Brands
YSTV
Discover
Events
Newsletter
More

Follow Us

twitterfacebookinstagramyoutube
Yourstory
search

Brands

Resources

Stories

General

In-Depth

Announcement

Reports

News

Funding

Startup Sectors

Women in tech

Sportstech

Agritech

E-Commerce

Education

Lifestyle

Entertainment

Art & Culture

Travel & Leisure

Curtain Raiser

Wine and Food

Videos

ADVERTISEMENT

एक राष्ट्रपति ऐसा भी... साथ में आकर रुका परिवार, तो अपनी जेब से भरा लाखों का बिल

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम 27 जुलाई 2015 को शिलॉन्ग में IIM के कार्यक्रम को सम्बोधित करने पहुंचे थे. उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करने के लिए भाषण देना शुरू ही किया था कि अचानक बेहोश हो गए. उन्हें वहां के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टर्स उन्हें नहीं बचा पाए थे.

एक राष्ट्रपति ऐसा भी... साथ में आकर रुका परिवार, तो अपनी जेब से भरा लाखों का बिल

Wednesday July 27, 2022 , 4 min Read

देश के एक ऐसे भी राष्ट्रपति थे जिनकी सादगी और ईमानदारी की मिसाल आज भी दी जाती है. वह जब राष्ट्रपति थे तब उन्होंने अपने परिवार को राष्ट्रपति भवन में बुलाया था.

उनके परिवार के 53 लोग 8 दिन तक राष्ट्रपति भवन में रहे थे. उनके परिवार के सदस्य अजमेर शरीफ भी गए थे. इस दौरान कुल 3 लाख 52 हजार रुपये का खर्च हुआ था. यह पूरा बिल पूर्व राष्ट्रपति ने अपनी जेब से दिया था और सरकारी खर्च का इस्तेमाल करने से इनकार दिया था.

यह घटना साल 2006 की है और तब 'मिसाइल मैन' के नाम से मशहूर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम देश के 11वें राष्ट्रपति थे. आज उनकी पुण्यतिथि है.

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम 27 जुलाई, 2015 वो शिलॉन्ग में IIM के कार्यक्रम को सम्बोधित करने पहुंचे थे. प्रोग्राम में उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करने के लिए भाषण देना शुरू ही किया था कि अचानक बेहोश हो गए. उन्हें वहां के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टर्स उन्हें नहीं बचा पाए थे.

बस स्टैंड पर अखबार बेच निकालते थे अपना खर्च

डॉ. कलाम का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम जिले के धनुषकोड़ी गांव में हुआ था. उनका पूरा नाम अबुल पक्कीर जैनुलआबेदीन अब्दुल कलाम है. उनके पांच भाई और पांच बहनें हैं.

मछुआरे घर में जन्मे कलाम साहब का बचपन बेहद अभावों में बीता था. गणित और भौतिक विज्ञान उनके फेवरेट सब्जेक्ट थे. पढ़ाई से डॉ. कलाम को इतना लगाव था कि वो बस स्टैंड पर अखबार बेच कर अपना खर्च निकाला करते थे.

डॉ. कलाम ने मद्रास इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल साइंस की पढ़ाई की थी. 1962 में उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो से अपनी नौकरी की शुरुआत की थी. उनके निर्देशन में भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी पीएसएवी-3 बनाया और 1980 में पहला उपग्रह रोहिणी अंतरिक्ष में स्थापित किया गया.

ज्यादातर जीवन नीली शर्ट और स्पोर्ट्स शूज पहनते हुए गुजारा

वह एक बेहतरीन वैज्ञानिक और राष्ट्रपति होने के साथ सादगी से जीवन जीने के लिए भी जाने गए. उनका ज्यादातर जीवन नीली शर्ट और स्पोर्ट्स शूज पहनते हुए बीता.

सादे रहन-सहन तथा पक्षपात रहित आचरण के लिए विभिन्न लोगों तथा राजनीतिक दलों के बीच उनका काफी सम्मान किया जाता है. उन्हें राष्ट्रपति भवन का द्वार आम जनता के लिए खोलने का श्रेय भी दिया जाता है और उन्हें स्नेहपूर्वक ‘‘जनता का राष्ट्रपति’’ कहा जाता है.

ऐसे बने मिसाइल मैन

डॉ. कलाम की अगुआई में भारत ने जमीन से जमीन पर मार करने वाली मध्यम दूरी की पृथ्वी मिसाइल, जमीन से हवा में काम करने वाली त्रिशूल मिसाइल, टैंक भेदी नाग जैसी मिसाइल बनाई. इसके कारण वह दुनियाभऱ में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे. इसके बाद डॉ. कलाम 'मिसाइल मैन' के नाम मशहूर हो गए.

सभी राजनीतिक दलों के समर्थन से बने थे राष्ट्रपति

साल 2002 में तत्काली प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के पास संसद में इतनी संख्या नहीं थी कि वह अपनी पसंद के राष्ट्रपति बनवा सकते. हालांकि, इसी दौरान समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने डॉ. कलाम के नाम का प्रस्ताव रखा था.

वाजपेयी सरकार ने इस प्रस्ताव एक अवसर के रूप में देखा और उनके नाम को एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ा दिया. इसके बाद मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस और वैचारिक असहमति रखनी वाले वाम दलों के लिए भी डॉ. कलाम के नाम का विरोध करना मुश्किल हो गया.

इस तरह डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम देश के 11वें राष्ट्रपति बन गए और वह देश के आज तक के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति माने जाते हैं. उन्होंने सादगी और ईमानदारी की जो मिसाल कायम की, वह बड़े पदों पर पहुंचने वालों के लिए एक उदाहरण पेश करता है.

राष्ट्रपति भवन में इफ्तार पार्टी का पैसा अनाथालयों में बंटवाया

डॉ. कलाम के सचिव रहे पीएम नायर ने भी उनकी सादगी का एक किस्सा शेयर किया था. उन्होंने बताया था डॉ. कलाम ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाली इफ्तार पार्टियों में खर्च होने वाली राशि को भी अनाथालयों में बांटने का आदेश दे दिया था.

नायर ने बताया था कि एक बार उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया और पूछा कि इफ्तार पार्टी का आयोजन क्यों होना चाहिए? इस पर कितना खर्च किया जाता है?

उन्हें जानकारी दी गई कि इस पर ढाई लाख रुपये खर्च होते हैं. इस पर उन्होंने कहा कि ये अनाथालय को दीजिए ताकि ये पैसा बर्बाद न हो. इफ्तार पार्टी की राशि से 28 अनाथालयों में बच्चों को आटा, दाल, कंबल और स्वेटर बांटा गया. उस राशि के साथ उन्होंने एक लाख रुपये और अपनी तरफ से भी दिए.