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Aditya Birla Capital और Nippon Life के बीच टूटी विलय की बातचीत, यह है वजह

रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी (आरएनएलआईसी) में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली जापानी कंपनी निप्पॉन लाइफ की मंशा रिलायंस निप्पॉन लाइफ और बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस के विलय की थी.

Aditya Birla Capital और Nippon Life के बीच टूटी विलय की बातचीत, यह है वजह

Tuesday November 15, 2022 , 2 min Read

आदित्य बिड़ला कैपिटल और निप्पॉन लाइफ के बीच विलय को लेकर चल रही बातचीत नाकाम हो गई है क्योंकि रिलायंस कैपिटल की जीवन बीमा इकाई आरएनएलआईसी में घटी हुई हिस्सेदारी पर रजामंदी नहीं बन पाई. सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी.

रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी (आरएनएलआईसी) में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली जापानी कंपनी निप्पॉन लाइफ की मंशा रिलायंस निप्पॉन लाइफ और बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस के विलय की थी.

सूत्रों के मुताबिक, इस संभावना को लेकर निप्पॉन लाइफ की आदित्य बिड़ला कैपिटल के साथ बात चल रही थी लेकिन विलय के बाद के सांगठनिक स्वरूप को लेकर सहमति नहीं बन पाई. खासकर आरएनएसआईसी में हिस्सेदारी घटकर 10 प्रतिशत रह जाने की संभावना पर उसे आपत्ति थी.

बिड़ला सन लाइफ, आदित्य बिड़ला कैपिटल की ही एक इकाई है. वहीं आरएनएलआईसी दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही ऋणग्रस्त कंपनी रिलायंस कैपिटल की इकाई है.

बीमा नियामक इरडा के निर्देशों के मुताबिक कोई भी कंपनी एक से अधिक जीवन बीमा इकाइयों का संचालन नहीं कर सकती है. इस वजह से बिड़ला सन लाइफ के प्रवर्तकों के आरसीएल के सफल बोलीकर्ता के रूप में उभरने की स्थिति में उसके लिए रिलायंस निप्पॉन लाइफ के साथ विलय करना एक बाध्यता हो जाएगी. इस बारे में प्रतिक्रिया के लिए आदित्य बिड़ला कैपिटल को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला है.

आरसीएल और उसकी अनुषंगियों के लिए बाध्यकारी निविदा जमा करने की अंतिम तारीख 28 नवंबर है. आरसीएल के बीमा समेत आठ कारोबार इस बोली प्रक्रिया का हिस्सा हैं. इसमें बोलीकर्ता कंपनी एवं उसकी अनुषंगियों के लिए सम्मिलित बोली लगा सकते हैं या फिर वे सहयोगी कंपनियों के लिए अलग-अलग बोली भी लगा सकते हैं.

कितना है कर्ज?

रिलायंस कैपिटल में करीब 20 फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियां हैं. इनमें सिक्योरिटीज ब्रोकिंग, इंश्योरेंस और एक एआरसी शामिल है. आरबीआई ने भारी कर्ज में डूबी रिलायंस कैपिटल के बोर्ड को 30 नवंबर 2021 को भंग कर दिया था और इसके खिलाफ इनसॉल्वेंसी प्रॉसीडिंग शुरू की थी.

सेंट्रल बैंक ने नागेश्वर राव को कंपनी का एडमिनिस्ट्रेटर बनाया था. राव ने बोलीकर्ताओं को पूरी कंपनी या अलग-अलग कंपनियों के लिए बोली लगाने का विकल्प दिया था. एडमिनिस्ट्रेटर ने फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के 23,666 करोड़ रुपये के दावों को वेरिफाई किया है. एलआईसी (LIC) ने 3400 करोड़ रुपये का दावा किया है.


Edited by Vishal Jaiswal