महिला दिवस पर इस पुरुष को मिला 'विश्व की बेस्ट मां' का अवॉर्ड, कहानी आपका दिल छू लेगी

By कुमार रवि
March 09, 2020, Updated on : Mon Mar 09 2020 06:31:30 GMT+0000
महिला दिवस पर इस पुरुष को मिला 'विश्व की बेस्ट मां' का अवॉर्ड, कहानी आपका दिल छू लेगी
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इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन एक पुरुष को 'वर्ल्ड की बेस्ट मां' का अवॉर्ड मिला है। आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा कैसे हुआ कि एक पुरुष को बेस्ट मां का अवॉर्ड मिला है। महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले आदित्य तिवारी को 'विश्व की बेस्ट मम्मी' (Best Mommy of the World) के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान एक डाउन सिंड्रोम से ग्रसित बच्चे को गोद लेने और उसे पाल-पोषने के कारण मिला है।


दरअसल आदित्य ने साल 2016 में डाउन सिंड्रोम से ग्रसित अवनीश नाम के एक बच्चे को गोद लिया था और फिर उसका पालन-पोषण किया। आदित्य ने अवनीश को मां की कमी महसूस नहीं होने दी। कन्फ्यूज हो गए ना? यहां जानिए पूरा मामला...


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आदित्य तिवारी अपने बेटे अवनीश के साथ (फोटो क्रेडिट: ANI)



दरअसल अवनीश की मां उसे आश्रम में छोड़कर चली गई थी। आदित्य तिवारी जो कि पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। उन्होंने साल 2016 में डाउन सिंड्रोम से पीड़ित अवनीश को गोद लिया लेकिन उसका लीगल पिता बनने के लिए आदित्य को कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। डेढ़ साल तक संघर्ष करने और कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद उन्हें अवनीश की कस्टडी मिली। इसके बाद उन्होंने अवनीश को सिंगल पैरेंट को तौर पर पाला।


हालांकि इसकी राह उनके लिए आसान नहीं रही। इसके लिए आदित्य साल भर तक कानूनी दांव-पेंच में फंसे रहे। डेढ़ साल तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद वह अवनीश को घर लाने में सफल हुए। न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए वह आगे कहते हैं,

'मैं उसके (अवनीश) लिए एक अच्छा इंसान, अच्छा पैरंट बनना चाहता था। उसने मुझे सिखाया कि कैसे बना जाए।'

बच्चे की कस्टडी लेने के लिए उन्होंने सामाजिक और पारिवारिक कई तरह के विरोध झेले। यहां तक कि उन्होंने अपनी नौकरी भी छोड़ दी। अब आदित्य पूरे देश में जगह-जगह जाकर ऐसी बीमारियों से पीड़ित बच्चों को काउंसलिंग देने और मोटिवेट करने का काम करते हैं। अपने अनुभव को एएनआई से साझा करते हुए तिवारी बताते हैं,

'डेढ़ साल के संघर्ष के बाद मुझे 1 जनवरी 2016 को कानूनी तौर पर अवनीश की कस्टडी मिली। अवनीश मुझे भगवान से मिला सबसे अच्छा गिफ्ट है। उसके कारण मैं खुद को धन्य महसूस करता हूं। पैरेंटिंग लिंग पर आधारित नहीं होती है। मैं भारत में अनाथ और डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों का पक्ष रखने पर काम कर रहा हूं।'

आदित्य को यह अवॉर्ड बैंगलोर में आयोजित एक कार्यक्रम में दिया जाएगा। इस कार्यक्रम का नाम 'वेमपावर' है। अवॉर्ड के साथ-साथ आदित्य प्रोग्राम के पैनल डिस्कशन में भी भाग लेंगे। अवॉर्ड मिलने पर आदित्य ने कहा कि दुनिया की बेस्ट मां के तौर पर अवॉर्ड मिलने से वह खुश हैं। मैं बाकी लोगों के साथ स्पेशल बच्चों को संभालने के अनुभव साझा करना चाहता हूं। बाप-बेटे की यह जोड़ी 22 राज्यों में रह चुकी है।


आदित्य का मानना है कि पैरेंटिंग का पुरुष या महिला से कोई लेना-देना नहीं है। यह एक पुरानी सोच है जिसमें माना जाता है कि बच्चों को पालना केवल महिलाओं का ही काम है। मुझे इसी सोच को बदलना था। आदित्य को बौद्धिक विकलांग बच्चे के पालन-पोषण के तरीकों पर सम्मेलन में भाग लेने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने भी आमंत्रित किया था।


मालूम हो, डाउन सिंड्रोम एक तरह की आनुवांशिक बीमारी है जिसमें बच्चे का मानसिक विकास देरी से होता है। 


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