BLS: भारत के गांवों से लेकर 70 देशों तक डिजिटल सेवाएं देने वाली कंपनी की कहानी
BLS E-Services की सफलता की कहानी, जिसने गांव-गांव तक आधार, बैंकिंग और सरकारी सेवाएं पहुंचाईं. 200 गुना IPO, 1.42 लाख टचपॉइंट्स और 70 देशों में मौजूदगी के साथ, यह कंपनी बन गई है डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन की असली ताकत.
भारत में जब डिजिटल इंडिया (Digital India) की कल्पना की गई थी, तब सवाल उठता था—क्या यह सिर्फ शहरों तक सिमित रहेगा या गांव-गांव तक पहुंचेगा? क्या कोई ऐसा मॉडल संभव है जो टेक्नोलॉजी को सिर्फ अमीरों की चीज़ न बनाकर हर आम आदमी की ज़रूरत बना सके? इन्हीं सवालों के जवाब ने जन्म दिया एक ऐसी सोच को, जिसने न सिर्फ सरकार की सेवाओं को आम जनता तक पहुंचाया, बल्कि एक नया रास्ता दिखाया—सेवा, तकनीक और विश्वास का संगम.
आज जब हम डिजिटल पेमेंट, आधार सेवाएं, पेंशन, बीमा और सरकारी प्रमाणपत्रों की बात करते हैं, तो उनके पीछे काम करने वाली जमीनी हकीकत को कम ही लोग जानते हैं. BLS International और उसकी सहायक कंपनी BLS E-Services ने वह कर दिखाया है जो पहले सिर्फ योजनाओं के कागज़ों तक सीमित था—एक-एक नागरिक तक सेवाएं पहुंचाना, वो भी भरोसे और तकनीक के साथ.
हाल ही में BLS E-Services और BLS International के चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर शिखर अग्रवाल ने YourStory हिंदी से बात की. इस बातचीत में उन्होंने कंपनी की शुरुआत, सेवाओं, आईपीओ, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया.
शिखर अग्रवाल का सपना सिर्फ एक कंपनी खड़ी करना नहीं था, बल्कि देश-दुनिया के नागरिकों को सरकार से जोड़ने का एक मजबूत पुल बनाना था. BLS International की शुरुआत 2005 में एक विजन के साथ हुई—एक अरब लोगों तक सेवाएं पहुंचाना, वो भी तकनीक और विश्वास के साथ. आज, BLS International दुनिया भर के 70 से अधिक देशों में 46 से भी ज़्यादा सरकारों के साथ काम कर रही है. और इसी विजन की अगली कड़ी बनी BLS E-Services, जो भारत के कोने-कोने में डिजिटल और वित्तीय समावेशन का सपना पूरा कर रही है.
शिखर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से फाइनेंस और इंटरनेशनल बिज़नेस की पढ़ाई की है. उन्होंने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में विशेष ट्रेनिंग ली. 2014 में वे BLS International से जुड़े. उन्हें लगा कि यह प्लेटफॉर्म दुनिया भर के नागरिकों और सरकारों के बीच की दूरी कम कर सकता है.
शिखर कहते हैं, “मेरे लिए ये एक मौका था, जिससे हम असली बदलाव ला सकते थे.”
शुरुआत में कंपनी को काफी संघर्ष करना पड़ा. ग्लोबल वीज़ा प्रोसेसिंग जैसी जिम्मेदार और संवेदनशील फील्ड में एक नया नाम बनाना आसान नहीं था. सरकारों का भरोसा जीतने के लिए कंपनी को कड़ी मेहनत करनी पड़ी.
वे बताते हैं, “हर देश की अपनी प्रक्रिया, अपने कानून और संस्कृति होती है. इन सबके बीच एक संतुलन बैठाना ही हमारी सबसे बड़ी चुनौती थी.”
लेकिन टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को अपनाते हुए, उन्होंने न सिर्फ इस चुनौती को स्वीकार किया, बल्कि BLS को एक भरोसेमंद नाम बना दिया.

(L-R) शिखर अग्रवाल BLS E-Services और BLS International के चेयरमैन और JMD, लोकनाथ पांडा — COO, BLS E-Services
BLS की सफलता की सबसे बड़ी वजह रही—ट्रस्ट और टेक्नोलॉजी. कंपनी ने हमेशा पारदर्शिता और नियमों का पालन करते हुए काम किया. इसके अलावा, टेक्नोलॉजी का प्रभावी इस्तेमाल किया गया. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI), मोबाइल बायोमेट्रिक, डोरस्टेप वीज़ा सर्विस जैसे कई नवाचारों ने कंपनी को बाकी से अलग कर दिया.
शिखर कहते हैं, “हमने हर देश की ज़रूरत को समझा और उसी के अनुसार समाधान तैयार किए.”
2016 में शुरू हुई BLS E-Services, दरअसल BLS International की सोच का विस्तार थी. उद्देश्य था—भारत के सुदूर इलाकों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाना. आज कंपनी 1,42,000 से ज़्यादा टचपॉइंट्स के जरिए 700 से अधिक जिलों और 10,000+ पिन कोड्स को कवर कर रही है.
राजस्थान का eMitra, कर्नाटक का GramaOne, उत्तर प्रदेश का UPSCS—इन सब में BLS E-Services की सक्रिय भागीदारी है.
BLS E-Services का IPO 200 गुना ओवरसब्सक्राइब हुआ. ये न सिर्फ कंपनी की विश्वसनीयता का प्रमाण है, बल्कि निवेशकों के विश्वास का भी.
शिखर गर्व से कहते हैं, “यह दिखाता है कि लोग हमारे मॉडल, मिशन और तकनीकी नवाचारों पर भरोसा करते हैं.”
कंपनी ने हाल ही में AI को रिटेलर ऑनबोर्डिंग में इस्तेमाल करना शुरू किया. पहले यह प्रक्रिया धीमी और पेचीदा होती थी. अब यह तेज़, पारदर्शी और सटीक हो गई है. इससे गांवों और दूरदराज़ के इलाकों में भी फाइनेंशियल सर्विसेज की पहुंच आसान हो गई है.
BLS का नेटवर्क देश के हर कोने तक फैला है—चाहे वो नॉर्थ ईस्ट का छोटा सा गांव हो या दक्षिण भारत का कोई कस्बा. लोकल ट्रेनिंग एजेंट्स, मल्टीलिंगुअल सपोर्ट और आसान इंटरफेस से यह सुनिश्चित किया गया है कि हर नागरिक तक सेवाएं पहुंचे.
शिखर बताते हैं, “हर जिले में हमारा कोई न कोई टीम मेंबर मौजूद होता है.”
राज्य सरकारों के साथ साझेदारी के ज़रिए BLS ने कई परियोजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया है. आधार कार्ड, भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण, राशन कार्ड, पेंशन योजनाएं, स्वास्थ्य बीमा—सबकुछ एक ही छत के नीचे संभव हुआ है.
BLS E-Services ने डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को ज़मीनी हकीकत बना दिया है. जन धन योजना, UPI, आधार पेमेंट जैसी योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुंचाने का श्रेय कंपनी को जाता है. महिला एजेंट्स को ट्रेनिंग देकर वे अन्य महिलाओं को सशक्त बना रही हैं.
BLS का हर विस्तार समाज के लिए कुछ बेहतर करने की सोच के साथ होता है. कंपनी तकनीक में निवेश करती है, टीम को ट्रेन करती है और ग्रामीण इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाती है.
शिखर के लिए स्पेन वीज़ा सेवा का ग्लोबल कॉन्ट्रैक्ट जीतना एक ऐतिहासिक पल था. वहीं BLS E-Services की लिस्टिंग एक और महत्वपूर्ण मोड़ थी.
वे कहते हैं, “हर सफल कदम हमें याद दिलाता है कि हम एक मकसद के लिए काम कर रहे हैं.”
शिखर आज के युवा उद्यमियों को सलाह देते हैं—टेक्नोलॉजी को ज़िम्मेदारी से अपनाएं. मजबूत गवर्नेंस बनाएं, और हमेशा लोकल ज़रूरतों को समझें.
शिखर कहते हैं, “सरकार के साथ काम करना हो या जनता से जुड़ना, विश्वास ही सबसे बड़ा पूंजी है.”
अगले 3 से 5 वर्षों में BLS International का लक्ष्य है—नए देशों में विस्तार, टेक्नोलॉजी में और निवेश, और भारत के सुदूर इलाकों तक BLS E-Services को पहुंचाना. AI, मशीन लर्निंग (ML) और ऑटोमेशन से सेवा को और तेज़, सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाएगा.
BLS International और BLS E-Services सिर्फ कंपनियां नहीं हैं, यह सेवा और समावेशन की प्रतीक हैं. शिखर अग्रवाल जैसे युवा लीडर ने यह साबित कर दिया है कि जब सोच बड़ी हो और मंशा नेक हो, तो एक विचार करोड़ों ज़िंदगियों को छू सकता है. और यही है BLS की असली सफलता.




