बहन की शहादत के बाद नौकरी छोड़ समाज के लिए समर्पित किया शरद कुमरे ने अपना जीवन

12th Dec 2015
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2001 में शरद कुमरे की बहन बिंदू कुमरे आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुईं थी...

बहन की मृत्यु के बाद उन्होंने प्रण लिया कि वे अपनी पूरी जिंदगी देश सेवा में लगाएंगे...

शरद ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी...

कई गांवों को गोद लेकर शरद ने वहां पर वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाया...

400 से अधिक रक्तदान शिविर भी लगावा चुके हैं शरद...


देश प्रेम और समाज कल्याण की भावना कई लोगों के खून में होती है, वे सब कुछ छोड़कर देश सेवा को ही अपनी जिंदगी का लक्ष्य बना लेते हैं और अपने हर काम को निस्वार्थ भावना से करने का प्रयत्न करते हैं। शरद कुमरे एक ऐसे ही व्यक्ति हैं जिनके खून में देशभक्ति है जिन्होंने एक अच्छी सरकारी नौकरी छोड़कर अपनी जिंदगी को समाज कल्याण में लगा दिया और देश के उत्थान की दिशा में प्रयासरत हैं।

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शरद कुमरे की बहन शहीद बिंदू कुमरे 2001 में कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गईं थी मृत्यु से पहले उन्होंने 4 आतंकवादियों को मारा गिराया था । इस घटना के बाद शरद ने प्रण लिया कि वे अब अपनी जिंदगी देश के नाम करेंगे और देश के उत्थान के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। शरद मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं उन्होने पढ़ाई लिखाई और नौकरी सब यहीं की। वे सरकारी नौकरी में काफी अच्छे पद पर कार्यरत थे लेकिन उन्होंने सोचा कि नौकरी के साथ वे देश और समाज के लिए बहुत कुछ नहीं कर पाएंगे इसलिए उन्होंने एक अच्छी नौकरी छोड़कर ‘ पराक्रम जनसेवी संस्थान ’ की नीव रखी। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने भष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाई, इस कड़ी में उन्होंने कई आरटीआई दायर की और कई भष्ट्र अधिकारियों को जेल भिजवाया। इस दौरान शरद को काफी परेशान भी किया गया। वे जिनके खिलाफ लड़ रहे थे उन लोगों की राजनीतिक पहुंच थी लेकिन शरद किसी से नहीं डरे और अपने काम में लगे रहे।

भ्रष्टाचार के अलावा उन्होंने पर्यावरण के लिए भी काम शुरू किया शरद ने कई गांवों (जावरकाठी, नकाटोला, आमाटोला गांव जिला सिवनी, डोंडियाघाट जिला होशंगाबाद मध्यप्रदेश) को गोद लिया और वहां पर जमीनी स्तर पर काम शुरू किया। इन गांवों में उन्होंने 1 लाख से ज्यादा पौधे लगवाए। शरद के बेहतरीन कार्यों के लिए उन्हें ‘ ग्रीन आईडल अवॉर्ड ’ से भी सम्मानित किया गया।

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शरद का एक पेट्रोल पंप है जो पूरी तरह सौर उर्जा पर आधारित है ये एक ईको फ्रेंडली पेट्रोल पंप है यहां नारियल के, केले के पेड़ हैं साथ ही यहां कई तरह की सब्जियां भी उगाई गई हैं, बच्चों के लिए झूले लगाए गए हैं। इस पंप को पिछले 2 वर्षों से लगातार ग्रीन अवॉर्ड मिल रहा है। इसके अलावा वे विभन्न स्कूल कॉलेजों में पौधों को गिफ्ट करते हैं वे कहते हैं कि वे कहीं भी जाते हैं तो लोगों को फूलों की माला या फूल गिफ्ट करने से अच्छा वे उन्हें पौधे गिफ्ट कर देते हैं।

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शरद बताते हैं कि भारत में बहुत प्रतिभा है लेकिन खराब राजनीति ने भारत को बहुत नुकसान पहुंचाया है, राजनीति के कारण ही देश में दंगे होते हैं। हमेशा साथ-साथ रहने वाले लोग चंद खराब लोगों की बातों में आकर एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं और एक दूसरे का खून बहाने लगते हैं। शरद को ये बाते बहुत पीड़ा देती हैं वे लोगों को समझाते हैं कि ऐसे लोगों की बातों में न आएं व भाईचारे से रहें। वे सब धर्म जातियों से एक दूसरे की मदद करने की अपील करते हैं और रक्तदान को महादान मानते हैं शरद कहते हैं कि सबका खून एक जैसा है इंसानों ने जातियां बनाई जबकि ईश्वर ने हमें एक जैसा बनाया है। वे खुद 70 से ज्यादा बार रक्त दान कर चुके हैं और सन 1993 से लगातार रक्त दान शिविर लगा रहे हैं। अब तक शरद 400 से ज्यादा ब्लड डोनेशन कैंप ऑर्गनाइज कर चुके हैं वे मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में ये काम करते हैं।

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शरद बताते हैं कि आम लोगों का इस काम में उन्हें पूरा सहयोग मिलता है और लोग भी बड़ चढ़कर रक्तदान शिवरों में आते हैं और रक्तदान करते हैं। इस काम के लिए वे विभिन्न अस्पतालों से संपर्क करते हैं जहां पर वे इक्ट्ठा हुए बल्ड को भेजते हैं।

शरद ने योरस्टोरी को बताया- 

"बच्चे हमारा भविष्य हैं लेकिन आज कल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम बच्चों को नैतिक मूल्यों की शिक्षा नहीं दे पाते जो सही नहीं है बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की शिक्षा देना भी बेहद जरूरी है उनके अंदर संस्कारों का अभाव नहीं होना चाहिए, एक दूसरे के प्रति मदद का भाव होना चाहिए व देश प्रेम की भावना उनके अंदर होनी चाहिए किताबी ज्ञान के अलावा उन्हें पता होना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत।" 

इसी कड़ी में बच्चों को प्रोत्साहित, आत्मनिर्भर और उनके अंदर नैतिक मूल्यों को बढ़ाने के लिए शरद ने ‘आकाश टीम’ की नीव रखी । इस टीम के माध्यम से वे बच्चों को रचनात्मक काम करवाते हैं बच्चों को देश और समाज के प्रति जागरूक किया जाता है बच्चों से पेड़ लगवाये जाते हैं, रक्तदान कैंपों में मदद ली जाती है, साथ ही बच्चों के लिए विभिन्न खेल भी आयोजित किये जाते हैं।

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शरद बताते हैं कि जनसेवा करना अब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है और उनको इस काम में आनंद आता है। उनकी पत्नी डॉ. लक्ष्मी कुमरे इन कार्यों में हमेशा उनका पूरा साथ देती हैं और हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहती हैं। शरद भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखते हैं और भारत को दुनिया के सबसे अग्रणी देशों की कतार में देखना चाहते हैं।

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