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पिकअप वैन चलाने के साथ ही सांपों को पकड़कर जेंडर स्टीरियोटाइप को चुनौती दे रहीं जेआर राजी

74 सांप पकड़ने वाली औरत...

पिकअप वैन चलाने के साथ ही सांपों को पकड़कर जेंडर स्टीरियोटाइप को चुनौती दे रहीं जेआर राजी

Saturday December 02, 2017 , 4 min Read

सांपों के लिए जेआर राजी के भीतर बचपन से ही कौतूहल था। वे कभी उनसे डरती नहीं थीं। बल्कि सांप तो उन्हें शुरू से ही आकर्षित करते थे। जब वो छोटी थीं तो वे घर में निकलने वाले सांपों के पीछे-पीछे भागा करती थीं।

सांप के साथ जेआर राजी (फोटो साभार- द न्यू इंडियन एक्सप्रेस)

सांप के साथ जेआर राजी (फोटो साभार- द न्यू इंडियन एक्सप्रेस)


सांपों की रग-रग से वाकिफ राजी ने यूट्यूब और इंटरनेट के जरिए इस काम में महारत हासिल की। उन्होंने केवल एक दिन की ट्रेनिंग की है। उन्हें एक बार सांप को पकड़ने के लिए विख्यात बाबु पलालयम से सांपों के बारे में जानने का मौका मिला था।

राजी को सांप पकड़ने के बदले जो पैसे मिलते हैं वही उनकी कमाई होती है। हालांकि वे गरीब लोगों से या सार्वजनिक जगहों पर पकड़े जाने वाले सांप के बदले पैसे नहीं लेती हैं। इस काम के लिए वह 24 घंटे उपलब्ध रहती हैं। 

एक भारतीय महिला का पिकअप वैन चलाना ही समाज में बने जेंडर स्टीरियोटाइप तोड़ने के लिए काफी है, लेकिन केरल की रहने वाली 33 वर्षीय जे आर राजी इतने से ही नहीं रुकीं। इन दिनों वह पिकअप वैन के साथ चलने के बजाय सांपों के पीछे भाग रही हैं। कुछ ही महीने पहले उन्होंने सांपों को पकड़ने का रोजगार खोजा है। अभी तक उन्होंने कुल 74 सांप पकड़े हैं। केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में इतनी तादाद में सापों की संख्या लोगों की जान की दुश्मन बन सकती थी। सांप कितने जहरीले होते हैं इसके बारे में बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन राजी इस काम को बड़े आसानी से अंजाम देती हैं।

वह कहती हैं, 'यह सौभाग्य की बात है कि इस काम में अब तक न तो सांपों को कोई नुकसान हुआ है और न ही मुझे। आप चाहे इसे भगवान का आशीर्वाद कह लें या फिर सांपों को पकड़ने की तकनीक।' राजी ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया कि सांपों के लिए उनके भीतर बचपन से कौतूहल था। वे कभी उनसे डरती नहीं थीं। बल्कि सांप तो उन्हें शुरू से ही आकर्षित करते थे। राजी ने अपना बचपन केरल के कोल्ला में नाडुमंगड नाम के एक दूरस्थ गांव में गुजारा है। जब वो छोटी थीं तो घर में निकलने वाले सांपों के पीछे वे भागा करती थीं।

सांपों की रग-रग से वाकिफ राजी ने यूट्यूब और इंटरनेट के जरिए इस काम में महारत हासिल की। उन्होंने केवल एक दिन की ट्रेनिंग की है। उन्हें एक बार सांप को पकड़ने के लिए विख्यात बाबु पलालयम से सांपों के बारे में जानने का मौका मिला था। वे सांपों को पकड़ने वाले एनजीओ के साथ काम करते थे। राजी ने सांप पकड़ने के अपने छोटे से करियर में दक्षिणी केरल में हर तरह के जहरीले सांप पकड़े होंगे। हालांकि अभी उन्हें किंग कोबरा को नहीं पकड़ सकी हैं। इस सांप को सबसे जहरीली प्रजाति मानी जाती है।

वे बताती हैं कि एक बार उन्हें एक घर में कोबरा को पकड़ने का मौका मिला था। वे बताती हैं, 'जब लोगों ने उसे देखा तो उस पर पत्थर मारना शुरू कर दिया। जिसके बाद वह दीवारों में छुपने लगा। मुझे उसे पकड़ने से पहले भीड़ को शांत कराना था।' वे बताती हैं कि भारत में घर में निकलने वाले सांपों को लाठी-डंडों से पीटकर मार दिया जाता है। उन्हें पकड़कर किसी सुरक्षित जगह पर छोड़ने की कोई अच्छी व्यवस्था नहीं है। भारत में सांपों को पकड़ने और भारी वाहन चलाने का काम मुख्य तौर पर पुरुषों के द्वारा ही किया जाता है, लेकिन राजी यह दोनों काम कर के जेंडर स्टीरियोटाइप को तोड़ रही हैं। वे कहती हैं कि चाहे ड्राइविंग हो या फिर सांप पकड़ना, अगर हम सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं तो महिला हो या पुरष कोई भी इस काम को कर सकता है।

राजी को सांप पकड़ने के बदले जो पैसे मिलते हैं वही उनकी कमाई होती है। हालांकि वे गरीब लोगों से या सार्वजनिक जगहों पर पकड़े जाने वाले सांप के बदले पैसे नहीं लेती हैं। इस काम के लिए वह 24 घंटे उपलब्ध रहती हैं। हर बार सांप को पकड़ने के बाद वह वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करती हैं और उन्हें इन सांपों को किसी जंगल में छोड़ देने को कहती हैं। हालांकि राजी का दूसरा पेशा भी है और वह पिकअप वैन चलाती हैं। उनके पास भारी वाहन चलाने का अच्छा अनुभव है। उनके पति अनिल कुमार खुद भी ड्राइवर हैं। उनकी दो बेटियां भी हैं, अनामिका और अभिरामी जो कि अभी स्कूल जाती हैं।

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