5 और 10 रुपये के प्रोडक्ट बेचती है कोयम्बटूर की यह FMCG कंपनी, लक्ष्य आम लोगों तक पहुंचना

By Bhavya Kaushal
May 17, 2021, Updated on : Tue May 18 2021 03:14:16 GMT+0000
5 और 10 रुपये के प्रोडक्ट बेचती है कोयम्बटूर की यह FMCG कंपनी, लक्ष्य आम लोगों तक पहुंचना
प्रभु गांधीकुमार और उनकी पत्नी ब्रिंधा विजयकुमार ने मिलकर 2018 में TABP स्नैक्स एंड बेवरेजेस की स्थापना की थी। ब्रांड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये क्रमशः 5 और 10 रुपये में स्नैक्स और पेय पदार्थ उपलब्ध कराती है।
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2012 में भारत वापस आने से पहले प्रभु गांधीकुमार कई वर्षों तक अमेरिका में सलाहकार के रूप में काम कर रहे थे। भारत आकर वह मेटल कास्टिंग के उत्पाद के अपने फैमिली बिजनेस से जुड़ गए। हालांकि फिर भी उन्होंने अपने अंदर असंतोष की एक गहरी भावना महसूस की।


उन्होंने बताया, “अमेरिका में, मैं दिन में 15-16 घंटे काम करता था। जीवन में वहां सबकुछ बहुत तेजी से होता था। हालांकि, जब मैं वापस आया, तो जीवन बहुत धीमा हो गया। मैंने एक फाउंड्री खोली लेकिन मुझे वहां भी पर्याप्त चुनौती महसूस नहीं हुई।"


फिर 2016 में, उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में शोध किया, जिसमें वे कारोबार कर सकते थे और उन्हें पेय पदार्थ एक अच्छा विकल्प लगा। उन्होंने बताया, “मुझे एहसास हुआ कि ग्रामीण इलाकों में लोग नियमित रूप से लस्सी, जीरा मसाला और अन्य पेय का सेवन करते हैं। इसके अलावा, एक बोतल को पकड़ना उनके लिए बहुत ही बड़ी बात थी।”


उन्होंने यह भी देखा कि दिहाड़ी मजदूरी कार्बोनेटेड पेय के लिए तरसते थे, जो कि किफायती होने के स्वादिष्ट भी थे। खासतौर से अप्रैल, मई और जून जैसे गर्मियों के महीनों में। भारत में अधिकतर कार्बोनेटेड पेय पेप्सी, कोका कोला और नेस्ले जैसी एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों द्वारा बेचे जाते हैं। एक 300 मिली कोका कोला की कीमत आमतौर पर 20-35 रुपये के बीच हो सकती है, जो कि कमाई के लिहाज से निचले पंक्ति पर खड़े लोगों के महंगा दाम हो सकता है।


इसके अलावा, कई डेटा रिपोर्टों के अनुसार देश में एक दिहाड़ी मजदूर की औसतन कमाई 9,000 से 10,000 रुपये प्रति माह है। कभी-कभी, इससे कम आय भी होती है।


प्रभु कहते हैं कि उन्हें बाजार में एक मांग और आपूर्ति के बीच एक वास्तविक अंतर मिला। उन्होंने बताया, "हम उन लोगों को लक्षित करना चाहते थे, जो इस सेगमेंट में सबसे नीचे थे और वे उपेक्षित हो रहे थे।"


इसी के बाद प्रभु और उनकी पत्नी ब्रिंध विजयकुमार ने मिलकर तन्वी फूड्स लॉन्च किया। यह कंपनी केवल पेय पदार्थों पर केंद्रित थी। 2016 में इसने दो जूस- आम और सेब के फ्लेवर्स में लॉन्च किए, जिसकी कीमत 10 रुपये थी।


इसके बाद से इन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2018 में कंपनी का नाम TABP स्नैक्स एंड बेवरेजेस में परिवर्तित हो गया। TABP ग्रामीण बाजारों की मांग को ध्यान में रखकर 200 मिलीलीटर के वेबरेज ड्रिंक्स बेचती है। इसके लक्षित समूह में वे दिहाड़ी मजदूर शामिल हैं, जिनका रोजाना की कमाई 250 से 300 रुपये है।


हाल ही में, ए राउंड के प्री-सीरीज में 6 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस राउंड में सबसे अधिक निवेश प्रोभुस वेंचर्स ने किया। साथ ही चांद फैमिली ऑफिस युक्ती, एलएलपी सहित और भी कई एजेंल इनवेस्टर्स ने निवेश किया। 

बड़ी आबादी को ध्यान में रख उत्पाद बनाना

प्रभु ने बताया कि सिर्फ 10 रुपये में गुणवत्ता पूर्ण और स्वादिष्ट पेय पदार्थ बनाने के लिए भारी मात्रा में आरएंडडी की आवश्यकता होती है। उन्होंने अपने उत्पाद के लिए ग्रामीण आबादी से सीधे जुड़े लोगों की सलाह भी ली।


उन्होंने बताया, "हमारी मार्केट रिसर्च टीम के सबसे अहम सदस्यों में हमारे वितरक और सुपर स्टॉकर शामिल थे।" वह आगे कहते हैं कि वितरकों के साथ सीधे बातचीत से उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में अपने ग्राहकों की नब्ज को समझने में मदद मिली।


प्रभु को उनके वितरकों से जिस तरह की प्रतिक्रिया मिली, उससे उन्हें शुरूआती कुछ प्रोडक्ट लॉन्च करने में मदद मिली। इसमें प्लंज ब्रांड नाम से लॉन्च किए गए एप्पल और मैंगो जूस भी शामिल हैं।


उन्होंने बताया, "हमने वितरकों को नमूने दिए जिसे उन्होंने लोगों में वितरित किया और फिर प्रतिक्रियाओं के साथ हमारे पास आए। जैसे किस लोग सेब या आम के स्वाद में कार्बोनेटेड पेय चाहते हैं या फिर ड्रिंक्स किस हद तक मीठा होना चाहिए, आदि।"


ड्रिंक्स के मुख्य कंसंट्रेटर्स को कोयम्बटूर में स्थिति कंपनी की खुद की विनिर्माण इकाई में बनाया गया है। पूरे प्रोडक्ट को बनाने के लिए कंपनी ने कोयम्बटूर, पुड्डुचेरी, मैसूर, औरंगाबाद, आदि में थर्ड-पार्टी इकाइयों (टीपीयू) के साथ साझेदारी की है।


आज, TABP विभिन्न प्रकार के ड्रिक्स की बिक्री करती है। इसमें कोला, जीरा मसाला, पनीर सोडा आदि शामिल हैं। इन ड्रिंक्स को प्लंज और गल्प ब्रांज नेम के तहत बेचा जाता है। यह 'थर्स्टी आउल' नाम से एक गैर-एल्कोहल बियर भी बेचती है, जिसकी कीमत 50 रुपये है।


TABP वर्तमान में पांच राज्यों में उपलब्ध है, जिनमें तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। व्यापार शुरू होने के बाद से धीरे-धीरे बढ़ता रहा है। आज, यह करीब 1.2 लाख टचपॉइंट्स के जरिए अपने उत्पादों को बेचती है, इसमें स्थानीय बेकरियां, किराने, फेरीवाले आदि शामिल हैं। कंपनी का वितरण नेटवर्क 20,000 से अधिक का है।

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एक डेटा आधारित दृष्टिकोण

व्यावसायिक प्रौद्योगिकी का छोटे व्यवसायों पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। "शुरुआती वर्षों में, चूंकि हम सीमित संसाधनों पर काम कर रहे थे, इसलिए हमने अपना खुद का इन-हाउस क्लाउड-आधारित ईआरपी सिस्टम विकसित किया, जिसे पीपीपी जिनी कहा जाता है।" ब्रिन्धा एक इंजीनियर हैं। ऐसे में उन्होंने दूसरी नई तकनीकों को तैनात करने के साथ कंपनी के आईटी सिस्टम की देखभाल करने की जिम्मेदारी भी संभाली।


यह ईआरपी सिस्टम ऑर्डर लेने, डिमांड का विश्लेषण करने, टीपीयू को काम सौंपने, प्रोडक्शन डिस्पैच को ट्रैक करने आदि में मदद करता है।


इस सिस्टम ने महत्वपूर्ण आंकड़े को समेटने में भी मदद की है। उन्होंने बताया, "हमने पाया कि शादियों के सीजन के दौरान पेय पदार्थों की मांग काफी बढ़ जाती है।"


प्रभु और उनकी टीम ने इस डेटा को ध्यान में रखते हुए आंध्र प्रदेश और उड़ीसा में कैटरर्स तक पहुंचना शुरू कर दिया, और उन्हें शादियों के मौसम के दौरान अपनी तीन लीटर की बोतलें बेचनी शुरू कीं।


इससे कमाई का अतिरिक्त स्रोत पैदा करने में मदद मिली और कम बिक्री वाले सीजन की भरपाई करने में इससे मदद मिली।


कंपनी ने 'स्नैक्स 91' ब्रांड नाम के तहत स्नैक्स भी लॉन्च किए और इसका टैगलाइन रखा है, '91 भारत का अंतर्राष्ट्रीय डायल कोड है' उन्होंने बताया, "दक्षिण भारतीय बाजार में लोग स्वादिष्ट मसाला वाले कुछ नमकीन आइटम्स की तलाश में थे।" इसने हमें कई प्रकार के स्नैक्स को लॉन्च करने के लिए प्रेरित किया, जिसमें टैंगी टमाटर, फ्राइम्स पास्ता, मैजिक मसाला, चोको फ्लेक्स जैसे स्वाद शामिल हैं। सभी स्नैक आइटम की कीमत 5 रुपये प्रति 10 ग्राम है।


कंपनी का कारोबार पिछले 2 वर्षों में लगातार बढ़ा है। प्रभु ने आंकड़े बताए, उसके अनुसार, TABP की आमदनी वित्त वर्ष 2017 में 92 लाख थी, जो वित्त वर्ष 2021 में बढ़कर 35.5 करोड़ रुपये हो गई।

क्या है भविष्य की योजनाएं?

सभी व्यवसायों की तरह, प्रभु और उनकी टीम पर भी कोविड-19 का असर पड़ा और दूसरी लहर के दौरान भी यह जारी है। हालांकि इससे इनकी डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर मार्ग पर जाने की इच्छा कम नहीं हुई। डी2सी चैनल का मुख्य आकर्षण बाजरा आधारित उत्पाद लाइन होगा, जिसमें सेरेल्स, चोको फ्लैक्स, मूसली आदि शामिल हैं। TABP अमेजन जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया में है।


एक संस्थापक के रूप में, प्रभु स्नैक्स और ड्रिंक्स बाजार की क्षमता के बारे में आश्वस्त हैं। मोर्डोर इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का फूड और पेय पैकेजिंग बाजार का मूल्य 2020 में 33.22 बिलियन डॉलर था, और 29.88 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी के साथ 2026 तक इसके 156.25 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।


कंपनी ने इम्यूनिटी ड्रिंक, ग्रीन टी, और एनर्जी ड्रिंक सहित उत्पादों की एक नई लाइन शुरू करने की योजना बनाई है, जिनकी कीमत औसतन 15 रुपये से 20 रुपये प्रति 200 मिलीलीटर होगी।


प्रभु ने बताया कि उनकी योजना गोवा और महाराष्ट्र तक विस्तार करने की भी है।

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