चीन की सरकार का औरतों को फरमान, “महिलाएं पारिवारिक मूल्‍यों का सम्‍मान करें”

By yourstory हिन्दी
November 04, 2022, Updated on : Fri Nov 04 2022 09:56:48 GMT+0000
चीन की सरकार का औरतों को फरमान, “महिलाएं पारिवारिक मूल्‍यों का सम्‍मान करें”
शी जिनपिंग सरकार ने चीन के विमेंस राइट्स एंड इंटरेस्‍ट प्रोटेक्‍शन लॉ में एक संशोधन पास किया गया है, जो बहुत रूढि़वादी है.
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जब तक औरतों की जगह घर का बेडरूम और रसोई और मर्दों की जगह सड़कें, दफ्तर और दुनियावी सफलता का ऊंचा आकाश था, तब तक सब ठीक था. अब जब औरतों की जगह भी बेडरूम और रसोई से निकलकर सफलता के ऊंचे आसमान तक पहुंच गई है तो घरों को ही नहीं, देश चलाने और कानून बनाने वाली शक्तियों को भी दिक्‍कत होने लगी है.


चार दिन पहले रविवार को चीन के विमेंस राइट्स एंड इंटरेस्‍ट प्रोटेक्‍शन लॉ (Women’s Rights and Interests Protection Law) में एक संशोधन पास किया गया है. संशोधन के बाद इस कानून के पहले चैप्‍टर की शुरुआती पंक्तियां कुछ इस प्रकार हैं-


“महिलाओं को राष्ट्रीय कानूनों का सम्मान और उनका पालन करना चाहिए, उन्‍हें सामाजिक नैतिकता, पेशेवर नैतिकता और पारिवारिक मूल्यों का सम्मान करना चाहिए.”


देश का सम्‍मान, देश के कानूनों का सम्‍मान और उसके अनुपालन की बात तो इस चैप्‍टर में पहले भी थी, एक नया शब्‍द जो अब जोड़ा गया है, वह है  “पारिवारिक मूल्‍यों” का सम्‍मान.


मर्दों के सामाजिक, आर्थिक, कानूनी किसी भी प्रकार के अधिकार को सुरक्षित करने वाले चीन के किसी भी कानून में मर्दों से पारिवारिक मूल्‍यों का सम्‍मान करने की अपील नहीं की गई है. यह जिम्‍मेदारी कम्‍युनिस्‍ट देश ने सिर्फ औरतों के सिर पर डाली है.


एक महीने पहले सितंबर में चीन के सभी बड़े अखबारों में यह खबर छपी थी कि उनके देश में विवाह और चाइल्‍ड बर्थ का आंकड़ा चीन के इतिहास में रिकॉर्ड निचले स्‍तर पर पहुंच गया है. अविवाहित सिंगल लोगों की तादाद बढ़ रही है. बीजिंग, शंघाई, वुहान और ताईपेई में 40 फीसदी से ज्‍यादा आबादी सिंगल लोगों की है. और इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि महिलाएं शादी से इनकार कर रही हैं.


आज की तारीख में चीन की पोलित ब्‍यूरो की चिंता के प्रमुख सवालों में से एक ये है कि महिलाओं को विवाह और परिवार संस्‍था की ओर फिर से कैसे लाया जाए और औरतों से जुड़े इन सवालों पर चिंता करने के लिए पोलित ब्‍यूरो में एक भी महिला नहीं है. पिछले महीने अक्‍तूबर में ही चीनी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के 20वें सम्‍मेलन में शी जिनपिंग ने पोलित ब्‍यूरो सदस्‍यों के नामों की घोषणा की थी. और 25 साल में ये पहली बार है कि पोलित ब्‍यूरो में एक भी महिला नहीं है.


पिछले महीने ही फॉर्च्‍यून में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन बहुत सिस्‍टमैटिक तरीके से इंटरनेट स्‍पेस से फेमिनिस्‍ट कंटेंट का सफाया कर रहा है. जेंडर बराबरी और अधिकारों की बात करने और सेक्सिज्‍म पर सवाल उठाने वाले ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म को प्रतिबंधित किया जा रहा है.


बाकी पूरी दुनिया की तरह और खासतौर पर तीसरी दुनिया के देशों की तरह चीन भी आज से 50 साल पहले तक बहुत सामंती और मर्दवादी समाज था. आज जो महिलाएं चीन की इकोनॉमी में हिस्‍सेदार हैं, जो बड़ी मल्‍टीनेशल्‍स में ऊंचे पदों पर काम कर रही हैं, उनकी माएं और दादियां-नानियां हाउसवाइफ हुआ करती थीं.


आज की तारीख में चीन में 71.71 फीसदी महिलाएं नौकरीपेशा हैं और ये मुमकिन हुआ 70 के दशक में हुए इकोनॉमिक रिफॉर्म के कारण. शिक्षा और नौकरियों में औरतों की हिस्‍सेदारी सुनिश्चित करने के लिए बहुत सिस्‍टमैटिक तरीके से किए गए सरकारी प्रयासों का नतीजा है कि आज चीन में एक औासत कामकाजी महिला की सालाना आय 11,800 यूएस डॉलर है यानी तकरीबन 10 लाख रुपए.  


1978 के बाद से पिछले 40 सालों में सालाना तकरीबन 9.4 फीसदी की दर से बढ़ी चीन की अर्थव्‍यवस्‍था कोविड महामारी के बाद पहली बार संकट के दौर से गुजर रही है. शी जिनपिंग का नया टर्म शुरू हो चुका है और इस बार उनके सामने  बाकी चुनौतियों के साथ एक बड़ी चुनौती ये है कि देश में रिकॉर्ड लो पर पहुंच गए विवाह और चाइल्‍ड बर्थ की स्थिति को कैसे ठीक किया जाए, जिसका असर आने वाले समय में देश की डेमोग्राफी पर पड़ना तय है. चिंता तो वाजिब है, लेकिन उस चिंता का हल बेहद पितृसत्‍तात्‍मक ही है.


Edited by Manisha Pandey