5 महीनों के निचले स्तर पर पहुंची महंगाई, जानिए सरकार और RBI ने इसके लिए बनाया था क्या प्लान!

By Anuj Maurya
August 16, 2022, Updated on : Tue Aug 16 2022 10:42:31 GMT+0000
5 महीनों के निचले स्तर पर पहुंची महंगाई, जानिए सरकार और RBI ने इसके लिए बनाया था क्या प्लान!
मोदी सरकार ने कई चीजों का निर्यात रोका, वहीं रिजर्व बैंक ने 3 बार रेपो रेट बढ़ाया, तब जाकर महंगाई से थोड़ी राहत मिली है.
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कई महीनों से महंगाई (Inflation) की खबरें हर किसी को टेंशन दे रही थीं. इसी बीच एक राहत देने वाली खबर आई है. जुलाई में देश में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation Rate) घटकर 6.71 फीसदी हो गई है. इससे पहले जून में रिटेल इंफ्लेशन 7.01 फीसदी पर था. जुलाई महीने में थोक महंगाई (Wholesale Inflation) में भी राहत मिली है और यह 13.93 फीसदी हो गई है. जून के महीने में यह 15.18 फीसदी थी, जबकि मई में थोक महंगाई 16.63 फीसदी रही. बता दें कि खुदरा महंगाई दर और थोक महंगाई दर पिछले 5 महीनों के न्यूनतम स्तर पर है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस गिरावट की वजह है खाने की चीजों की कीमतों में आई कमी. तो क्या सरकार और निर्मला सीतारमण के प्लान ने अपना काम कर दिया है? क्या भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की कोशिशें रंग ला रही हैं?

कैसे रिजर्व बैंक महंगाई पर लगा रहा लगाम?

भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से महंगाई पर लगाम लगाने के लिए रेपो रेट में बढ़ोतरी की जा रही है. पिछले कुछ महीनों में भारतीय रिजर्व बैंक ने तीन बार रेपो रेट बढ़ाया है. पहली बार इसमें 0.40 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद रेपो रेट 4.4 फीसदी हो गया था. कुछ ही वक्त बाद फिर से 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी की गई और इसी महीने एक बार फिर यह दर 0.50 फीसदी बढ़ाई गई. तीन बार रेपो रेट बढ़ाए जाने के बाद अब ये दर 5.4 फीसदी हो गई है.

जानिए, रेपो रेट कैसे लगाता है महंगाई पर लगाम

जब रेपो में बढ़ोतरी की जाती है तो इससे बैंकों को मिलने वाला लोन महंगा हो जाता है. ऐसे में जब बैंक को ही महंगा लोन मिलता है तो वह ग्राहकों को दिए जाने वाले लोन को भी महंगा कर देते हैं. होम लोन और ऑटो लोन लंबी अवधि के होने की वजह से उन्हें फ्लोटर इंस्ट्रेस्ट रेट पर दिया जाता है. यह रेट रिजर्व बैंक की दर के बढ़ने-घटने के आधार पर बदलता रहता है. यही वजह है कि जैसे ही रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता है, होम लोन और कार लोन की ईएमआई पर सीधा असर होता है. हालांकि, इसका उन्हें फायदा होता है, जो लोग एफडी में पैसे लगाते हैं.


लोन को महंगा करने की सबसे बड़ी वजह होती है मार्केट में पैसों के सर्कुलेशन को कंट्रोल करना. लोन महंगा होने से लोग कम खर्च करने की कोशिश करते हैं. वहीं जिनकी पहले से ही होम लोन या ऑटो लोन ईएमआई चल रही होती हैं, उनका पहले की तुलना में अधिक पैसा खर्च होने लगता है. ऐसे में वह तमाम चीजों के लिए पैसे कम खर्च करते हैं और डिमांड घटती है, जिससे महंगाई पर काबू करने में आसानी होती है. वहीं एफडी पर अधिक ब्याज मिलने से भी बहुत से लोग अपने खर्चों को छोड़कर पैसे बचाने की कोशिश करते हैं, ताकि अधिक रिटर्न मिले. इन वजहों से मार्केट में पैसों का सर्कुलेशन घटता है.

सरकार महंगाई कम करने के लिए क्या कर रही है?

जब सरकार ने देखा कि गेहूं के भाव तेजी से बढ़ रहे हैं तो उस पर लगाम लगाने के लिए गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी. विदेशी बाजारों से अधिक कीमत मिलने की वजह से गेहूं के भाव घरेलू बाजार में भी काबू से बाहर होने लगे थे.


पिछले महीनों में ही सरकार ने डीजल-पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी. इसका नतीजा ये हुआ कि पेट्रोल-डीजल आम आदमी के लिए सस्ता हो गया. पेट्रोल महंगा होने से सिर्फ लोगों की निजी जिंदगी पर असर पड़ता है, लेकिन डीजल महंगा होने से महंगाई बढ़ जाती है. डीजल महंगा होता है तो सबसे पहले किसानों को अपने इक्विपमेंट चलाने में लगने वाले डीजल की अधिक कीमत चुकानी होती है, जिससे उन्हें खाने-पीने की चीजें महंगी बेचनी पड़ती हैं. वहीं ट्रकों में भी डीजल इस्तेमाल होता है, जिनसे अधिकतर सब्जी, फल और अनाज का ट्रांसपोर्टेशन किया जाता है. यानी उनकी ढुलाई भी महंगी हो जाती है, जिससे दाम और बढ़ जाते हैं.


खाने का तेल भी तेजी से महंगा होता जा रहा था, इसलिए सरकार ने उस पर भी एक्साइज ड्यूटी घटा दी. इसकी वजह से तेल की कीमतों में शानदार गिरावट देखने को मिली. बहुत सी कंपनियों ने तो खाने के तेल के दाम 10 रुपये प्रति लीटर तक घटा दिए. इस तरह आम आदमी के लिए खाने का तेल अधिक महंगा नहीं हुआ और उन्हें महंगाई से थोड़ी राहत मिली.


चीनी के भाव में भी सरकार के तेजी देखने को मिली, जिसके चलते सरकार ने उसके निर्यात को सीमित कर दिया, ताकि महंगाई काबू में आए. सरकार इसी तरह आयात-निर्यात और एक्साइज ड्यूटी से जुड़े फैसलों के चलते महंगाई पर लगाम लगाने की कोशिश करती है.