बच्चों के लिए 'चोकोलेट फ़ॉर चैरिटी' स्टार्टअप और चप्पल बैंक चलाते हैं आयुष

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इस समय क्या, इससे पहले भी हमारे देश में शायद ही ऐसा कोई पूर्णकालिक सामाजिक संगठन रहा हो, जो ग्वालियर में 'मानवता ग्रुप' चला रहे आयुष जैन की तरह सालाना चार लाख के टर्नओवर वाला 'चोकोलेट फॉर चैरिटी' स्टार्टअप और चप्पल बैंक चलाकर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुका हो।  

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फोटो (सोशल मीडिया)

ग्वालियर के उत्साही युवा आयुष बैद जैन 'मानवता ग्रुप' नाम से अनूठी सामाजिक पहल के साथ जरूरतमंद बच्चों के लिए देश की पहली 'चप्पल बैंक' स्थापित कर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2015 में इस ग्रुप की शुरुआत की थी। उनके लिए चप्पल बैंक तो अभावग्रस्त बच्चों की मदद का एक बहान रहा है, मूलतः वह उनकी शैक्षिक मदद कर अपने पैरों पर खड़े होने के लिए उन्हे प्रेरित करते हैं। संगठन से जुड़े लोग ही जरूरतमंद बच्चों को शहर में घूम-घूमकर चप्पलें पहनाते हैं। आयुष जैन गरीब बच्चों के लिए चप्पल बैंक को एक प्रदेश स्तरीय अभियान की तरह संचालित करना चाहते हैं। ग्रुप की टैग लाइन है- 'मांगो नहीं, कमाओ।'


ग्रुप को अपनी कमाई से संचालित करने के लिए 13 हजार रुपए से शुरू हुए इसका 'चोकोलेट फ़ॉर चैरिटी' स्टार्टअप विगत दो वर्षों में ही अपना चार लाख रुपए सालाना टर्नओवर हासिल कर चुका है। 


आयुष जैन कहते हैं- 'खुद का माइनस पॉइंट जान लेना, ज़िन्दगी का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट होता है।' मानवता ग्रुप' बच्चों को चप्पलें पहनाने के अलावा कैंसर हॉस्पिटल के मरीजों को सैनिटाइजर और टॉवल देकर उनके भी दुख में सहभागी बनता रहता है। ग्रुप की गतिविधियां शुरू करते हुए पहले साल दो हजार बच्चों को चप्पलें पहनाई गईं। विगत ढाई वर्षों में मानवता ग्रुप आठ हजार से ज्यादा बच्चों को मुफ्त चप्पलें पहना चुका है। इसके लिए ग्रुप को इनरह्वील क्लब ऑफ़ ग्वालियर इस साल मई में सम्मानित भी कर चुका है।


आयुष जैन ने 18 साल की उम्र से मानवता ग्रुप चला रहे हैं। दरअसल, मानवता ग्रुप अपनी गतिविधिया संस्थागत तरीके से नहीं, पारिवारिक ढांचे की तरह संचालित करता है। आयुष को अपने इस मिशन में दवा की दुकान चला रहे पिता और गृहिणी मां से भी मदद मिलती है।





आयुष जैन अपने शहर ग्वालियर की कृष्णनगर बस्ती में खुद की कोशिशों से बच्चों के लिए पहाड़ी पर एक स्कूल भी खुलवा चुके हैं। बच्चों को चप्पलें पहनाने के साथ ही वह उन्हे पढ़ाई-लिखाई के सामान, स्टेशनरी आदि भी उपलब्ध कराते हैं। वह अपने सामाजिक सरोकार मानवता मिशन एजुकेशन, मानवता मिशन एडमिशन, चप्पल बैंक, ओरल हेल्थ अवेयरनेस मिशन, मानवता गर्ल्स सेफ्टी ग्रुप, नो स्मोकिंग अवेयरनेस कैंपेन के माध्यम से साझा करते हैं। वह बताते हैं कि मानवता ग्रुप ग्वालियर में दो दर्जन से अधिक स्कूलों के विकास में हाथ बंटा चुका है। ग्रुप की कोशिशों से ही कई स्कूलों का विद्युतीकरण संभव हो सका। 


आयुष जैन का यह ग्रुप पिछले पांच वर्षों में लगभग साढ़े पांच सौ बच्चों को विभिन्न स्कूलों में दाखिला दिला चुका है। मानवता ग्रुप के लोग घर-घर जाकर अभिभावकों को अपने बच्चे पढ़ाने के लिए जागरूक भी करते हैं। ग्रुप की ओर से हर साल दांत शिविर लगाकर अब तक हजारों बच्चों का इलाज कराया जा चुका है। 'नो स्मोकिंग अवेयरनेस' अभियान के तहत ग्रुप ने खुद का मॉडल विकसित कर लिया है।


ग्रुप के लोग असुरक्षा का दंश झेल रही लड़कियों को घर बैठे पुलिस सहायता उपलब्ध कराते हैं। इसके लिए भी पुलिस महकमा इस ग्रुप को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कर चुका है।




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