ब्रिक्स देश : भ्रष्टाचार और कालेधन से निपटना हमारी प्राथमिकता

By PTI Bhasha
October 17, 2016, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:17:15 GMT+0000
ब्रिक्स देश : भ्रष्टाचार और कालेधन से निपटना हमारी प्राथमिकता
ब्रिक्स नेताओं के दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के बाद जारी ब्रिक्स के गोवा घोषणा-पत्र में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए आपस में सहयोग का पूरा प्रयास करने का संकल्प किया गया है।
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भ्रष्टाचार और कालेधन से निपटने के लिये एक मजबूत संकल्प चाहते हैं ब्रिक्स देश, इसीलिए ब्रिक्स देशों ने भ्रष्टाचार से निपटने और विदेशों में जमा कालाधन को संबंधित को वापस किए जाने पर विश्व-बिरादरी की ओर मजबूत प्रतिबद्धता की जरूरत पर बल दिया है। ब्रिक्स ने यह भी कहा है कि कंपनियों की कर से बचने की अतिवादी योजनाओं से देशों के लिए समान विकास और आर्थिक वृद्धि को प्रभावित करते हैं।

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ब्रिक्स नेताओं के दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के बाद जारी ब्रिक्स के गोवा घोषणा-पत्र में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए आपस में सहयोग का पूरा प्रयास करने का संकल्प किया गया है। इसमें कहा गया है, ‘‘हम अपने रूख में तालमेल के लिये प्रयास करेंगे और भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संधि तथा अन्य प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय कानूनी उपायों के आधार पर भ्रष्टाचार रोकने तथा उसके खिलाफ मुहिम में मजबूत वैश्विक प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करेंगे।’’ ब्रिक्स समूह (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) का मानना है कि भ्रष्टाचार एक वैश्विक चुनौती है आर्थिक वृद्धि तथा भरोसेमंद विकास को प्रभावित कर सकता है। इसमें अवैध धन और वित्तीय प्रवाह तथा विदेशों में छुपायी गयी अवैध कमाई भी शामिल है। घोषणा-पत्र में कहा गया है कि वे भ्रष्टाचार तथा संपत्ति की बरामदगी और भ्रष्टाचार के मामले वांछित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के लिए ब्रिक्स भ्रष्टाचार निरोधक कार्य समूह समेत विभिन्न मंचों के जरिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का समर्थन करते हैं।

ब्रिक्स ने वैश्विक रूप से निष्पक्ष और आधुनिक कर प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमत मानदंडों के प्रभावी और व्यापक क्रियान्वयन के मामले में हुई प्रगति का स्वागत किया।

ब्रिक्स ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों की आक्रामक कर योजनाओं के कारण देशों के कराधार के क्षरण और लाभ के स्थानांतरण (बीईपीएस) की समस्या से निपटने की परियोजना के क्रियान्वयन का समर्थन किया है। ब्रिक्स विकासशील देशों में कर प्रशासन क्षमता के निर्माण में मदद के लिए देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को प्रोत्साहित करेंगे। गोवा घोषणा-पत्र में कहा गया है कि कराधार का क्षरण और लाभ का स्थानांतरण की समस्या को कारगर तरीके से निपटाया जाना चाहिए। संयुक्त बयान में रेखांकित किया गया है कि कंपनियों की कर कानूनों से बचने की आक्रमक चाल समान विकास एवं आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं को प्रभावित करती है। बयान के अनुसार लाभ पर कर उसी देश में वसूला जाना चाहिए जहां पर कारोबार से लाभ सृजित हुआ हो।

गोवा में एकत्रित ब्रिक्स नेताओं ने कर सूचनाओं के स्वत: आदान प्रदान के लिये साझा रिपोर्टिंग मानक समेत इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को समर्थन देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है।

साथ ही ब्रिक्स ने मजबूत कोटा आधारित, संसाधन संपन्न आईएमएफ की भी वकालत की है। भारत समेत दुनिया में आर्थिक रूप से तेजी से उभरते पांच प्रमुख देशों के समूह ब्रिक्स ने अंतराष्ट्रीय मुद्राकोष को मजबूत बनाने , इसकी कोटा व्यवस्था में सुधार और इसे पर्याप्त रूप से संसाधन सम्पन्न बनाए जाने की अपील की है, ताकि इसके जरिए विकासशील देशों की ढांचा गत विकास के लिए धन की कमी को पूरा किया जा सके तथा वृद्धि को गति दी जा सके। गोवा में दो दिन चले आठवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद आज जारी संयुक्त घोषणापत्र में कहा गया है, ‘‘हम अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) को मजबूत, कोटा आधारित और पर्याप्त रूप से संसाधन संपन्न बनाए जाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि करते हैं। आईएमएफ को संसाधन के लिए कर्ज का सहारा एक अस्थायी उपाय होना चाहिए।’’ दीर्घकालीन टिकाऊ वृद्धि सुनिश्चित करने के लिये संपर्क सुविधाओं समेत समेत विविध प्रकार के बुनियादी ढांचों में सार्वजनिक-निजी निवेश के महत्व को रेखांकित करते हुए पांच देशों के समूह के नेताओं ने कहा कि इस काम में धन की कमी को बहुपक्षीय विकास बैंकों की भूमिका के विस्तार के साथ पूरा किया जाना चाहिए।
ब्राजील, रूस, भारत, चीन तथा दक्षिण अफ्रीका के नेताओं ने निर्धारित समयसीमा के भीतर नया कोटा फार्मूले को अंतिम रूप देने को सुनिश्चित करने के लिये उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समन्वित प्रयास का समर्थन करने को लेकर मजबूत प्रतिबद्धता जतायी है।

उन्होंने कहा कि इससे इस संगठन में कम विकसित देशों, गरीब देशों तथा क्षेत्रों के हितों की रक्षा के साथ गतिशील उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का विश्व अर्थव्यवस्था में सापेक्षिक योगदान के साथ उनकी आवाज अधिक मजबूती के साथ प्रतिध्वनित हो सकेगी। ब्रिक्स देशों ने चीनी मुद्रा यूआन को एक अक्तूबर 2016 से विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) के लिए मान्य मुद्राओं की सूची में शामिल किए जाने का स्वागत किया। उन्होंने विकसित यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं से आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड में दो पद छोड़ने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने का आह्वान किया।

साथ ही ब्रिक्स देशों ने कहा, है कि ‘‘अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष में सुधार से उप-सहारा अफ्रीका समेत आईएमएफ के गरीब सदस्यों की आवाज तथा प्रतिनिधित्व मजबूत होना चाहिए।’’ सरकारी ऋृण पुनर्गठन की चुनौतियों के संदर्भ में चिंताओं को साझा करते हुए ब्रिक्स ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करने और इस प्रकार उच्च कर्ज वाले देशों के लिये आर्थिक वृद्धि के लिये समय पर और सफलतापूर्वक ऋृण पुनर्गठन की सुविधा महत्वपूर्ण है। उन्होंने ऋृण पुनर्गठन प्रक्रिया में सुधार और संशोधित सामूहिक कार्रवाई के उपंबंध (सीसीए) पर मौजूदा विचार-विमर्श का स्वागत किया।

घोषणापत्र में कहा गया है कि हम विकास के महत्वपूर्ण एजेंडे के साथ बहुपद्वक्षीय व्यापार प्रणाली और नियम आधारित, खुला, पारदर्शी, बिना भेदभाव वाला तथा समावेशी बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के रूप डब्ल्यूटीओ के लिये अपने समर्थन को दोहराते हैं।

द्विपक्षीय, क्षेत्रीय तथा विभिन्न देशों के बीच व्यापार समझौतों की बढ़ती संख्या को रेखांकित करते हुए ब्रिक्स देशों ने कहा कि ये सब बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के पूरक होने चाहिए। बाली और नैरोबी में मंत्रीस्तरीय सम्मेलनों में किये गये फैसलों को क्रियान्वयन के महत्व पर जोर देते हुए ब्रिक्स देशों ने दोहा विकास एजेंडा के बचे मुद्दों पर प्राथमिकता के आधार पर बातचीत को आगे बढ़ाने पर बल दिया।

घोषणापत्र में कहा गया है, ‘‘हम डब्ल्यूटीओ सदस्यों से साथ मिलकर काम करने का आह्वान करते हैं ताकि अगली मंत्रीस्तरीय बैठक (एमसी 11) और उसके बाद के लिये मजबूत विकास उन्मुख परिणाम सुनिश्चित हो सके।’’

इन्हीं सबके बीच ब्रिक्स देश अपनी अलग स्वतंत्र क्रेडिट रेटिंग एजेंसी प्रयोजित करने पर भी सहमत हो चुके हैं। पांच देशों का समूह ब्रिक्स ने बाजार उन्मुख सिद्धांतों पर आधारित एक स्वतंत्र साख एजेंसी स्थापित करने पर आज सहमति जतायी। उसने कहा कि इससे वैश्विक स्तर पर कामकाज का ढांचा मजबूत होगा।

आठवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद संयुक्त बयान में कहा गया है, ‘‘हम वैश्विक स्तर पर कामकाज के ढांचे को और मजबूत करने के लिये विशेषज्ञों द्वारा बाजार उन्मुख सिद्धांतों पर आधारित एक स्वतंत्र ब्रिक्स रेटिंग एजेंसी स्थापित करने की संभावना टटोलने का स्वागत करते हैं।’’ बयान के अनुसार, ‘‘हमारा मानना है कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में बदलाव हमारे साझा विचार के लिहाज से ब्रिक्स संस्था का निर्माण महत्वपूर्ण है जो निष्पक्षता और समानता के सिद्धांतों पर आधारित है।’’ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बयान में कहा, ‘‘वैश्विक वित्तीय ढांचे में अंतर को और पाटने के लिये हम ब्रिक्स रेटिंग एजेंसी स्थापित करने में तेजी लाने में सहमत हुए हैं।’’ ब्रिक्स सदस्य देश अपने वित्त पोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिये पहले ही नव विकास बैंक स्थापित कर चुके हैं। यह बैंक पिछले साल परिचालन में आया। इससे पहले ब्रिक्स समूह द्वारा नई रेटिंग एजेंसी गठित करने की वकालत करते हुए नव विकास बैंक के अध्यक्ष के वी कामत ने तीन बड़ी वैश्विक रेटिंग एजेंसियों फिच, मूडीज और स्टैंडर्ड एंड पूअर्स के रेटिंग तय करने के तौर-तरीकों को लेकर चिंता जतायी और कहा कि उनके नियम उभरते देशों में वृद्धि के रास्ते की बाधा हैं।

भारतीय निर्यात आयात बैंक ने भी ब्रिक्स देशों के लिये स्वतंत्र रेटिंग एजेंसी की पुरजोर वकालत की थी।
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