[Year in Review 2021] क्विक कॉमर्स मॉडल की एंट्री: कैसे भारत को भा गया किराना सामानों की तेज डिलीवरी का मॉडल

[Year in Review 2021]  क्विक कॉमर्स मॉडल की एंट्री: कैसे भारत को भा गया किराना सामानों की तेज डिलीवरी का मॉडल

Wednesday December 29, 2021,

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इंस्टेंट नूडल्स का एक पैकेट खरीदने और बनाने में कितना समय लगता है? यदि सभी स्थितियां अनुकूल हैं, तो शायद कुल 12 मिनट। ऐसा इसलिए क्योंकि अब 10 मिनट के अंदर ही ग्रॉसरी आइटम को आपके घर पर डिलीवर करने का वादा करने वाला प्लेटफॉर्म आ गए हैं। यह भारत में कंज्यूमर्स के लिए एक नया अनुभव है।


2020 में कोरोना लॉकडाउन ने सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया और लोगों को रोजोना इस्तेमाल होने वाले जरूरी सामानों को खरीदने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा। इसी दौरान कई ने किराने का सामान और जल्द खराब होने वाली वस्तुओं को ऑनलाइन खरीदना शुरू कर दिया। इसके बाद, 2021 में ऑनलाइन किराना और फ्रेश प्रोड्यूस डिलीवरी कंपनियों ने कंज्यूमर्स को जोड़े रखने के लिए 10 मिनट की डिलीवरी के वादे के साथ 'सुविधा जनक पहलू' को लॉन्च कर दिया।


फूड डिलीवरी कंपनी Swiggy ने अगस्त 2020 में किराना और जरूरी सामानों की डिलीवरी सेवा इंस्टामार्ट शुरू की। कंपनी ने कहा कि वह 18 शहरों में सेवा मुहैया करा रहा है और अपने बिजनेस को और बढ़ाने के लिए 700 मिलियन डॉलर का निवेश करना चाह रही है। इंस्टामार्ट फिलहाल 30 से 45 मिनट में किराने का सामान डिलीवर करती है और 2022 की शुरुआत तक इसने 15 मिनट के भीतर डिलीवरी का लक्ष्य रखा है।


इसी फील्ड की एक और उभरती कंपनी है डुंजो (Dunzo), जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। इसने इस साल की शुरुआत में उपभोग्य कंज्यूमेबल्स उत्पादों की19 मिनट के भीतर डिलीवरी शुरू की। इस कंपनी में Google वेंचर्स और लाइटस्टोन से फंडिंग सपोर्ट मिला है और जिन्होंने फरवरी 2021 में कंपनी के सीरीज ई दौर में भाग लिया था।


ग्रोफर्स ने भी हाल ही में खुद को ब्लिंकिट (Blinkit) नाम से रिलॉन्च किया है और कहा कि वह ऐसी सभी जगहों पर अपनी सेवाएं बंद कर रही है, जहां वह 10 मिनट के सामान डिलीवर नहीं कर सकती है। ग्रोफर्स को जोमैटो से भारी पूंजी मिली है। इसके अलावा इस सेगमेंट में उतरने वाली एक नई कंपनी जेप्टो (Zepto) भी है। इसने अपनी स्थापना के छह महीनों के भीतर 160 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाने में कामयाब पाई और दो महीनों के भीतर इसका वैल्यूएशन दोगुना होकर 570 मिलियन डॉलर हो गया। 


ये घटनाएं स्पष्ट रूप से संकेत देती हैं कि क्विक कॉमर्स यहां अब लंबे समय तक रहने वाला है और यह निवेशकों का ध्यान आकर्षित करना जारी रखेगा। लेकिन वास्तव में 10 मिनट के अंदर किराने का सामान किसे चाहिए?


एवेंडस कैपिटल के डायरेक्टर प्रणय जैन ने योरस्टोरी को बताया, "क्या ग्राहक को वास्तव में 15 मिनट से कम समय में कुछ चाहिए? जरूरी नहीं है। हां लेकिन यह जरूर है कि अगर उसे जरूरत पड़ती है, तो यह उसके उपलब्ध है। क्विक कॉमर्स ग्राहकों को प्रसन्नता प्रदान करता है और यह अपेक्षा किराने के साथ-साथ अब दूसरे ऑनलाइन खरीदारी की ओर भी बढ़ेगी।”


ऐसा ट्रेंड ग्लोबल लेवल पर भी देखा गया है, जहां न्यूयॉर्क-मुख्यालय वाले इंस्टेंट ग्रॉसरी डिलीवरी ऐप JOKR और डिलीवरी स्टार्टअप GoPuff को जबरदस्त सफलता मिली है। GoPuff का तो जल्द ही IPO भी आने वाला है।

चीजों को अलग तरह से करना

क्विक कॉमर्स में मौजूदा उछाल 2015-16 के उस समय की याद दिलाता है, जब ब्लिंकिट का पूर्व अवतार "ग्रोफर्स", राइड-हेलिंग ऐप "ओला", और ईकॉमर्स सेक्टर की दिग्गज कंपनी फ्लिपकार्ट सहित अन्य कंपनियों ने दो घंटे से भी कम समय में ग्रॉसरी डिलीवरी करने के मॉडल का परीक्षण किया था। हालांकि तब उन्हें पूरा नहीं किया जा सका। समय की पांबदी और उसके साथ यूनिट इकॉनमी को बनाए रखना बहुत कठिन था।


हालांकि, मौजूदा समय पिछले वाले से अलग है क्योंकि अब कंपनियां डार्क स्टोर्स या हाइपरलोकल फुलफिलमेंट सेंटर का एक नेटवर्क बनाना चाहती हैं, जो बेहतर यूनिट इकोनॉमिक्स के लिए तैयार हो। यह सब कुछ जगह के बेहतर उपयोग, कम किराए, अलग-अलग एसकेयू (स्टॉक-कीपिंग यूनिट) और स्टोर-फ्रंट या सीधे किराना स्टोर से खरीदारी की तुलना में तेजी से चुनने और पैकिंग के कारण है । 


फ्राजो (Fraazo) के सीईओ और को-फाउंडर अतुल कुमार कहते हैं, “सप्लाई चेन के तीन भाग हैं – फार्मर कलेक्शन सेंटर, डार्क स्टोर नेटवर्क और लास्ट-माइल डिलीवरी। हम बेहतर ग्राहक अनुभव के लिए तीनों भागों में प्रक्रिया और टेक्नोलॉजी को नियंत्रित करते हैं। हम एक टच डिलीवरी को प्राथमिकता देते हैं, जो ग्राहकों को आश्वस्त करता है कि उत्पाद जितना ताजा उसे मिल सकता है, उतना ताजा है और यह कई हाथों से होकर नहीं गुजरा है।” फ्रेजो एक ग्रीन ग्रॉसरी प्लेटफॉर्म है, जो क्विक कॉमर्स सेगमेंट में दूसरी कंपनियों से मुकाबला कर रही है।


उन्होंने बताया, “फ्रेश कैटेगरी के मामले में, ग्राहक अनुभव और उत्पाद की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि उपज के साथ किस तरीके से व्यवहार किया गया और इसे खेत से डाइनिंग टेबल तक पहुंचाने में कितना समय लगा है। केवल लास्ट-माइल क्विक डिलीवरी की पेशकश करने से ऑनलाइन ग्रॉसरी शॉपिंग के साथ ग्राहक अनुभव में सुधार नहीं होता है।”


Instamart, Dunzo, और Zepto सहित इस सेगमेंट की कुछ बड़ी कंपनियों ने किराना स्टोर्स के जरिए उत्पादों को खरीदकर वितरित करने के मार्केटप्लेस मॉडल के साथ शुरुआत की थी। एवेंडस कैपिटल के प्रणय कहते हैं, "इससे खिलाड़ियों को यह समझने में मदद मिली कि ग्राहकों की संख्या कहां ज्यादा है, कौन से एसकेयू को जमा करना है और बाजार का क्या गुणागणित है।"


हालांकि, बेहतर पूर्वाअनुमानों ने इन कंपनियों को हाइपरलोकल फुलफिलमेंट सेंटर या डार्क स्टोर मॉडल पर स्विच करने के लिए प्रेरित किया है, जहां शहर में एक बड़ा गोदाम कई छोटे डार्क स्टोर्स को सेवा मुहैया कराता है और वे उस इलाके में सेवा मुहैया करते हैं।

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भारत में क्विक कॉमर्स ऐप्स की तुलना

नेटवर्क का निर्माण

कई फुलफिलमेंट केंद्रों का स्वामित्व, योजना बनाना और उनका संचालन करना एक भारी पूंजीगत खर्च वाला काम है और यह बहुत सारे कंपनियों के लिए विस्तार की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है, जबकि वे अधिक से अधिक शहरों पर अपनी सेवा के जरिए कब्जा करना चाहते हैं। 


क्विक कॉमर्स कंपनियां वेयरहाउसिंग, डार्क स्टोर्स और लास्ट-माइल डिलीवरी प्ले में क्षमताओं का निर्माण करने के लिए अनुभवी लॉजिस्टिक्स प्लेयर्स की तलाश कर रही हैं। साथ ही वे डार्क स्टोर्स के मालिक होने से लेकर स्थानीय किरानाओं के साथ साझेदारी भी कर रही हैं, जो ऑर्डर लेने और उन्हें डिलीवर करने के लिए एक कैप्टिव स्टोर के रूप में काम करेंगे। 


Holisol लॉजिस्टिक्स के को-फाउंडर और स्ट्रैटजी व बिजनेस डेवलपमेंट के डायरेक्टर राहुल डोगर ने योरस्टोरी को बताया, "इस सेगमेंट की कंपनियों ने अपना खुद का नेटवर्क बनाने वाले मॉडल के साथ शुरूआतक की, जिसके तहत उन्होंने मर्चेंट्स से साझेदारी की जो रियल एस्टेट लेकर आया। हालांकि, इन्वेंट्री को स्टोर करना एक जोखिम है और इसे पिक करने और डिलीवरी में समय लगता है। ऐसे में यह मॉडल अब कंपनी के मालिकाना हक वाले और थर्ड पार्टी द्वारा संचालित डार्क स्टोर के एक एक मिश्रण की ओर बढ़ रहा है।"


Holisol लॉजिस्टिक्स ने उसके साथ काम करने वाली क्विक कॉमर्स कंपनियों के लिए 100 से अधिक डार्क स्टोर्स का एक नेटवर्क बनाया है। कंपनी को एक ऑपरेशनल डार्क स्टोर स्थापित करने में एक सप्ताह का समय लगता है, जबकि कॉमर्स कंपनियों को ऐसा करने में तीन से चार सप्ताह का समय लिया जाता है।


इस मॉडल को देखते हुए प्राइवेट इक्विटी के निवेश वाले एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशंस प्रोवाइडर्स ईकॉम एक्सप्रेस (Ecom Express) भी बिजनेस में उतरी है। कंपनी इस सेगमेंट की सेवा के लिए शहर स्तर के बड़े गोदामों के साथ-साथ छोटे, हाइपरलोकल गोदामों की स्थापना कर रही है।


ईकॉम एक्सप्रेस में फुलफिलमेंट सेवाओं के वाइस-प्रेसिडेंट और हेड एस लक्ष्मणन कहते हैं, "क्विक कॉमर्स कंपनियों को नए शहरों को तेजी से अपनी सेवाएं लॉन्च करने में थर्ड-पार्टी प्लेयर्स मदद करते हैं। इस सेक्टर में संभावनाएं अपार हैं क्योंकि ऑनलाइन कंपनियां बाजार का केवल एक प्रतिशत ही सेवा प्रदान करती हैं।" 

दूसरे सेक्टर्स में भी फैलना

अपनी सुविधा पर उत्पादों की मिनटों में उपलब्धि का पहलू अब अन्य सेक्टर्स में भी फैल रहा है। इसमें ईकॉमर्स से लेकर डायरेक्टर-टू-कंज्यूमप और FMCG ब्रांड्स तक शामिल हैं।


जोमैटो, लाइटरॉक और टेमासेक, ईकॉमर्स इनेबलमेंट कंपनी शिपरॉकेट जैसी कंपनियां नई राउंड में मिले पूंजी के साथ अपने वेयरहाउस के नेटवर्क को बढ़ाने की योजना बना रही है, जिससे पार्टनर ब्रांडों के लिए उसी दिन डिलीवरी का लक्ष्य रखा जा सके।


शिपरॉकेट के सीईओ और को-फाउंडर साहिल गोयल, योरस्टोरी को बताते हैं, “हमारी मुख्य कैटेगेरी ब्यूटी, पर्सनल केयर, होम इंटीरियर, इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन, जूते, पोशाक आभूषण और अन्य हैं। जब आप सेगमेंट में ब्रांडों के लिए तीन से छह घंटे की डिलीवरी का वादा करते हैं, तो ग्राहकों द्वारा इसे ऑर्डर करने की संभावना काफी बढ़ जाती है।” 


वह कहते हैं कि ग्रॉसरी सामानों की एक दिन में डिलवरी से ग्राहकों की उम्मीदें दूसरे कैटेगरी के उत्पादों के लिए भी उसी तरह बढ़ गई है। शिपरॉकेट अपने मास्टर वेयरहाउस या शहर स्तर के वेयरहाउस के नेटवर्क को बढ़ा रहा है ताकि तेजी से डिलीवरी के लिए पार्टनर ब्रांडों के चुनिंदा एसकेयू को स्टोर किया जा सके और वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही से ब्रांडों के लिए हाइपरलोकल फुलफिलमेंट सेंटर्स का संचालन कर रहा है। 


बिजनेस-टू-बिजनेस लास्ट माइल डिलीवरी कंपनी शैडोफैक्स (Shadowfax) के को-फाउंडर और सीईओ अभिषेक बंसल का कहना है कि कंपनी ने फूड और ग्रॉसरी सेगमेंट में करीब 60 फीसदी ऑर्डर प्रोसेस किए, जबकि बाकी 40 फीसदी ऑर्डर ईकॉमर्स से आए। शैडोफैक्स ने पिछले 18 महीनों में लेस-दैन-ट्रकलोड (LTL) डिलीवरी, बड़े बॉक्स वेयरहाउसिंग और क्लाउड किचन सेवाओं सहित व्यवसाय की अन्य लाइनों को बंद करने के बाद लास्ट-माइल डिलीवरी पर अपना ध्यान केंद्रित किया है ।


अभिषेक कहते हैं, “हमारा ध्यान अब 30 मिनट की डिलीवरी सेगमेंट में सर्विस मुहैया कराने पर है क्योंकि यह आने वाले समय में बहुत तेजी बढ़ने वाला है और किराना और फार्मा सेगमेंट में एक दिन में डिलीवरी से इसकी मांग में और उछाल आया है। हम डिलीवरी पार्टनर्स को अपने ग्राहकों के रूप में देख रहे हैं और हमारी रणनीति उन्हें काम के लिए एक ऐप प्रदान करने की है।”

सच्चाई का पल

क्विक कॉमर्स सेगमेंट पर लॉजिस्टिक्स और ऑनलाइन ग्रॉसरी प्लेयर्स का बोलबाला रहने वाला है, लेकिन डिलीवरी उम्मीदें 30 मिनट या उससे भी कम समय में सेटल होने की संभावना है। इंडस्ट्री के खिलाड़ियों का मानना है कि 10 मिनट के मॉडल में समय के साथ युक्तिसंगत होना होगा।


एवेंडस कैपिटल के प्रणय ने कहा, “30 मिनट में जो कुछ भी डिलीवर किया जा सकता है, वह लॉजिस्टिक्स प्लेयर्स के पास चला जाएगा और वे ऑर्डर डिलीवर करने के लिए तैयार होंगे। उनमें से कुछ ऐप के भीतर माइक्रो-ऐप्स बनाने पर भी विचार करेंगे, जहां ब्रांड सीधे उपभोक्ता को बेच सकते हैं।” 


क्विक कॉमर्स स्पेस में फंडिंग में उछाल के साथ, आने वाले वर्ष में लॉजिस्टिक्स प्लेयर्स और उससे जुड़ी दूसरी कंपनियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।


Edited by Ranjana Tripathi