‘she is me’, महिलाओं पर हुए अत्याचार का कच्चा चिट्ठा

By Bhagwant Singh Chilawal
July 06, 2015, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:20:58 GMT+0000
‘she is me’, महिलाओं पर हुए अत्याचार का कच्चा चिट्ठा
हर किसी की आवाज सुनी जाती है। प्रत्येक सकारात्मक बदलाव मायने रखता है- यामिनी रमेश
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लड़कियों, महिलाओं का उत्पीड़न लगातार तेजी से बढ़ता जा रहा है। या यों कहें कि अब ऐसी घटनाओं की जानकारियां लगातार सामने आ रही हैं। प्राय: बसों में सफर करते , भीड़-भाड़ में, रोड पर चलते हुए और ऑफिसों में, औरतों को अकसर छेड़-छाड का सामना करना पड़ता हैं। ‘सी इज मी (she is me)’ की निर्माता यामिनी रमेश कहती हैं, “भारत में हर लड़की के साथ बलात्कार हुआ है। मेरे साथ हुआ है। जो ये लेख पढ़ रही हैं उनके साथ हुआ है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है। मेरा मानना है की हर आवाज और सकारात्मक बदलाव महत्व रखता है। इसीलिए मैं यह कर रही हूँ और इसीलिए यह फिल्म मेरे लिए महत्वपूर्ण है। मैं लोगों से मिली और उनके साथ जो हुआ वह सुनकर रूह कांप जाती है। ”

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यामिनी युवावस्था में, मुंबई में मीडिया में काम करती थी| उनके पास फिल्म बनाने का कोई भी अनुभव नही था और न ही वह सक्रिय रूप से इसे करना चाहती हैं। “ ‘सी इज मी’ जैसी फिल्म बनाना उनके लिए भावनाओं को व्यक्त करनेवाला था। यह फिल्म, दिल्ली और एनसीआर(NCR) में औरतों पर हुए अत्याचार पर है। इस फिल्म की हर कहानी रोगटे खड़े कर देने वाली है। ये कहानियाँ सिर्फ, अरुणा शेबांग, भंवरी देवी, स्कारलेट कीलिंग और निर्भया की नही हैं, ये उन सब की है जो औरत, हमारे इस समाज में फैले अत्याचार को सह रही है। हर पीड़ित से जब मैं मिलती थी ऐसा लगता था जैसे यह मै ही हूँ।”

जब वो छात्र थी तभी से यामिनी ने फिल्म पर काम करना शुरू कर दिया। संसाधन कम थे, लेकिन उसके दोस्तों ने उसकी मदद की। वह बताती है, “चार लोगों की टीम मेरे साथ काम करती थी। हमारे पास दो DSLR कैमरे थे। हम रिश्तेदारों के पास रुकते थे और मेट्रो और बस से यात्रा करते थे। ”


संसाधनों की कमी के बाद भी वह ये सब करने में कामयाब हो गयी। वह ख़ुशी से कहती हैं, “हम ये इसलिए कर पाए क्योकि वे लोग बहुत ही अच्छे हैं। किरण बेदी और अर्नव गोस्वामी से हमने मदद ली। हम उन लोगों को ईमेल और मैसेज करते और वे मिलने को सहमत हो जाते। ”

वह मानती है एक चीज जो वह बेहतर कर सकती थी, “आवाज, काश हमारे पास माइक होता तो हम और भी बेहतर कर सकते थे। यह आवाज सुनाई तो देती है पर मजा नही आता। ये मेरी पहली फिल्म थी और मुझे कुछ ज्यादा पता भी नही था शायद इसलिए आवाज कुछ सही नही है। ज्यादातर, फिल्म को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। बहुत से लोगों ने फिल्म देखने के बाद मुझे लम्बे –लम्बे मैसेज किए। उन्होंने अपनी बातें मुझे बताई और मुझे इस मुद्दे को उठाने के लिए धन्यवाद भी कहा। दुर्भाग्यवश बहुत कम लोगों ने यह फिल्म देखी है। लेकिन जिन्होंने देखी है, उन्होनें इसे पसंद किया। ”

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इस फिल्म को बनाने बहुत कम पैसा लगा और ना ही इससे पैसे कमाने का कोई इरादा था। ये एक कोशिश थी जिसे यामिनी ने अपने अनुभवों को फिल्म के माध्यम से दिखाया। इस फिल्म के द्वारा बदलाव लाने की शुरुआत की गयी| “मैं यह नही कहूंगी की इस फिल्म को बनाने के बाद मै बदल गयी, क्योकि मैंने हमेशा हमदर्दी की भावना महसूस की और आज भी कर रही हूँ| मै उस माँ के साथ रोयी जिसकी बेटी को उसकी सास ने मारा क्योंकि वह गर्भधारण नही कर सकती थी| इस तरह की चीजें आप कभी नही भूल सकते| इस तरह की चीजों ने देखने का नजरिया बदला है| ”

यामिनी कहती हैं, “इस फिल्म को बनाने में बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ा| लेकिन अंत में सब हमारे पक्ष में रहा| मेरी टीम बहुत सहायक थी| लोग कहते थे की इससे कोई फ़र्क नही पड़ने वाला, यह सबसे बुरी बात थी| इससे फर्क पड़ता है और पड़ेगा| ”

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वह कहती हैं, “ यह फिल्म समाज का औरतों के प्रति नजरिये को बताती है| इस फिल्म में किरण बेदी कहती है, हमें ‘ पुत्र हो ’ जैसे आशीर्वाद को देने और लेने से रोकना होगा| कविता कृष्णन कहती है कि इस तरह का अपराध औरतों के लिए सजा है| रेपिस्ट ही नही हमारा समाज भी औरतों को मजबूर करने के लिए ज़िम्मेदार है| मुझे आशा है कि इस फिल्म के माध्यम से दिमागी बदलाव आएगा| ”

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जिसने भी यह फिल्म देखी वह इसकी प्रशंसा कर रहा है| बहुत से लोग यामिनी को इस ही क्षेत्र में करियर बनाने के लिए कह रहे है| परंतु यामिनी का मानना कुछ और ही है| वह कहती है, “यह फिल्म बनाना इसलिए महत्वपूर्ण था क्योकि विषय अच्छा था| मुझे बहुत से सार्थक कार्य करने हैं| मै या तो समस्याओं को हल करुँगी या फिर कोशिश करते करते मरुंगी| ”

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वह अभी युवा जरुर है, पर उसकी सोच उससे कई आगे है| बहुत से युवा बदलाव के लिए आगे आ रहे हैं| उम्मीद है कि यामिनी लोगों को आरामदायक जीवन शैली से बाहर लाने और अपने जुनून के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित करेगी| यह समाज के अलावा आपको भी मदद करेगा|

वह कहती हैं “फिल्म ने समाज का दूसरा चेहरा बताया है, यह एक जानकारी ना होकर एक वास्तविकता है| मैं खुद को उस जगह रखती हूँ और यह आप भी हो सकते हैं या आपके चाहने वाले भी| कोई मदद ना मिलना, अन्याय और दर्द, अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता| 6 साल की लड़की का बलात्कार और विवाहित युवती को एसिड पिला देना ये समाज की सच्चाई है| अगर आप इस दुःख और अन्याय को नहीं झेल सकते तो आवाज़ उठाईये| ताकि आपको पछतावा ना हो| मुझे लगता है आप अपने बच्चों को यह दुनिया नही देना चाहेंगे और यह आपको बदलाव के लिए प्रेरित करेगा|”

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