कैसे जेप्टो के फाउंडर 19 साल की उम्र में बने सबसे युवा अरबपति, समझिए नेटवर्थ कैल्कुलेशन का पूरा गणित

By Anuj Maurya
September 22, 2022, Updated on : Thu Sep 22 2022 12:50:54 GMT+0000
कैसे जेप्टो के फाउंडर 19 साल की उम्र में बने सबसे युवा अरबपति, समझिए नेटवर्थ कैल्कुलेशन का पूरा गणित
जेप्टो के को-फाउंडर कैवल्य वोहरा और आदित पलीचा दोनों ही बचपन के दोस्त हैं. दोनों ने यह कंपनी अप्रैल 2021 में शुरू की थी. आज इसकी वैल्युएशन 900 मिलियन डॉलर से भी अधिक है.
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हाल ही में IIFL Wealth Hurun India Rich List 2022 जारी हुई है. इस लिस्ट में एक तो गौतम अडानी (Gautam Adani) हैं, जिन्होंने लोगों का ध्यान खींचा है, जिन्होंने 2021 में हर दिन करीब 1.1 करोड़ रुपये कमाए हैं. वहीं दूसरी ओर इस लिस्ट में शामिल होने वाले Zepto के को-फाउंडर्स कैवल्य वोहरा (1036 रैंक) और आदित पलीचा (950 रैंक) ने भी लोगों का ध्यान खींचा है. कैवल्य वोहरा (Kaivalya Vohra) की उम्र अभी सिर्फ 19 साल है और उनकी दौलत 1000 करोड़ रुपये के पार हो गई है. वह भारत के सबसे कम उम्र के अरबपति (Youngest Billionaire) बन गए हैं. वहीं आदित पलीचा (Aadit Palicha) की उम्र भी सिर्फ 20 साल है और उनकी दौलत करीब 1200 करोड़ रुपये है.


जेप्टो के को-फाउंडर कैवल्य वोहरा और आदित पलीचा दोनों ही बचपन के दोस्त हैं. साथ ही दोनों ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की है. हालांकि, दोनों ने ही अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी और बिजनस में घुस गए. जेप्टो से पहले वोहरा ने एक दूसरे ग्रॉसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म किरानाकार्ट की स्थापना की थी. जेप्टो महज 10 मिनट में डिलीवरी के वाद के साथ आया था. दोनों ने यह कंपनी महज 2 साल पहले अप्रैल 2021 में शुरू की थी. कोरोना काल में उन्हें लगा कि लोगों को जल्दी ग्रॉसरी डिलीवरी चाहिए और जेप्टो की शुरुआत कर दी. देखते ही देखते कंपनी ने तगड़ी ग्रोथ हासिल की और आज एक बड़ा नाम बन चुका है.

आखिर कैसे कोई कमा लेता है इतनी दौलत?

आज के वक्त में जेप्टो की नेटवर्थ करीब 900 मिलियन डॉलर हो गई है. खैर, इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर इतनी कम उम्र में कोई अरबों की दौलत कैसे कमा लेता है? यहां सबसे पहले तो ये समझना जरूरी है कि जो उनकी नेटवर्थ है वह उनके बिजनस की शेयर होल्डिंग और कंपनी के वैल्युएशन के आधार पर निकाली गई है. यानी अगर आज वोहरा या पलीचा अपने सारे शेयर बेच दें तो अभी की वैल्युएशन के हिसाब से उनके पास ये पैसे होंगे, जिनकी बात की जा रही है.

पहले जानिए किसकी है कितनी शेयर हल्डिंग?

जेप्टो के लिए कैवल्य और आदित ने कई राउंड की फंडिंग ली है, जिसकी वजह से उनकी कंपनी की बहुत सारी हिस्सेदारी दूसरों के पास है. आइए जानते हैं चौथे राउंड तक किसके पास कितनी हिस्सेदारी है.


आदित पलीचा- 15.18%

कैवल्य वोहरा- 12.64%

नेक्सस वेंचर्स- 20.07%

वाई कॉम्बिनेटर- 14.8%

लैची ग्रूम- 10.32%

ग्लेड ब्रूक- 8.7%

रॉकेट इंटरनेट- 5.20%

ऑलिवर जंग- 3.55%

कॉन्ट्रेरी कैपिटल- 2.53%

कैसर फाउंडेशन- 1.53%

ग्लोबल फाउंडर कैपिटल- 1.30%

कैसे हुई 900 मिलियन डॉलर की वैल्युएशन?

किसी भी कंपनी की वैल्युएशन उसके बिजनस, रेवेन्यू और आइडिया के आधार पर निकलती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहली बार नवंबर 2021 में जेप्टो के को-फाउंडर्स ने सीरीज ए की फंडिंग के दौरान 60 मिलियन डॉलर जुटाए. इसके तहत उन्होंने 225 मिलियन डॉलर के वैल्युएशन पर करीब 26 फीसदी हिस्सेदारी दी. दूसरे राउंड की फंडिंग की जानकारी मीडिया में मौजूद नहीं है. तीसरे राउंड में दिसंबर 2021 में 570 मिलियन डॉलर की वैल्युएशन पर जेप्टो ने 100 मिलियन डॉलर का फंड जुटाया. वहीं इसी साल अप्रैल में चौथे यानी डी राउंड में कंपनी ने 900 मिलियन डॉलर की कीमत 200 मिलियन डॉलर जुटाए.


जब कोई कंपनी फंड जुटाती है तो वह अपने रेवेन्यू, ग्रोथ, डिमांड और आइडिया आदि के आधार पर पिछली बार से अधिक वैल्युएशन पर पैसे उठाती है. ठीक वैसा ही जेप्टो के को-फाउंडर्स के साथ भी देखने को मिल रहा है. पहली बार उन्होंने 225 मिलियन डॉलर की वैल्युएशन पर फंड जुटाए थे. इस तरह अगर तब भी उनके पास कंपनी की उतनी ही हिस्सेदारी थी, जितनी अभी है तो उनकी दौलत काफी कम थी. इस स्थिति में वोहरा की नेटवर्थ 227 करोड़ रुपये और पलीचा की नेटवर्थ 275 करोड़ रुपये के करीब रही होगी. जैसे-जैसे कंपनी की वैल्युएशन बढ़ती गई, उनकी नेटवर्थ अपने आप बढ़ती रही.

एक उदाहरण से समझते हैं

मान लीजिए आपने एक कंपनी शुरू की है और उसके लिए आपको फंडिंग चाहिए. भले ही आपकी कंपनी का बिजनस कुछ भी हो, आपको फायदा हो रहा हो या नुकसान हो रहा हो, आप भारी वैल्युएशन ले सकते हैं. आपको सिर्फ निवेशकों को इस बात के लिए मनाना है कि आपकी कंपनी उस वैल्युएशन के लायक है. मान लीजिए कि आपने किसी तरह उन्हें मनाकर अपनी कंपनी के 1 फीसदी शेयर 1 करोड़ में बेच दिए, तो आपकी कंपनी की वैल्युएशन 100 करोड़ रुपये मानी जाएगी. इसका ये बिल्कुल भी मतलब नहीं है कि कंपनी के पास 100 करोड़ रुपये आ गए हैं, सिर्फ फंडिंग लेने के आधार पर उसकी वैल्युएशन 100 करोड़ रुपये हुई है.


अब आप समझ ही गए होंगे कि कैसे जेप्टो के को-फाउंडर्स की दौलत छोटी सी उम्र में 1000 करोड़ से भी अधिक हो गई है. यहां एक बात समझनी होगी कि अगर आने वाले दिनों में कंपनी वैल्युएशन और बढ़ती है तो बिना कुछ अतिरिक्त मेहनत के ही कंपनी के को-फाउंडर्स की दौलत और बढ़ जाएगी. वहीं अगर वैल्युएशन गिरती है तो इसका भी खामियाजा उन्हें भुगतना होगा और उनकी दौलत घट जाएगी.