चार दोस्तों ने बनाई शानदार तकनीक, 500 पौधों का काम कर रहा ये अकेला पौधा, प्रदूषण को देता है मात

By Anuj Maurya
September 06, 2022, Updated on : Thu Sep 15 2022 13:12:56 GMT+0000
चार दोस्तों ने बनाई शानदार तकनीक, 500 पौधों का काम कर रहा ये अकेला पौधा, प्रदूषण को देता है मात
बहुत सारे स्टार्टअप बाजार में आ चुके हैं जो प्रदूषण से निपटने के तरीकों पर काम कर रहे हैं. चार युवाओं ने अरबन एयर लैब्स स्टार्टअप शुरू किया है. इसमें तकनीक के साथ मिलकर एक पौधा 500 पौधों जितना प्रभावी हो जाता है.
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आज के वक्त में प्रदूषण (Pollution) एक बड़ी समस्या बन चुका है. सर्दियों के दिनों में तो राजधानी दिल्ली गैस चेंबर में बदल जाती है. यह वजह है कि बहुत सारे स्टार्टअप (Startup) भी बाजार में आ चुके हैं जो इससे निपटने के तरीकों पर काम कर रहे हैं. कई कंपनियां भी प्रदूषण से निपटने वाले प्रोडक्ट बना रही हैं. प्रदूषण से लड़ने के लिए चार दोस्तों ने मिलकर एक स्टार्टअप 'अरबन एयर लैब्स' बनाया है, जो प्रदूषण को खास तरीके से मात दे रहा है. इस स्टार्टअप की खास बात ये है कि इसके लिए खास तकनीक के साथ पौधों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस तकनीक से लैस एक पौधा 500 पौधों जितनी हवा को प्यूरिफाई कर सकता है.

करीब 20 साल पहले शुरू हुई थी ये कहानी

वैसे तो अरबन एयर लैब्स की नींव 2018 में पड़ी, लेकिन करीब 20 साल पहले ही इस कहानी की शुरुआत हो गई थी. 1980 के दशक में नासा ने एक रिसर्च पब्लिश की थी. वह स्पेस शटल के लिए एक तकनीक बनाना चाहते थे, ताकि एयर प्यूरिफायर के फिल्टर को बार-बार बदलने की जरूरत ना पड़े. उसके बाद ये बात सामने आई कि करीब 15-20 ऐसे पौधे हैं, जिनमें प्रदूषण कम करने की क्षमता होती है. ये पौधे प्रदूषित हवा को अपने अंदर खींच लेते हैं और साफ हवा छोड़ते हैं. नासा की उस रिपोर्ट पर करीब दो दशकों तक तो कोई काम नहीं हुआ, लेकिन फिर अरबन एयर लैब्स ने इस पर काम करना शुरू किया.

खास आइडिया के तहत बनाया गया प्लांट बेस्ड प्यूरिफायर

2018 में अरबन एयर लैब्स के को-फाउंडर्स संजय मौर्य, अखिल गुप्ता, अक्षय गोयल और इंद्रजीत राव ने अपनी रिसर्च शुरू की. उन्होंने यह समझा कि कैसे तमाम पौधे हवा को साफ करते हैं. वह ये जानना चाहते थे कि अरबन और मेट्रो सिटी में कुछ कर सकते हैं या नहीं. उन्हें पता चला कि पौधों में फाइटो रेमेडिएशन प्रोसेस होती है. फाइटो का मतलब है पौधा और रेमेडिएशन मतलब है उपाय या सॉल्यूशन. पौधों की जड़ों के आस-पास कुछ खास माइक्रोऑर्गेनिज्म बन जाते हैं. प्रदूषण वाली हवा जब वहां पहुंचती है तो ये माइक्रोऑर्गेनिज्म हानिकारक गैसों को अच्छी गैसों में तोड़ देते हैं.

कंपनी ने बनाए दो तरह के प्यूरिफायर

सारे मैकेनिकल प्यूरिफायर फिल्टर पर काम करते हैं और 2-3 महीने बाद फिल्टर बदलना होता है. उन फिल्टर को फेंक दिया जाता है, जिन्हें सड़ने-गलने में 30-40 साल तक का समय लग जाता है. इस समस्या से निपटने के लिए अरबन एयर लैब्स ने दो खास प्रोडक्ट बनाए हैं. पहला है यूब्रीथ मिनी, जो 100-150 स्क्वायर फुट की जगह के लिए है. वहीं दूसरा है यूब्रीथ लाइफ, जो 300-500 स्क्वायर फुट जगह के लिए बनाया गया है. दोनों पौधे ब्रीदिंग रूट्स तकनीक पर काम करते हैं. दोनों ही प्रोडक्ट प्रदूषित हवा को खींच कर पौधों की जड़ों तक पहुंचाते हैं और फिर जड़ों में मौजूद माइक्रोऑर्गेनिज्म हानिकारक गैसों को प्यूरिफाई कर देते हैं.

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क्या है बिजनस मॉडल और कितनी है प्रोडक्ट्स की कीमत

अरबन एयर लैब्स के यूब्रीथ मिनी की कीमत 5900 रुपये है, जबकि यूब्रीथ लाइफ की कीमत 39,990 रुपये है. कंपनी ने इन प्रोडक्ट्स को बनाने में प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल किया है. प्रोडक्ट्स में अधिकतर मेटल और लकड़ी का इस्तेमाल हुआ है, जिसकी वजह से भी इनकी कीमतें थोड़ी अधिक हैं. कंपनी इन दोनों प्रोडक्ट्स को ऑनलाइन अपनी वेबसाइट, ऐमजॉन, फ्लिपकार्ट आदि के जरिए बेचती है. इसके अलावा कंपनी ऑफिस और स्कूलों के साथ बीटूबी मॉडल के तहत भी काम करती है. वहां पर इन जगहों की जरूरत के हिसाब से प्लांट लगाए जाते हैं और सर्विस के मॉडल पर पैसे चार्ज किए जाते हैं.

नहीं ली फंडिंग, लेकिन जमकर मिला सपोर्ट

कंपनी ने अभी तक कोई भी फंडिंग नहीं ली है और बूटस्ट्रैप्ड तरीके से ही कंपनी चलाई है. हालांकि, सरकार और आईआईटी रोपड़ से इस प्रोजेक्ट के लिए काफी सपोर्ट मिला है. उन्हें ना सिर्फ पैसों की मदद मिली है, बल्कि अन्य तरह की मदद भी मिली है. कंपनी के को-फाउंडर्स का मानना था कि पहले वह तकनीक बनाएंगे, फिर निवेश के लिए जाएंगे. यही वजह है कि अभी तक अरबन एयर लैब्स के लिए या तो फाउंडर्स ने अपने पैसों का इस्तेमाल किया है या फिर सपोर्ट के पैसों का सहारा लिया है.

urban air labs

सफलता की राह में हैं कई चुनौतियों

अरबन एयर लैब्स को अपने प्रोडक्ट्स बेचने में कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है. सबसे बड़ी चुनौती तो यही है कि हर कोई इन प्रोडक्ट को इस्तेमाल करने के लिए तैयार नहीं हो रहा है. इसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि उन्हें प्रोडक्ट की कीमत अधिक लग रही है. हालांकि, बहुत से ऐसे लोग होते हैं जिन्हें नई-नई चीजें ट्राई करना बहुत पसंद होता है, वह इन्हें इस्तेमाल कर रहे हैं और सराहना भी कर रहे हैं. इन प्रोडक्ट की डिमांड कम होने की एक बड़ी वजह यह भी है कि लोगों में जागरूकता बहुत कम है.

क्या है फ्यूचर की प्लानिंग?

अरबन एयर लैब्स की तरफ से जो दो प्रोडक्ट बाजार में उतारे गए हैं, उन्हें इस साल दिवाली के करीब पुश किया जाएगा. इसके अलावा कंपनी बीटूबी के तहत सरकार के साथ कई प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. आने वाले दिनों में मेट्रो स्टेशन, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और मॉल जैसी कुछ जगहों पर खास यूब्रीथ वॉल देखने को मिलेगी. इस वॉल पर पौधों को लगाया जाएगा, जो हवा को प्यूरिफाई करेंगे. यह काफी हद तक वैसा होगा, जैसे कई मेट्रो पिलर पर आपने बहुत सारे पौधे लगे देखे होंगे. भारत में प्रदूषण की समस्या से निपटने के बाद भविष्य में कंपनी अपने प्रोडक्ट को विदेशी बाजारों में भी ले जाना चाहती है.

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