गुजरात के इस युगल ने केले के फाइबर से बनाया सस्ता सेनेटरी पैड, अब ग्रामीण क्षेत्र में फैला रहे हैं जागरूकता

By yourstory हिन्दी
January 22, 2020, Updated on : Fri Jan 24 2020 09:09:29 GMT+0000
गुजरात के इस युगल ने केले के फाइबर से बनाया सस्ता सेनेटरी पैड, अब ग्रामीण क्षेत्र में फैला रहे हैं जागरूकता
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केले के फाइबर से बायोडिग्रेडेबल सैनेटरी पैड का निर्माण कर गुजरात का यह युगल बड़ी तादाद में ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म के प्रति लोगों के बीच जागरूकता फैलाने का काम कर रहा है। इन सैनेटरी पैड की लागत आम पैड की तुलना में काफी कम है।

हेतल और चिराग विरानी

हेतल और चिराग विरानी



मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिहाज से भारत में, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में एक बड़ी चिंता का विषय है। इसी के साथ सैनिटरी पैड के निस्तारण का भी मुद्दा जटिल है जिससे पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सके। इन दोनों ही समस्याओं के निस्तारण के लिए गुजरात के एक युगल चिराग और हेतल ने कदम आगे बढ़ाते हुए केले के तने का उपयोग करके बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड का उत्पादन शुरू किया है।


2017 में इस जोड़ी ने स्पार्कल ब्रांड के तहत इन इको-फ्रेंडली सेनेटरी पैड का निर्माण शुरू किया। इन पैड्स को और अधिक सुलभ बनाने के लिए, स्टार्टअप खरीदे गए प्रत्येक नैपकिन के साथ एक सैनिटरी नैपकिन दान करता है, जिसे 'बाय वन, गिव वन’ कहा जाता है।


लागत की बात करें तो एक पैड की ऊपरी लागत 23.50 रुपये प्रति पैड है, लेकिन अधिक महिलाओं तक पहुंचने के लिए, युगल ने मार्च 2020 तक अपने नए उत्पाद को 9.99 रुपये प्रति पैड पर लॉन्च करने की योजना बनाई है। अब तक ये 50,000 पैड बेंच चुके हैं। पैड बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले केले के फाइबर उपयोग के 140 दिनों के भीतर बायोडिग्रेड हो जाता है।





चिराग ने एनडीटीवी को बताया,

“हमारा इनोवेशन ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्वच्छ भारत मिशन’ से प्रेरित है। हमारे पास 64 मिलियन टन केले के स्टेम जैसे एग्रो कचरे को सेनेटरी पैड, बेबी डायपर, सजावटी लिबास, मुद्रा पेपर और जैविक उर्वरक में बदलने की क्षमता है। हम इस नवाचार के साथ भारत में प्रति वर्ष लगभग दस लाख टन सेनेटरी पैड कचरे को खत्म कर सकते हैं। हमें उम्मीद है कि केले के फाइबर जल्द ही वैश्विक स्तर पर सेनेटरी पैड में प्लास्टिक की जगह ले लेंगे।"

इस उत्पाद को विकसित करने में युगल को उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने भी बहुत मदद की। मकैनिकल इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि वाले चिराग ने निर्माण के लिए मशीन विकसित की। अकाउंटेंसी में अपनी पृष्ठभूमि के साथ हेतल ने पैड को सस्ता बनाने और उत्पाद को बाजार में लाने के लिए लागत के लिए काम किया।


स्टार्टअप कई एनजीओ और स्कूलों के साथ काम करता है, इसके जरिये स्टार्ट अप बड़े स्तर पर जागरूकता पैदा करते हुए मासिक धर्म और स्वच्छता के बारे में लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है।


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