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Infibeam को RBI से मिला पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस, क्या होता है पेमेंट एग्रीगेटर?

Infibeam की स्थापना 2007 में विशाल मेहता और विश्वास पटेल ने की थी. Infibeam कारोबारियों, उद्यमियों, कंपनियों और सरकार को ई-कॉमर्स और पेमेंट सोल्यूशन उपलब्ध करवाती है.

Infibeam को RBI से मिला पेमेंट एग्रीगेटर लाइसेंस, क्या होता है पेमेंट एग्रीगेटर?

Friday October 28, 2022 , 3 min Read

फिनटेक फर्म Infibeam Avenues को पेमेंट एग्रीगेटर (payment aggregator) का लाइसेंस मिल चुका है. कंपनी को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India - RBI) से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है.

कंपनी ने कहा है कि इस लाइसेंस को हासिल करने से उसे ऑनलाइन और ऑफलाइन डिजिटल लेनदेन, दोनों के लिए वि​भिन्न व्यावसायिक खंडों में अपनी पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी.

अहमदाबाद स्थित Infibeam की स्थापना 2007 में विशाल मेहता और विश्वास पटेल ने की थी. Infibeam कारोबारियों, उद्यमियों, कंपनियों और सरकार को ई-कॉमर्स और पेमेंट सोल्यूशन उपलब्ध करवाती है.

कंपनी घरेलू और विदेशी दोनों बाजारों में काम करती है. कंपनी के पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशन कारोबार में सॉल्यूशन एक्वायर करना, सॉल्यूशन इश्यू करना और बैंकों के लिए बुनियादी ढांचे की सुविधा देना शामिल है. कंपनी का कोर पेमेंट गेटवे बिजनेस कारोबारियों को 200 से ज्यादा पेमेंट विकल्प देता है. इनके जरिए कारोबारी वेबसाइट और मोबाइल डिवाइस के जरिए 27 इंटरनेशनल करेंसीज में भुगतान प्राप्त कर सकते हैं.

Razorpay, Mswipe, Pine Labs, और Stripe जैसे कई पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को पीए लाइसेंस के लिए आरबीआई से मंजूरी मिली है. इसके अलावा कई अन्य कंपनियों को भी पीए लाइसेंस के लिए केंद्रीय बैंक से मंजूरी मिलने की संभावना है. पेमेंट एग्रीगेटरों से 30 सितंबर 2022 तक पीए लाइसेंस के लिए आवेदन करने को कहा गया था.

वर्ष 2020 में, आरबीआई ने दिशा-निर्देश जारी किए थे जिनमें कहा गया कि सिर्फ नियामक द्वारा स्वीकृत कंपनियां ही व्यवसायियों को भुगतान सेवाएं मुहैया करा सकती हैं. जहां बैंकोंको अलग से मंजूरियां लेने की जरूरत नहीं है, वहीं पेमेंट एग्रीगेटर सेवाएं मुहैया कराने वाली गैर-बैंकिंग इकाइयों को जून 2021 तक आरबीआई के पास अथॉराइजेशन के लिए आवेदन करने की जरूरत थी, जिसे बाद में बढ़ा दिया गया था. हालांकि केंद्रीय बैंक ने उन्हें नियामक से उनके आवेदन के संबंध में अगली सूचना प्राप्त नहीं होने तक परिचालन बरकरार रखने की अनुमति दे दी.

केंद्रीय बैंक ने ऐसे लाइसेंस के लिए नियम निर्धारित किए थे, लेकिन जहां कुछ कंपनियां लाइसेंस पाने के लिए मानकों पर खरी उतरीं, वहीं बड़ी तादाद में कंपनियों के आवेदनों को खारिज कर दिया गया. कुछ रिपोर्टों के अनुसार, आरबीआई के पास करीब 180 आवेदन जमा कराए गए थे, जिनमें कई आवेदनों को ठुकरा दिया गया और कुछ को मंजूरी प्रदान की गई.

क्या होता है पेमेंट एग्रीगेटर?

पेमेंट एग्रीगेटर (पीए) ऐसी संस्थाएं हैं जो ईकॉमर्स साइटों और व्यापारियों को अपने भुगतान दायित्वों को पूरा करने के लिए ग्राहकों से विभिन्न भुगतान साधनों को स्वीकार करने की सुविधा देती है. इसका मतलब है कि व्यापारियों को अपना खुद का अलग पेमेंट इंटीग्रेशन सिस्टम बनाने की जरूरत नहीं होती है.

इस प्रक्रिया में, पीए ग्राहक पूल से पेमेंट प्राप्त करते हैं और उन्हें एक समयावधि के बाद व्यापारियों को ट्रांसफर करते हैं. विशेष रूप से, बैंक और नॉन-बैंक पीए अपनी गतिविधियों के हिस्से के रूप में धन का प्रबंधन करते हैं. हालांकि, बैंक अपने सामान्य बैंकिंग संबंधों के हिस्से के रूप में पीए सेवाएं प्रदान करते हैं और उन्हें आरबीआई से अलग प्राधिकरण की आवश्यकता नहीं होती है. जबकि, नॉन-बैंक पीए को आरबीआई से प्राधिकरण की आवश्यकता होती है.