क्या बला है टोरेंट जहां से आप कर सकते हैं सबकुछ डाउनलोड, लेकिन सिर्फ एक चूक आपको पहुंचा देगी जेल

By शोभित शील
March 25, 2021, Updated on : Thu Mar 25 2021 05:42:58 GMT+0000
क्या बला है टोरेंट जहां से आप कर सकते हैं सबकुछ डाउनलोड, लेकिन सिर्फ एक चूक आपको पहुंचा देगी जेल
अगर आप टोरेंट से खास परिचित नहीं हैं तो हम नीचे आपको इसके बारे में और इसके सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं। आमतौर पर लोगों के बीच धारणा है कि टोरेंट का इस्तेमाल सिर्फ कॉपीराइट वाले कंटेन्ट को डाउनलोड करने के लिए किया जाता है जो कि पूरी तरह सच नहीं है।
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इंटरनेट आज हमारी ज़िंदगी का बेहद अहम हिस्सा बन चुका है। हम कितनी ही चीजें इंटरनेट के जरिये रोजाना डाउनलोड करते रहते हैं। कई बार हमें जिस फ़ाइल को डाउनलोड करना होता है और वो फाइल किसी वेबसाइट पर नहीं मिलती है तो हम उस फ़ाइल को खोजने और उसे डाउनलोड करने के लिए टोरेंट का सहारा लेते हैं।


अगर आप टोरेंट से खास परिचित नहीं हैं तो हम नीचे आपको इसके बारे में और इसके सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं। आमतौर पर लोगों के बीच धारणा है कि टोरेंट का इस्तेमाल सिर्फ कॉपीराइट वाले कंटेन्ट को डाउनलोड करने के लिए किया जाता है जो कि पूरी तरह सच नहीं है।


तो सबसे पहले यह जान लेते हैं कि टोरेंट क्या है?

टोरेंट क्या है?

टोरेंट दरअसल बिटटोरेंट प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करते हुए शेयर की जाने वाली फाइल को कहते हैं। अब आप कहेंगे कि ये बिटटोरेंट प्रोटोकॉल क्या बला है? बिटटोरेंट असल में एक कम्यूनिकेशन तकनीक है जिसके जरिये इंटरनेट पर पीयर-टू-पीयर (peer to peer) फाइल शेयरिंग होती है।


ये फ़ाइलें आमतौर पर यूजर्स के विकेंद्रीकृत नेटवर्क पर बिखरी हुई होती हैं, जहां से इसे डाउनलोड किया जाता है। तो जब भी आप किसी टोरेंट फाइल को डाउनलोड करते हैं तब आप पीयर-टू-पीयर फाइल शेयरिंग के जरिये बिटटोरेंट प्रोटोकॉल का इस्तेमाल कर रहे होते हैं।

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कैसे होती है फाइल डाउनलोड?

अगर सरल भाषा में टोरेंट डाउनलोड को समझा जाये तो इसमें बड़ी संख्या में कंप्यूटरों की भागीदारी होती हैं। मतलब किसी भी फाइल के लिए कोई केंद्रीकृत सर्वर नहीं होता है, बल्कि फाइल को एक यूजर तमाम कम्प्यूटरों के जरिये डाउनलोड करता है।


आप जिस भी फ़ाइल को डाउनलोड करना चाहते हैं उसके लिए पहले आपको उसकी टोरेंट फाइल को ढूंढना होगा, यह फाइल मिल जाने पर आप उसे टोरेंट क्लाइंट (जैसे Bittorrent या utorrent) के जरिये इस्तेमाल करेंगे। ये टोरेंट फाइल दरअसल आपकी मूल फाइल का पता है।


अब टोरेंट क्लाइंट तमाम कंप्यूटरों से वो फाइल डाउनलोड करके आपको देगा। इसका मतलब यह हुआ कि जो फाइल आपको चाहिए उसे कई कम्प्यूटरों से कई हिस्सों में डाउनलोड किया जाना है। इस तरह से देखें तो अगर आप टोरेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप भी किसी न किसी तरह फाइल्स के लिए अपना योगदान भी दे रहे हैं।

क्या टोरेंट अवैध है?

ऐसी बातें होती रहती हैं कि टोरेंट का इस्तेमाल गैर-कानूनी है, जो कि सच नहीं है, लेकिन हाँ, टोरेंट के जरिये किसी ऐसे कंटेन्ट को डाउनलोड करना जिसके अधिकार किसी और के पास हैं, ये पूरी तरह गैर-कानूनी है।


टोरेंट दरअसल इंटरनेट पर सर्वर की निर्भरता को कम करता है और यही कारण है कि फाइल के आदान-प्रदान के लिए टोरेंट को अधिक पसंद किया जाता है। तो जब तक आप टोरेंट का इस्तेमाल लीगल कंटेन्ट को डाउनलोड करने के लिए कर रहे हैं आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है।


पाइरेटेड कंटेन्ट डाउनलोड करना न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि यह आपके कंप्यूटर में बड़ी आसानी से वायरस या मेलवेयर इंजेक्ट कर सकता है और ऐसा आप कतई नहीं चाहेंगे।

टोरेंट के साथ दिक्कत क्या है?

हालाँकि टोरेंट का उपयोग करके पीयर-टू-पीयर फाइल साझा करने के अधिक लाभ हैं, फिर भी कुछ मामलों में यह परेशान कर सकता है। यदि टोरेंट का उपयोग करने वाले यूजर्स का नेटवर्क बहुत छोटा है, तो संभावित डाउनलोड स्पीड बेहद कम हो सकती है, ऐसे में आपको किसी फाइल को डाउनलोड करने के लिए घंटों का इंतज़ार करना पड़ सकता है।

कुछ टर्म आपको सीख लेने चाहिए

अगर आप भी भविष्य में टोरेंट फाइल के जरिये डाटा डाउनलोड करने वाले हैं तो इन टर्म की जानकारी आपकी काफी मदद कर सकती है।


सीड या सीडर: यह आपको बताता है कि पूरी फाइल को कितने यूजर्स द्वारा नेटवर्क पर शेयर किया जा रहा है। यह संख्या जितनी अधिक होगी आपकी फाइल उतनी ही तेजी के साथ डाउनलोड होगी।


पीयर: यह बताता है कि उस फाइल को एक समय में कितने लोग डाउनलोड कर रहे हैं। यह संख्या जितनी कम होगी आपकी फाइल को डाउनलोड करने में उतना ही कम समय लगेगा।


लीचर: ये वे यूजर्स हैं जो केवल फ़ाइल डाउनलोड करते हैं, लेकिन फ़ाइल को साझा (या अपलोड) नहीं करना चुनते हैं। तो, आप जितने अधिक लीचर्स को सीडर्स की तुलना में पाते हैं, कम डाउनलोड स्पीड की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।


Edited by Ranjana Tripathi