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डॉक्टर्स और इंजीनियर्स की दुनिया के 'आकाश' का नया सफ़र

आकाश का डिजिटल सफ़र: आईकनेक्ट के साथ शुरू ई-लर्निंग पोर्टल

Ratn Nautiyal
18th Jun 2015
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1988 में शुरू हुई आकाश एजुकेशनल सर्विस प्राईवेट लिमिटेड, आज भारत में 100 से भी ज्यादा अपने केंद्र खोल चुका है। हर साल 85000 से भी ज्यादा छात्रों को कोचिंग देते हुए आकाश एजुकेशनल सर्विस ने कोचिंग सेंटर्स की दुनिया में अपना अलग मुक़ाम बनाया है। और अब छात्रों को ज्यादा सुविधा देने के लिए आकाश एजुकेशनल सर्विस ई-लर्निंग मंच के साथ तैयार है।

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इस साल मई माह के आखिर में शुरू हुई आकाश आईकनेक्ट सर्विस में बहुत अलग-अलग प्रकार सुविधाएं हैं जिन्हें छात्र अपनी सहूलियत के अनुसार चुन सकते हैं। इस पोर्टल को छात्रों, माता-पिताओं और अध्यापकों से अविश्वसनीय प्रतिक्रिया प्राप्त हो रही है।

छात्रों के लिए आईकनेक्ट में आकाश के वीडियो लेक्चर, स्टडी मटीरियल और ऑनलाइन टेस्ट उपलब्ध हैं। इसका उद्देश्य कक्षा 11 और 12 के छात्रों को मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है और साथ ही साथ कक्षा 8, 9 और 10 के छात्रों को स्कूल परीक्षा और बोर्ड परीक्षा की तैयारी कराना है। इसके अलावा एंटीइसई, केवीपीवाय, जेएसटीएसई, ओलिंपियाड जैसी जूनियर स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए भी यह पोर्टल मदद करता है।

पोर्टल छात्रों को सिखाने के लिए, विशेषज्ञ से समस्या का समाधान, प्रदर्शन पत्र, कोर्स मैप के साथ बहुत सी विशेषतायें लिए हुए है। आने वाले समय में पोर्टल में डिस्कशन फ़ोरम, कंटेंट एंरिच्मेंट और टास्क मैनेजर फ़ीचर जोड़े जायेंगे। आकाश ने बैंगलोर की क्लाउड बेस्ड इंटरैक्टिव लर्निंग सलूशन की कम्पनी ट्रिबाइट टेक्नोलॉजीज के साथ मिलकर काम किया है।

आकाश आईकनेक्ट छात्रों को चुनने की आज़ादी देता है, वे पूरा कोर्स या कोई विषय या कोई अध्याय अपनी मर्ज़ी से ख़रीद सकते हैं। अध्याय 99 और पूरा कोर्स 10,999 रुपये के प्रारम्भिक मूल्य पर उपलब्ध है। आकाश आईकनेक्ट को गूगल प्ले और एप्प स्टोर पर लांच करने की तैयारी में है जिससे छात्रों को सीखने में और अधिक मदद मिलेगी।

योर स्टोरी ने आकाश के संस्थापक से संस्था के विकास और भविष्य की योजनाओं के बारे में बात की।

सवाल- पिछले 15 सालों में परीक्षा तैयारी का परिदृश्य कैसे विकसित हुआ है?

परीक्षा तैयारी ने बहुत हद तक भारत के शिक्षा उद्योग के परिदृश्य को विकसित किया है। कुछ बड़े नाम उभर कर सामने आये हैं तो वहीँ दूसरी तरफ कुछ लोग मिलकर उद्योग को आकार नया दे रहे हैं। डिजिटल क्रान्ति भी वह दूसरी चीज है जिसने परिदृश्य बदला है। साथ ही यह देख कर काफी अच्छा लगता है नये लोग परीक्षा तैयारी के लिए अलग तरीका और समाधान दे रहे हैं। इसके पीछे कारण छात्रों के ज्ञान को तेजी से बढाने की मांग है। जहाँ 1999 में केवल एक-दो लाख आईआईटी-जेईई परीक्षा देते थे वहीँ आज ये सख्यां बढ़ कर लाखों में पहुँच गयी है। ऐसा ही अन्य प्रवेश परीक्षा के साथ भी है।

लेकिन तेजी से बदले इस धरातल में कुछ बातें सकारात्मक नहीं है। कुछ लोग ऐसे भी आ गये हैं जिनका काम सिर्फ रुपया बनाना है और यह युवा दिमागों को सही ट्रेनिंग देने के मिशन में अच्छी बात नहीं है।

सवाल– आकाश को कब लगा कि उसे डिजिटल माध्यम को गंभीरता से लेना चाहिए?

इस क्षेत्र में प्रथम होने के नाते हम हमेशा से एक कदम आगे ही रहे हैं। 2008 में बेसिक ऑनलाइन असेसमेंट टूल लांच कर हम डिजिटल में आ गये थे, उसके बाद हमने डीवीडी आधारित शिक्षा देने की योजना निकाली। फिर हमने ऑनलाइन टेस्ट का मंच छात्रों को दिया, जिससे वे अपने घर में बैठ कर तसल्ली से टेस्ट दे सकते थे।

ऑनलाइन टेस्टिंग की सफलता के बाद हमने नया उत्पाद आकाश आईट्यूटर लांच किया। जिसके द्वारा छात्र टॉप लेक्चर देख सकते थे और यह ऑफलाइन रह कर भी संभव था। आकाश आईट्यूटर छात्रों में बहुत ही प्रचलित हुआ, इसकी सफलता के बाद हमने एक कदम और बढ़ते हुए आकाश आईकनेक्ट लांच किया, जो कि अब तक सबसे एडवांस्ड प्रोडक्ट है, जो छात्रों के लिए डिवाईस की सीमाओं को तोड़ता है।

हमारे पास डिजिटल प्रोडक्ट की श्रंखला तैयारी है, हम जल्दी ही इन्हें लांच करेंगे। ये प्रोडक्ट एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है, जो छात्रों की बेहतर तैयारी में मदद देंगे।

सवाल– छोटी संस्थाएं डिजिटल माध्यम में बड़ा नाम कमा रही हैं, इस बारे में आप क्या सोचते हैं?

यह इंडस्ट्री के लिए अच्छी बात है। छोटे लोग अपनी काबिलियत के हिसाब से नए आईडिया के साथ आ रहे है। टेक्नोलॉजी का यह बहुत बड़ा क्षेत्र है हम अभी इसका केवल छोटा रूप देख रहे हैं। इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, जो युवा लोगों को सीमाओं को बढ़ाने के लिए अपने नये उत्पादों और समाधानों के साथ बुला रही हैं। हम गौर से इस क्षेत्र को देख रहे हैं और सही लोगों के साथ पार्टनर बनने के लिए भी तैयार हैं।

सवाल- क्या आपको लगता है कि पारम्परिक कक्षायें समाप्ति की ओर है?

पिछले कुछ दशकों से जिस तरह से हम देखते आ रहे हैं कि पारम्परिक कक्षायें बदलने के लिए बाध्य हुई हैं। मुझे लगता है कि एक अच्छी कक्षा का अपना ही अलग लाभ होता है और तकनीक को कक्षा में लाने से इसे नयी ऊँचाई मिलेगी। अगर कोई बदलाव नहीं अपना पायेगा तो वह इस इंडस्ट्री का “कोडक” बनकर रह जायेगा।

कक्षा की शिक्षा डिजिटल कक्षा में तब्दील नहीं हो पाएगी लेकिन डिजिटल माध्यम कक्षा की शिक्षा को और विस्तार देगी।

सवाल- आज से 5 साल बाद आकाश कैसा दिखेगा?

आज से 5 साल बाद जो चीज़ नहीं बदलेगी वो है, हमारी नयी चीज़ों के प्रति भूख और छात्रों को उनके सपनों के बारे में एहसास कराने का जुनून। हमारा लक्ष्य देश के कोने-कोने तक उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रणाली को पहुंचना है। ताकि योग्य छात्रों और उनके सपनों के बीच में कोई दीवार ना आये। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हम तकनीक के सारे माध्यमों– इंटरनेट, मोबाइल, टेबलेट आदि का पूरा प्रयोग करेंगे।

इस इंडस्ट्री में प्रथम होने के कारण हमारी लगातार बेहतर करने कि क्षमता, प्रोडक्ट की गुणवत्ता और सेवाओं ने सिर्फ आकाश को ही नहीं बल्कि पूरी इंडस्ट्री को बदला है।

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