अंबानी की राह पर अडानी! क्या जियो को टक्कर देने के लिए अडानी लाएंगे दूसरा 'जियो', प्राइस वॉर फिर देगा दस्तक?

By Anuj Maurya
July 26, 2022, Updated on : Tue Jul 26 2022 16:31:43 GMT+0000
अंबानी की राह पर अडानी! क्या जियो को टक्कर देने के लिए अडानी लाएंगे दूसरा 'जियो', प्राइस वॉर फिर देगा दस्तक?
एक वक्त था जब मुकेश अंबानी ने भी पहले स्पेक्ट्रम लिया, फिर धीरे से टेलिकॉम में एंट्री मारी और तहलका मचा दिया, गौतम अडानी के इरादे भी कुछ वैसे ही लग रहे हैं।
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देश में 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी शुरू हो चुकी है। मुकेश अंबानी की टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जियो के साथ-साथ इसमें भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया ने भी हिस्सा लिया है। इस नीलामी में सबसे बड़े सरप्राइज हैं गौतम अडानी, जिनकी कोई टेलिकॉम कंपनी नहीं है, लेकिन वह स्पेक्ट्रम नीलामी में हिस्सेदार हैं। वैसे तो गौतम अडानी ने साफ कहा है कि वह टेलिकॉम क्षेत्र में नहीं घुसेंगे और 5जी स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल अपने ग्रुप के नेटवर्क में बेहतर कम्युनिकेशन के लिए करेंगे, लेकिन कल क्या होगा कोई नहीं जानता। क्या पता

कभी आमने-सामने नहीं हुए अडानी-अंबानी

आज भले ही गौतम अडानी और मुकेश अंबानी 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में आमने-सामने हैं, लेकिन इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ है। अडानी-अंबानी पहली बार किसी बिजनस के लिए आमने-सामने आए हैं। हालांकि, अडानी ने टेलिकॉम सेक्टर से दूर रहने की बात कही है, जिसमें रिलायंस जियो आज के वक्त में सबसे बड़ी कंपनी है। कभी मुकेश अंबानी ने भी ऐसे ही स्पेक्ट्रम खरीदा था और फिर धीरे-धीरे अपनी रणनीति बनाते हुए अचानक रिलायंस जियो ले आए, जिसने बहुत सारे छोटे प्लेयर्स की छुट्टी कर दी। जानकारों को चिंता है कि कहीं वो कहानी फिर से ना दोहराई जाए।

मुकेश अंबानी भी धीरे-धीरे घुसे से टेलिकॉम सेक्टर में

ये कहानी शुरू होती है 2010 से, जब मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने पहली बार स्पेक्ट्रम नीलामी में हिस्सा लिया। उन्होंने इसी साल इंफोटेल ब्रॉडबैंड को खरीद लिया था। बाद में सरकार ने यूनिफाइड लाइसेंस के लिए आवेदन मांगे, तो अंबानी ने उसे भी हासिल कर लिया। 2014 में उनकी कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम पहली ऐसी कंपनी थी, जिसके पास पूरे देश में वॉइस सर्विस देने का 4जी लाइसेंस था। वह धीरे-धीरे अपनी तैयारी करते रहे और सितंबर 2016 में उन्होंने रिलायंस जियो के साथ टेलिकॉम की दुनिया में धमाकेदार एंट्री की। सब कुछ मुफ्त कर दिया, फोन करने से लेकर इंटरनेट चलाने तक, वो भी 4जी स्पीड से। करीब 6 महीनों तक ग्राहकों को मुफ्त सेवा देने के बाद अप्रैल 2017 से जियो ने प्लान बेचने शुरू कर दिए और आज तगड़ा मुनाफा कमा रहे हैं।

एक बार फिर प्राइस वॉर शुरू कर सकते हैं गौतम अडानी

गौतम अडानी ने कहा है कि अभी वह टेलिकॉम इंडस्ट्री में नहीं घुस रहे हैं, लेकिन जानकार मानते हैं कि आने वाले वक्त में वह टेलिकॉम की दुनिया में एंट्री जरूर मारेंगे। जिस दिन गौतम अडानी की टेलिकॉम में एंट्री होगी, उस दिन एक बार फिर से प्राइस वॉर शुरू होगा, जैसा रिलायंस जियो के आते ही शुरू हुआ था। रिलायंस जियो के आने के बाद बहुत सारी टेलिकॉम कंपनियों ने बोरिया-बिस्तर बांध लिया। अगर गौतम अडानी भी टेलिकॉम की दुनिया में उतरते हैं तो सबसे पहला खतरा वोडाफोन-आइडिया पर छाएगा, जो पहले से ही भारी नुकसान झेल रही है। जियो और एयरटेल से टक्कर लेने के लिए ही तो आइडिया और वोडाफोन को साथ आना पड़ा था, लेकिन अगर अडानी भी टक्कर देने आ गए तो प्राइस वॉर होना तय है।

5जी कॉल्स सस्ती होंगी?

2जी और 3जी के जमाने में जब बात 4जी की होती थी तो लोगों को लगता है कि वह तकनीक महंगी पड़ेगी, लेकिन जियो लॉन्च होने के बाद उल्टा हुआ। वॉइस कॉल्स और इंटरनेट डेटा के रेट तेजी से गिरे। उम्मीद की जा रही है कि 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी के बाद एक बार फिर ऐसा दौर आ सकता है। जब रिलायंस जियो सस्ते प्लान लाया था, जो बाकी कंपनियों को नुकसान हो रहा था, क्योंकि उनकी तकनीक महंगी थी। उसी तरह हो सकता है कि 5जी के तहत अगर अडानी बाजार में उतरें तो वह रिलायंस को तगड़ी टक्कर दे सकें। खैर, 5जी के तहत कॉल और डेटा सस्ता होगा या महंगा यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां स्पेक्ट्रम नीलामी में कितने पैसे खर्च करती हैं।