क्या आपको पता है टैक्स एग्जेंप्शन, टैक्स डिडक्शन और टैक्स रिबेट के बीच का अंतर? यूं हैं एक दूसरे से अलग

By Ritika Singh
January 15, 2023, Updated on : Mon Jan 30 2023 17:09:26 GMT+0000
क्या आपको पता है टैक्स एग्जेंप्शन, टैक्स डिडक्शन और टैक्स रिबेट के बीच का अंतर? यूं हैं एक दूसरे से अलग
अक्सर इन तीनों टर्म्स को लेकर कन्फ्यूजन रहता है लेकिन ये तीनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं.
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बजट 2023 (Union Budget 2023) नजदीक आ रहा है. संसद में 1 फरवरी 2023 को वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बजट पेश किया जाएगा. हर बार बजट से आस रहती है कि आयकरदाताओं के लिए इसमें कुछ एलान होंगे. आयकर से जुड़ी चीजों को समझने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि टैक्स एग्जेंप्शन (Tax Exemption), टैक्स डिडक्शन (Tax Deduction) और टैक्स रिबेट (Tax Rebate) क्या हैं. अक्सर इन तीनों टर्म्स को लेकर कन्फ्यूजन रहता है लेकिन ये तीनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं. हर टैक्सपेयर को इनके बीच का अंतर पता होना चाहिए. आइए जानते हैं इनके बारे में…

टैक्स एग्जेंप्शन (कर छूट)

सबसे पहले समझते हैं टैक्स एग्जेंप्शन यानी कर छूट को. आयकर कानून एक निश्चित सीमा तक कर योग्य आय को आयकर से छूट देता है. इसके अलावा कुछ ऐसे खर्च, आय या निवेश भी हैं, जिन पर टैक्स नहीं लगता यानी वे एग्जेंप्शन कैटेगरी में आते हैं. उदाहरण के लिए खास व चुनिंदा रिश्तेदारों से मिले तोहफे. इसी तरह खेती से होने वाली आय (Agri Income) पूरी तरह टैक्स फ्री है, फिर चाहे यह कितने ही बड़े अमाउंट में क्यों न हो. जहां तक बात कर योग्य आय की है तो 2,50,000 रुपये तक की कर योग्य आय पर कोई टैक्स नहीं देना होता है, इस रकम पर टैक्स निल है. इसलिए इस अमाउंट को टैक्स से जुड़ी भाषा में एग्जेंप्टेड लिमिट भी बोला जाता है.

टैक्स डिडक्शन (कर कटौती)

डिडक्शन यानी काटना/घटाना. आयकर कानून विभिन्न सेक्शंस के तहत कई तरह के टैक्स डिडक्शंस का फायदा, करदाता को देता है ताकि उन पर टैक्स का बोझ कम रह सके.


एक होता है स्टैंडर्ड डिडक्शन. स्टैंडर्ड डिडक्शन एक तय रकम होती है. इसे कोई भी टैक्सपेयर अपनी ग्रॉस टोटल इनकम से सीधे-सीधे घटा सकता है. वर्तमान में स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट 50000 रुपये है.


इसके अलावा आयकर कानून के विभिन्न सेक्शंस के तहत कुछ निवेश व खर्चों जैसे PPF, NPS जैसी स्कीम में निवेश, जीवन बीमा पॉलिसी, होम लोन आदि पर टैक्स डिडक्शन क्लेम किए जा सकने का प्रावधान है. लेकिन एक निश्चित सीमा तक. आयकर रिटर्न में इन चुनिंदा निवेश/खर्चों का खुलासा कर, इन पर मिलने वाले टैक्स डिडक्शन की मदद से करदाता कर योग्य आय को कम कर सकता है. उदाहरण के तौर पर आयकर कानून के सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक का टैक्स डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है.

टैक्स रिबेट

टैक्स रिबेट से अर्थ उस कर देनदारी से है, जिसे सरकार माफ कर देती है. अंतरिम बजट 2019 में टैक्स रिबेट की लिमिट को 2500 रुपये से बढ़ाकर 12500 रुपये कर दिया गया. यानी वर्तमान में सरकार, करदाता की 12500 रुपये तक की आयकर देनदारी को माफ कर देती है. इस टैक्स रिबेट के चलते, 5 लाख रुपये तक की कर योग्य आय पर फिलहाल कोई टैक्स नहीं देना होता है क्योंकि इस इनकम लिमिट पर बनने वाला टैक्स, रिबेट की कैटेगरी में आ जाता है और सरकार उसे माफ कर देती है.


यह ध्यान रखना जरूरी है कि टैक्स रिबेट को माइनस नहीं किया जाता है. उदाहरण के तौर पर अगर करदाता पर कुल 13,000 रुपये की कर देनदारी बन रही है तो ऐसा नहीं हो सकता कि उसमें से 12500 रुपये की रिबेट लिमिट घटा दी जाए और बचे हुए 500 रुपये को टैक्स के तौर पर जमा कर दिया जाए. होगा यह कि बनने वाले टैक्स की राशि 12500 से 1 रुपये भी ज्यादा गई तो करदाता को पूरे के पूरे 12501 रुपये टैक्स के तौर पर जमा करने होंगे.

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