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मणिपुर में अल्पसंख्यक समुदाय के पहले आईएएस ऑफिसर बने असकर अली

मणिपुर में अल्पसंख्यक समुदाय के पहले आईएएस ऑफिसर बने असकर अली

Friday September 28, 2018 , 3 min Read

पांच भाई बहनों में दूसरे नंबर वाले असकर का परिवार खेती करता है। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से भौतिक विज्ञान में ग्रैजुएशन किया और उसके बाद सिविल सेवा की तैयारी करने के लिए कोचिंग करने लगे।

असकर अली

असकर अली


असकर का कहना है कि सिविल सेवा जैसी परीक्षा में जितनी ज्यादा विविधता होगी उतना ही बेहतर होगा। तभी हम एक समेकित राष्ट्र की परिकल्पना कर पाएंगे। 2016 बैच के इस आईएएस अफसर को सेवा करने का बेसब्री से इंतजार है।

एस असकर अली मणिपुर के मेइती-पंगल समुदाय से आने वाले पहले आईएएस अधिकारी हैं। यह समुदाय मणिपुर में काफी पिछड़ा हुआ माना जाता है और इस समुदाय का इतिहास लगभग 400 वर्ष पुराना है। पांच भाई बहनों में दूसरे नंबर वाले असकर का परिवार खेती करता है। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से भौतिक विज्ञान में ग्रैजुएशन किया और उसके बाद सिविल सेवा की तैयारी करने के लिए कोचिंग करने लगे। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और यूपीएससी के 2015 के एग्जाम में उन्होंने सफलता हासिल की। उन्हें 167वीं रैंक मिली थी।

एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि आर्थिक मुश्किलों से गुजरते हुए उन्हें पढ़ाई करनी पड़ी। असकर कहते हैं, 'स्कूल के दौरान मेरे घर वाले खेती करते थे ताकि मैं आराम से पढ़ सकूं। उन्होंने मेरी पढ़ाई के लिए काफी मेहनत की और साथ ही मेरे अंदर भी कठिन परिश्रम का जज्बा भरा।' असकर के मुताबिक, 'अपने समुदाय में मैं सीधे तौर पर नियुक्त होने वाला पहला आईएएस अफसर हूं। इस बात का मुझे हमेशा गर्व रहेगा। मैं यब भी मानता हूं कि यह एक छोटी सफलता है लेकिन इससे समुदाय और इलाके के कई और युवाओं को प्रेरणा मिलेगी।'

वह आगे कहते हैं, 'मैं जिस मेइती पंगल समुदाय से ताल्लुक रखता हूं उसकी आबादी राज्य का 8 फीसदी हिस्सा है। लेकिन अगर आप उच्च संस्थानों में देखेंगे तो हमारी संख्या नगण्य है।' इसकी बड़ी वजह बताते हुए असकर कहते हैं कि समुदाय में शिक्षा को लेकर बहुत ज्यादा जागरूकता नहीं है। हालांकि वह यह भी कहते हैं कि आप किसी भी समुदाय या इलाके से आते हैं, एक आईएएस के तौर पर सबसे पहले आप भारतीय हैं और देश की सेवा करना आपका पहला मकसद होना चाहिए।

वह अपनी ट्रेनिंग अकैडमी LBSNAA और अपने साथियों को धन्यवाद देते हुए कहते हैं, 'अब मेरा दायरा धर्म, राज्य, क्षेत्र और पृष्ठभूमि से काफी बढ़ चुका है।' असकर का कहना है कि सिविल सेवा जैसी परीक्षा में जितनी ज्यादा विविधता होगी उतना ही बेहतर होगा। तभी हम एक समेकित राष्ट्र की परिकल्पना कर पाएंगे। 2016 बैच के इस आईएएस अफसर को सेवा करने का बेसब्री से इंतजार है।

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