व में कविताओं के लेखन, पठन, प्रकाशन और शिक्षण के लिए नए लेखकों को प्रोत्साहित किया जाए। इसके जरिए छोटे प्रकाशकों के उस प्रयास को भी प्रोत्साहित किया जाता है जिनका प्रकाशन कविता से संबंधित है। जब यूनेस्को ने इस दिन की घोषणा की थी तब उसने कहा था कि क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कविता आंदोलन को यह एक तरह की पहचान मिली है।


नामचीन कवियों की प्रेरक कविताएं

नर हो, न निराश करो मन को / मैथिलीशरण गुप्त

नर हो, न निराश करो मन को


कुछ काम करो, कुछ काम करो

जग में रह कर कुछ नाम करो

यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो

समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो

कुछ तो उपयुक्त करो तन को

नर हो, न निराश करो मन को।


संभलो कि सुयोग न जाय चला

कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला

समझो जग को न निरा सपना

पथ आप प्रशस्त करो अपना

अखिलेश्वर है अवलंबन को

नर हो, न निराश करो मन को।


जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ

फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ

तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो

उठके अमरत्व विधान करो

दवरूप रहो भव कानन को

नर हो न निराश करो मन को।


निज गौरव का नित ज्ञान रहे

हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे

मरणोंत्‍तर गुंजित गान रहे

सब जाय अभी पर मान रहे

कुछ हो न तजो निज साधन को

नर हो, न निराश करो मन को।


प्रभु ने तुमको कर दान किए

सब वांछित वस्तु विधान किए

तुम प्राप्‍त करो उनको न अहो

फिर है यह किसका दोष कहो

समझो न अलभ्य किसी धन को

नर हो, न निराश करो मन को।


किस गौरव के तुम योग्य नहीं

कब कौन तुम्हें सुख भोग्य नहीं

जन हो तुम भी जगदीश्वर के

सब है जिसके अपने घर के

फिर दुर्लभ क्या उसके जन को

नर हो, न निराश करो मन को।


करके विधि वाद न खेद करो

निज लक्ष्य निरन्तर भेद करो

बनता बस उद्‌यम ही विधि है

मिलती जिससे सुख की निधि है

समझो धिक् निष्क्रिय जीवन को

नर हो, न निराश करो मन को

कुछ काम करो, कुछ काम करो।


स्वदेश के प्रति / सुभद्राकुमारी चौहान

आ, स्वतंत्र प्यारे स्वदेश आ,

स्वागत करती हूँ तेरा।

तुझे देखकर आज हो रहा,

दूना प्रमुदित मन मेरा॥


आ, उस बालक के समान

जो है गुरुता का अधिकारी।

आ, उस युवक-वीर सा जिसको

विपदाएं ही हैं प्यारी॥


आ, उस सेवक के समान तू

विनय-शील अनुगामी सा।

अथवा आ तू युद्ध-क्षेत्र में

कीर्ति-ध्वजा का स्वामी सा॥


आशा की सूखी लतिकाएं

तुझको पा, फिर लहराईं।

अत्याचारी की कृतियों को

निर्भयता से दरसाईं॥


मौन और शब्द / हरिवंश राय बच्चन

एक दिन मैंने

मैन में शब्द को धँसाया था

और एक गहरी पीड़ा,

एक गहरे आनंद में,

सन्निपात-ग्रस्त सा,

विवश कुछ बोला था;

सुना, मेरा वह बोलना

दुनिया में काव्य कहलाया था।


आज शब्द में मौन को धँसाता हूँ,

अब न पीड़ा है न आनंद है

विस्मरण के सिन्धु में

डूबता-सा जाता हूँ,

देखूँ,

तह तक

पहुँचने तक,

यदि पहुँचता भी हूँ,

क्या पाता हूँ।

टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते / अटल बिहारी वाजपेयी

टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते

सत्य का संघर्ष सत्ता से

न्याय लड़ता निरंकुशता से

अंधेरे ने दी चुनौती है

किरण अंतिम अस्त होती है

दीप निष्ठा का लिये निष्कंप

वज्र टूटे या उठे भूकंप

यह बराबर का नहीं है युद्ध

हम निहत्थे, शत्रु है सन्नद्ध

हर तरह के शस्त्र से है सज्ज

और पशुबल हो उठा निर्लज्ज

किन्तु फिर भी जूझने का प्रण

अंगद ने बढ़ाया चरण

प्राण-पण से करेंगे प्रतिकार

समर्पण की माँग अस्वीकार

दाँव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते

टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते

हम को मन की शक्ति देना / गुलज़ार


हम को मन की शक्ति देना, मन विजय करें

दूसरो की जय से पहले, ख़ुद को जय करें।


भेद भाव अपने दिल से साफ कर सकें

दोस्तों से भूल हो तो माफ़ कर सके

झूठ से बचे रहें, सच का दम भरें

दूसरो की जय से पहले ख़ुद को जय करें

हमको मन की शक्ति देना।


मुश्किलें पड़े तो हम पे, इतना कर्म कर

साथ दें तो धर्म का चलें तो धर्म पर

ख़ुद पर हौसला रहें बदी से न डरें

दूसरों की जय से पहले ख़ुद को जय करें

हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें।