जीएसटी से बाजार बेचैन, क्या होगा सस्ता, क्या महंगा!

By जय प्रकाश जय
June 14, 2017, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:16:30 GMT+0000
जीएसटी से बाजार बेचैन, क्या होगा सस्ता, क्या महंगा!
यहां जानें कि जीएसटी के आने के बाद भारतीय बाज़ार में क्या होने जा रहा है महंगा और क्या सस्ता...
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पूरे देश में पहली जुलाई 2017 से लागू होने वाले जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) को लेकर विश्वास जताया जा रहा है कि महंगाई की मार से त्रस्त जनता की मुश्किलें कम होंगी... टैक्स के भारी जाल से मुक्ति मिलेगी... ऐसे में उद्योग जगत ने भी वस्तु एवं सेवा कर परिषद के फैसले का स्वागत किया है, तो आइए, जानते हैं कि अगले माह से क्या सस्ता, क्या महंगा होने जा रहा है।

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भारतीय अर्थव्यवस्था के जानकारों का कहना है, कि जीएसटी लागू होने से बाजार की दुनिया हमेशा-हमेशा के लिए बदल जाएगी, जिसकी वजह से रोजमर्रा के जीवन में काफी बड़ा बदलाव आ सकता है।

पूरे देश में पहली जुलाई 2017 से एक समान कर व्यवस्था यानी जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स, वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने के बाद विश्वास जताया जा रहा है कि महंगाई की मार से दोहरी हो रही जनता की मुश्किलें आसान हो जाएंगी, क्योंकि टैक्स के भारी जाल से मुक्ति मिल जाएगी। जीएसटी आने के बाद बहुत सी चीजें सस्ती हो जाएंगी, जबकि कई चीजें जेब पर भारी भी पड़ेंगी। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि टैक्स का पूरा सिस्टम आसान हो जाएगा। भारतीय अर्थव्यवस्था के जानकारों का कहना है कि जीएसटी लागू होने से बाजार की दुनिया हमेशा के लिए बदल जाएगी और रोजमर्रा के जीवन में बड़ा बदलाव आ सकता है।

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इस बीच केंद्रीय राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा है, कि 'जीएसटी कानून के तहत बैंकों को हर राज्य में अलग-अलग पंजीकरण कराना होगा। उनके पास दूसरा विकल्प नहीं है। हम इसमें होने वाली परेशानियों को कम करने की कोशिश करेंगे।'

"जीएसटी लागू होने से कुछ सप्ताह पहले सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कई वस्तुओं के टैक्स स्लैब घटा दिए हैं, जिन्हें पहले अपेक्षाकृत ज्यादा रखा गया था। दरअसल, विभिन्न उद्योगों की मांग पर जीएसटी पर केंद्र तथा राज्यों के अधिकार प्राप्त मंच ने 66 तरह की वस्तुओं पर पहले निर्धारित टैक्स की दरों में संशोधन कर उन्हें कम रखने का फैसला लिया है। जीएसटी में चार स्तर की, 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत की दरें निर्धारित की गई हैं। उद्योग जगत ने जीएसटी परिषद के इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि यह खास तौर से, एसएमई सेक्टर यानी सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यमों के लिए फायदेमंद है।"

एक फौरी प्रभाव यह देखा जा रहा है, कि जीएसटी लागू होने से पहले दवा का मौजूदा स्टॉक खपाने की हड़बड़ी दिखा रहे स्टॉकिस्टों के पास भंडार काफी कम हो गया है। उनके पास कुछ ही दिनों के लिए जरूरी दवाएं बची हैं। इससे डर है कि पहली जुलाई को जीएसटी लागू होने के बाद देश में दवाओं की किल्लत हो सकती है। दवा कारोबारियों को चिंता है, कि उनके मार्जिन पर इसका फर्क पड़ेगा और इसी वजह से स्टॉकिस्ट कम दवाएं उठा रहे हैं।

उधर, खुदरा कारोबारियों के शीर्ष संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने कहा है, कि इसको लेकर व्यापारियों की तैयरियाँ अब भी काफ़ी कम हैं, जो एक बड़ी चुनौती है। जीएसटी टेक्नोलॉजी पर आधारित कर प्रणाली है, जिसमें किसी भी प्रकार की कोई कागजी कार्यवाही नहीं होगी। जीएसटी के अनेक प्रावधान हैं,जिसमें खास तौर पर जीएसटी के सिद्धांत, बिल, इनपुट क्रेडिट, हर व्यापारी की रेंटिंग, माल के साथ सेवाओं का मिलान आदि बिलकुल नए विषय हैं, जो वर्तमान कर प्रणाली से एकदम अलग हैं। चिंता की बात यह है, कि लगभग 60 प्रतिशत व्यापारियों ने अभी तक अपने व्यापार में कम्प्यूटर का इस्तेमाल शुरू नहीं किया है।

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जीएसटी को लेकर आम जनमानस में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह हलचल मचाए हुए है कि जनजीवन पर इसका क्या फर्क पड़ेगा? क्या महंगा, क्या सस्ता होगा? आइए, एक नजर उन वस्तुओं पर डालते हैं, जिनके सस्ता-महंगा होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं-

जीएसटी काउंसिल ने अनाजों को जीएसटी के दायरे से रखा है, यानी इन पर कोई कर नहीं लगेगा। मीट, दूध, दही, ताज़ा सब्जियां, शहद, गुण, प्रसाद, कुमकुम, बिंदी और पापड़ को जीएसटी दायरे से बाहर रखा गया है। इसके कारण ये चीजें सस्ती होंगी। देश के ज्यादातर हिस्सों में सोना महंगा हो सकता है। सोना और सोने के आभूषणों पर तीन फीसदी टैक्स लगने जा रहा है। सभी तरह के कपड़ों पर पांच फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा, जबकि सौ रुपये तक के परिधानों पर 5 फीसदी की निम्न दर से जीएसटी लागू होगा। 

पहले पांच सौ के जूते पर करीब 48 रुपये टैक्स लगता था, अब 25 रुपए टैक्स देना होगा। बिस्किट पर जीएसटी स्लैब 18 फीसदी तय किया गया है। चीनी, खाद्य तेल, नार्मल टी और कॉफी पर जीएसटी के अंतर्गत 5 फीसद की दर से टैक्स लगेगा। मौजूदा समय में यह 4 से 6 फीसद है।

जीएसटी आने के बाद कोयला सस्ता हो जाएगा। इससे बिजली उत्पादन की लागत भी कम होगी। प्रोसेस्ड फूड, कनफेक्शनरी उत्पाद और आइसक्रीम पर टैक्स की दर 18 फीसदी होगी, जो पहले 22 फीसदी थी। सौ रूपए की आइसक्रीम पर 22 रु टैक्स देना होता था, अब 18 रुपए देना होगा। बाल धोने के शैंपू, परफ्यूम और मेकअप के उत्पादों पर 28 फीसदी टैक्स देना होगा, जो 22 फीसदी लगता है।

मोटरसाइकिलें भी कुछ सस्ती हो सकती हैं। इन पर टैक्स दर करीब एक फीसदी कम होकर 28 फीसदी रह जाएगी। इकोनॉमी क्लास में विमान यात्रा सस्ती, बिजनेस श्रेणी में महंगी होगी। स्मार्टफोन जीएसटी में सस्ता हो जाएगा। उबर और ओला से टैक्सी बुकिंग सस्ती हो जाएगी। टेलिकॉम सेवाएं महंगी होंगी। बीमा पॉलिसी लेना महंगा हो जाएगा। इस पर टैक्स 15 फीसदी से बढ़कर 18 फीसदी होने जा रहा है। रेस्तरां में खाना महंगा हो जाएगा। जीएसटी में इसे चार हिस्सों में बांटा गया है। नॉन-एसी रेस्तरां, शराब लाइसेंस और एसी वाले रेस्तरां, लग्जरी रेस्तरां

जीएसटी से छोटी कारों की लागत बढ़ेगी और इसका बोझ ग्राहकों को उठाना पड़ेगा। ट्रेन में जनरल डिब्बे, स्लीपर और जनरल बस में यात्रा करने पर अब भी कोई सर्विस टैक्स नहीं लगेगा। टूर एंड ट्रैवल थोड़ा महंगा हो जाएगा। आरामदेह बेड के सामान सस्ते हो जाएंगे। ज्यादातर राज्यों में मोबाइल हैंडसेट पर टैक्स 4 से 5 फीसदी तक बढ़ जाएगा।

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