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इन चार बच्चों ने सरकारी स्कूल की मरम्मत करवाने के लिए अपनी पॉकेट मनी से दिए डेढ़ लाख रुपये

इन चार बच्चों ने सरकारी स्कूल की मरम्मत करवाने के लिए अपनी पॉकेट मनी से दिए डेढ़ लाख रुपये

Friday January 05, 2018 , 3 min Read

निधि शंकर रेड्डी, नेहा रेड्डी, ध्रुव रेड्डी और दीक्षिता रेड्डी ने अपनी पॉकेट मनी से बचाए गए 1.50 लाख रुपयों को शहर के कल्याण नगर इलाके में एक सरकारी स्कूल की मरम्मत करने के लिए दान दे दिया।

स्कूल के बच्चों के साथ निधि

स्कूल के बच्चों के साथ निधि


बच्चों की बदौलत ही आज वो स्कूल चमकने लगा है और वहां टॉयलट की सुविधा मुहैया करवा दी गई है। क्लासरूम की दीवारें और बेंच पर भी रंगरोगन कर दिया गया है।

देश में पिछड़ेपन की वजह गिनाने और दोष देने को कह दिया जाए तो कोई पीछे नहीं रहेगा लेकिन हममें से कितने लोग ऐसे होते हैं जो वाकई अपनी तरफ से समाज के लिए कुछ करते हैं। कुछ ही लोग ऐसे होते हैं जिन्हें खुद से ज्यादा दूसरों की परवाह होती है। बेंगलुरु के 4 बच्चों को हम उन लोगों में गिन सकते हैं जिन्हें समाज की भलाई के लिए काम करना अच्छा लगता है। इन चार बच्चों निधि शंकर रेड्डी, नेहा रेड्डी, ध्रुव रेड्डी और दीक्षिता रेड्डी ने अपनी पॉकेट मनी से बचाए गए 1.50 लाख रुपयों को शहर के कल्याण नगर इलाके में एक सरकारी स्कूल की मरम्मत करने के लिए दान दे दिया।

दीक्षा चौथी कक्षा में पढ़ती है, ध्रुव 8वीं में है, नेहा 12वीं में है तो वहीं निधि प्री यूनिवर्सिटी स्टूडेंट हैं। इन बच्चों ने सरकारी स्कूल में टॉयलेट बनवाने और उसकी मरम्मत करने के लिए पैसे दिए थे। इनके दिए पैसों की बदौलत स्कूल में अच्छा सा टॉयलट बन गया है। इतना ही नहीं स्कूल की दीवारों और बेंच पर पेंट भी करवा दिया गया है। दरअसल निधि के घर में काम करने के लिए आने वाली बाई के बच्चे के जरिए स्कूल की खराब हालत के बारे में पता चला था। निधि ने उससे उसके स्कूल के बारे में जब पूछा तो वह आश्चर्य चकित रह गईं कि स्कूल में टॉयलट की भी अच्छी सुविधा नहीं है।

निधि ने इसके बाद स्कूल को बदलने के बारे में सोचा। उसने अपने दोस्तों और भाई बहनों को भी ये बात बताई। इसके बाद सबने अपनी-अपनी पॉकेट मनी बचानी शुरू की। निधि ने बताया, 'हम सब काफी अच्छे स्कूलों में पढ़ते हैं और हमें वहां किसी भी तरह की कमी नहीं महसूस होती है। लेकिन गरीब बच्चे जिन स्कूलों में पढ़ने जाते हैं वहां बुनियादी जरूरतें ही गायब रहती हैं। इसीलिए हमने अपनी पॉकेट मनी को इकट्ठा करना शुरू किया जिससे कि स्कूल में अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।'

हालांकि निधि को भी इसके बारे में पता नहीं चलता, अगर उसके घर में आनी वाली मेड अपने बच्चे के बारे में न बताती। निधि ने उसके बाद से ही अपने भाई-बहनों को इकट्ठा किया और पैसे जोड़ने की योजना बनाई। इन बच्चों की बदौलत ही आज वो स्कूल चमकने लगा है और वहां टॉयलट की सुविधा मुहैया करवा दी गई है। क्लासरूम की दीवारें और बेंच पर भी रंगरोगन कर दिया गया है। इसी तरह हाल ही में गुड़गांव में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले तुषार मल्होत्रा ने भी एक सरकारी स्कूल को गोद लिया था। वे वहां के बच्चों के लिए किताबें उपलब्ध करवाना चाहते थे।

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