Business Idea: बायोफ्लॉक से बिना तालाब के पालें मछली, कमाएं दोगुना तक मुनाफा, सरकार देगी सब्सिडी

इस तकनीक में बायोफ्लॉक एक बैक्टीरिया है, जो मछली के मल को भी प्रोटीन में बदल देता है. इस तरह वह भी मछली का चारा बन जाता है. यानी खर्चा बेहद कम और मुनाफा ढेर सारा.

Business Idea: बायोफ्लॉक से बिना तालाब के पालें मछली, कमाएं दोगुना तक मुनाफा, सरकार देगी सब्सिडी

Wednesday August 24, 2022,

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खेती में आए दिन नए-नए एक्सपेरिमेंट हो रहे हैं. एक एक्सपेरिमेंट हुआ है मछली पालन में, जिसके तहत आपको मछली पालने के लिए किसी तालाब की जरूरत नहीं होती. इसमें आप कहीं पर भी गोल से टैंक तैयार कर सकते हैं और उनमें मछली पालन (Fish Farming) कर सकते हैं. हालांकि, इस तकनीक से मछली पालन का बिजनेस (Business Idea) करने में तालाब से अधिक खर्च आएगा, लेकिन अच्छी बात ये है कि इससे आपको मुनाफा तगड़ा होगा. मछली पालन की इस नई तकनीक को बायोफ्लॉक तकनीक (Fish Farming Business by Biofloc Technique) कहा जाता है. आइए जानते हैं कैसे बायोफ्लॉक तकनीक (Biofloc Fish Farming) से पालें मछली. साथ ही जानिए कितना खर्च (Cost of Fish Farming by Biofloc) होगा और कितना मुनाफा (Profit in Fish Farming by Biofloc) कमा सकते हैं.

क्या होती है बायोफ्लॉक तकनीक?

मछली पालन की बायोफ्लॉक तकनीक में 'बायोफ्लॉक' दरअसल एक बैक्टीरिया है. यह बैक्टीरिया मछलियों के मल को प्रोटीन में तब्दील कर देता है. बायोफ्लॉक तकनीक के तहत बड़े-बड़े टैंक में मछलियां पाली जाती हैं. अमूमन एक टैंक में 17-18 हजार लीटर पानी डाला जाता है. यह टैंक छोटे-बड़े भी हो सकते हैं. मछलियों को जब दाना डाला जाता है तो उसमें से करीब आधा खाना तो मछलियां खा लेती हैं, लेकिन आधा नीचे तली में बैठ जाता है.

दाना खाने के बाद मछलियां मल करती हैं, वो भी पानी में फैलता है और नीचे बैठ जाता है. इन टैंक में बायोफ्लॉक बैक्टीरिया डाला जाता है, जो मछलियों के मल को प्रोटीन में बदल देता है. इस तरह मछली का मल भी और बचा हुए दाना बायोफ्लॉक के जरिए फिर से मछली का चारा बन जाता है. बता दें कि अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो उस मल और बचे हुए चारे की वजह से टैंक में अमोनिया का लेवल बढ़ जाएगा, जिससे मछलियों को नुकसान हो सकता है. वहीं मछली निकालने के बाद बचे हुए पानी को आप खेतों में डाल सकते हैं, जिससे पौधों को न्यूट्रिशन मिलता है।

कैसे बनाएं बायोफ्लॉक टैंक?

बायोफ्लॉक टैंक बनाने के लिए आपको सबसे पहले कुछ जगह की जरूरत है, जहां पर यह टैंक बनाया जाएगा. सबसे पहले आपको टैंक के नीचे की मिट्टी को अच्छे से दबाना होगा, ताकि टैंक में पानी भरे जाने के बाद मिट्टी ना दबे. अगर आप 17-18 हजार लीटर पानी वाला टैंक बनाना चाहते हैं तो पहले एक प्वाइंट तय कर के उसके चारों ओर 8 फुट पर लाइन खींच लें. इस तरह आपका टैंक 16 फुट के डायमीटर वाला (लंबा) हो जाएगा. नीचे ईंटों से मजबूत फर्श जैसी संरचना बनाएं और उसके चारो तरफ करीब 4 मिलीमीटर मोटे तार वाला जाल लगाएं. इसमें सबसे ऊपर की तरफ करीब 12 मिलीमीटर मोटा सरिया लगाएं, ताकि टैंक में पानी भरने के बाद वह टूटे ना. इसके बाद टैंक के अंदर आपको तारपोलीन (तिरपाल) लपेटनी होगी, ताकि एक टैंक जैसा स्ट्रक्चर बनाया जा सके.

टैंक बनने के बाद सबसे पहले आपको उसमें पानी भरना होता है. पानी का टीडीएस चेक करना जरूरी होता है. साथ ही यह भी चेक करना होता है कि बाकी किसी चीज का लेवल अधिक तो नहीं, जिससे मछली को नुकसान हो सके. इसके बाद पानी भरकर उसमें मछलियों के बच्चे डाल दिए जाते हैं. मछलियों के बच्चे आप सरकारी हैचरी से ले सकते हैं. हालांकि, सरकार से मछलियां लेने के लिए आपको पहले उसके लिए आवेदन करना होता है. इन दिनों तो कई बड़े किसान मछलियों के बच्चों की सप्लाई भी करते हैं, आप उनसे भी खरीद सकते हैं. ध्यान रहे कि मछलियों को 20-25 डिग्री के तापमान में रखना जरूरी है, वरना वह मर सकती हैं.

16 फुट यानी 5 डायामीटर वाले टैंक में आप करीब 1400 मछलियों के बच्चे एक साथ डाल सकते हैं. इसके बाद कुछ-कुछ दिन पर आपको चेक करना होता है और मछलियों को उनके वजन के हिसाब से अलग-अलग टैंक में डालना होता है. इस तरह आपको मछलियों को चारा डालने में आसानी होती है, क्योंकि चारा मछली के वजह से हिसाब से डाला जाता है. बायोफ्लॉक फिश फार्मिंग तकनीक में मछलियों के मरने की दर बहुत ही कम होती है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि आप पानी को लगातार चेक करते हैं, इसलिए बीमारियों का खतरा बहुत ही कम होता है. वहीं अगर किसी टैंक में बीमारी हो भी जाए तो आसानी से सिर्फ एक टैंक का ट्रीटमेंट कर के उससे निपटा जा सकता है. तालाब में मछली पालने में आपको पूरे तालाब का ट्रीटमेंट करना पड़ता है, जो खर्चीला होता है.

जहां पर आप मछलियों के टैंक बनाएं, उसके ऊपर आपको एक शेडनेट भी डालनी चाहिए. शेडनेट से अधिक धूप भी अंदर नहीं आएगी और मछली खाने वाले पक्षियों से भी बचे रहेंगे. साथ ही हर टैंक में एरिएशन यानी हवा के लिए कोई इंतजाम करना होगा. आप हवा पंप करने वाले मोटर की मदद ले सकते हैं, जिससे पानी में ऑक्सीजन का लेवल ना गिरे. ऑक्सीजन का लेवल कम होने से मछलियों की ग्रोथ धीरे हो जाती है और साथ ही मछलियों के मरने का भी डर रहता है. ऐसे में ध्यान रखें कि बायोफ्लॉक फार्मिंग में बिजली की बहुत अधिक जरूरत होती है, तो बैकअप की व्यवस्था जरूर रखें.

कितना खर्च, कितना मुनाफा?

अगर आप 5 डायामीटर का एक टैंक बनाते हैं तो उसमें करीब 25-30 हजार रुपये का खर्च तो सिर्फ टैंक बनाने में आएगा. इसमें टैंक का जाल, नीचे डाली फाउंडेशन और तारपोलीन का खर्च शामिल है. वहीं आपको ब्लोअर से हवा पंप कराने के लिए पूरा स्ट्रक्चर बनाने में भी 22-25 हजार रुपया खर्च हो जाएगा. इसके अलावा शेड और स्ट्रक्चर समेत कुछ छोटे-मोटे खर्चे होंगे. यानी कुल मिलाकर आपका एक टैंक 70-80 हजार रुपये में मछली पालने के लिए तैयार हो जाएगा. इसके बाद आपको बस मछलियां खरीद कर उन्हें टैंक में डालना है.

अगर आप मछली को 1 किलो तक करना चाहते हैं तो आपको प्रति मछली 50 रुपये तक का खर्च करना पड़ेगा. अगर आप आधा किलो तक की ही मछली हार्वेस्ट करना चाहते हैं तो आपका प्रति मछली पर करीब 35-40 रुपये का खर्च आएगा. वहीं ये मछलियां बाजार में 100-120 रुपये किलो के हिसाब से बिकती हैं. वहीं रिटेल में दाम 200 रुपये किलो तक हो सकते हैं. एक टैंक में आप 1000 मछलियां आराम से पाल सकते हैं. मान लीजिए कि उनमें से 100 मछलियां मर जाती हैं और 900 बच जाती हैं. ऐसे में अगर आप सिर्फ 100 रुपये के हिसाब से मछलियां बेचें तो भी आपको एक ही टैंक से 90 हजार रुपये की मछलियां मिलेंगी. इसमें से अगर 1000 मछलियों पर होने वाला 50 हजार का खर्च निकाल दें तो भी आपको 40 हजार रुपये का मुनाफा होगा.

बायोफ्लॉक मछली पालन में सिर्फ एक टैंक से मछली पालन महंगा पड़ता है, ऐसे में कम से कम 7 या 15 या 25 टैंक का फार्म बनाएं. ऐसे में आपको टैंक के लिए अलग-अलग खर्च करना होगा, लेकिन ब्लोअर का खर्च एक ही बार होगा या बढ़ेगा भी तो मामूली. इस तरह अगर आप 15 टैंक का स्ट्रक्चर बनाते हैं तो उसमें आपका करीब 5 लाख रुपये खर्च होगा, जबकि एक ही टैंक लगाने में आपका 70-80 हजार रुपया खर्च होगा. अब मान लीजिए कि आपने 15 टैंक में 15 हजार मछलियां पालीं, जिनमें से 14000 बच गईं तो 100 रुपये के हिसाब से आपकी 14 लाख रुपये की कमाई होगी. इसमें प्रति मछली पर 50 रुपये का खर्च जोड़ें तो आपका करीब 7.5 लाख रुपये का खर्च आएगा. इस तरह आपको 15 टैंक से करीब 6.5 लाख रुपये का मुनाफा होगा. अगर रेट अच्छे मिल गए तो मुनाफा और बढ़ जाएगा. यह भी ध्यान रखें कि यह मुनाफा सिर्फ 6 महीने का है, आप साल में दो बार मछली पालन कर के हार्वेस्ट कर सकते हैं.

सरकार से मिलेगी सब्सिडी

केंद्र सरकार की तरफ से मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए एक स्कीम चलाई जा रही है. इस स्कीम का नाम है प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना. इसके तहत बायोफ्लॉक सिस्टम लगाने के लिए आपको सरकार की तरफ से सब्सिडी भी दी जाती है. महिलाओं को सरकार 60 फीसदी की सब्सिडी देती है, जबकि पुरुषों को 40 फीसदी की सब्सिडी दी जा रही है. सरकारी योजना के तहत आप 7, 25 या 50 टैंक लगा सकते हैं. इन टैंक की ऊंचाई कम से कम 1.5 मीटर होनी जरूरी है. समुद्र में मछलियां बहुत ही कम अवधि में मारी जाती हैं, जिससे उनका प्रजनन कम होता है. ऐसे में दुनिया भर के देशों की सरकारों बायोफ्लॉक फार्मिंग को बढ़ावा दे रही हैं.