ऊबराइजेशन: 'गिग इकनॉमी' का बढ़ रहा चलन, घर बैठे कर सकेंगे काम

By Manshes Kumar
August 22, 2017, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:16:30 GMT+0000
ऊबराइजेशन: 'गिग इकनॉमी' का बढ़ रहा चलन, घर बैठे कर सकेंगे काम
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'ऊबराइजेशन', एक नया सूत्रवाक्य है जो एक दशक में रोजगार का पूरा परिदृश्य बदल सकता है। कार्यबल का 'ऊबराइजेशन' या गिग इकॉनमी का मतलब एक ऐसे सिस्टम से हैं, जिसमें टैलंट डिमांड और सप्लाई के आधार पर काम करता है।

फोटो साभार: the balance

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इन्फोसिस और विप्रो जैसी कंपनियां 'कार्यबल के ऊबराइजेशन' के विचार में संभावनाएं तलाश रही हैं, जिसमें स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों का मिश्रण होगा। 

जिस तरह से लोग डिमांड कार के साथ सफर साझा करने में सहज हो गए हैं, नियोक्ता ऐसे कामों के लिए जिन्हें रेग्युलर स्टाफ पूरा नहीं कर सकते हैं, ऑन डिमांड वर्कफोर्स हायर करेंगे।

इन दिनों प्राइवेट आईटी कंपनियों और खासकर नए-नए स्टार्टअप्स में घर से काम करने का चलन बढ़ रहा है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कर्मचारी का आने-जाने में लगने वाला समय बचता है। विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि आने वाले कुछ सालों में घर से ही ऑफिस का काम करने में तेजी आएगी। दरअसल दुनियाभर के नियोक्ता एक नए बिजनस मॉडल पर काम कर रहे हैं, जिसे ऊबर ने लोकप्रिय बनाया है। कार्यबल का 'ऊबराइजेशन', एक नया सूत्रवाक्य है जो एक दशक में रोजगार का पूरा परिदृश्य बदल सकता है। कार्यबल का 'ऊबराइजेशन' या गिग इकॉनमी का मतलब एक ऐसे सिस्टम से हैं, जिसमें टैलंट डिमांड और सप्लाई के आधार पर काम करता है।

'ऊबराइजेशन' या 'गिग इकनॉमी' एक ही बात है। भारत में इन्फ़र्मेशन टेक्नॉलजी (IT) सेक्टर 'गिग इकनॉमी' को सबसे पहले अपना सकता है। मार्केट की अनिश्चितता के बीच, IT सेक्टर में बड़ी संख्या में काम करने वाले युवा इसके पीछे कारण हो सकते हैं। युवा वर्कर्स की संख्या बढ़ रही है और इनकी प्राथमिकताएं पिछले जेनरेशन के कामगारों से अलग हैं। इन्फोसिस और विप्रो जैसी कंपनियां 'कार्यबल के ऊबराइजेशन' के विचार में संभावनाएं तलाश रही हैं, जिसमें स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों का मिश्रण होगा। इन्फोसिस के एचआर हेड रिचर्ड लोबो कहते हैं, 'कार्यबल में अधिकतर जेननेक्स्ट के आगमन से, कर्मचारियों को व्यस्त और प्रोत्साहित रखने वाली पुरानी धारणाएं टूट रही हैं।'

इकनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, 'जिस तरह से लोग डिमांड कार के साथ सफर साझा करने में सहज हो गए हैं, नियोक्ता ऐसे कामों के लिए जिन्हें रेग्युलर स्टाफ पूरा नहीं कर सकते हैं, ऑन डिमांड वर्कफोर्स हायर करेंगे।' पिछले साल जब विप्रो ने अमेरिका बेस्ड IT कंस्लटिंग फर्म अपिरियो का अधिग्रहण किया तब सीईओ अबिदाली नीमचवाला ने ET से कहा था, 'हम विश्वास करते हैं कि IT इंडस्ट्री में काम का भविष्य काफी हद तक 'ऊबराइज्ड' है।'

'वर्कफोर्स का ऊबराइजेशन' अमेरिका में काफी लोकप्रिय हो चुका है। एक सर्वे के मुताबिक, अमेरिका में अगले 4 सालों में ऑन डिमांड कर्मचारियों की संख्या दोगुने बढ़त के साथ 92 लाख हो जाएगी। टीमलीज सर्वे के मुताबिक, IT अभी गिग वर्कर्स (टेंपररी, फ़्लेक्सिबल) को हायर करने वाले टॉप 5 सेक्टर्स में नहीं है। भारत में सबसे अधिक गिग वर्कर हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में रखे जा रहे हैं। इसके बाद एजुकेशनल सर्विसेज, मीडिया और ऐंटरटेनमेंट का स्थान आता है।

लोबो के मुताबिक हम ऐसे कार्यबल के साथ डील कर रहे हैं जिनमें फुल टाइम और प्रार्ट टाइम वाले कर्मचारी एक साथ काम करते हैं, लेकिन उनकी आवश्यकताएं पूरी तरह अलग हैं। इस सूची में पांचवा स्थान कॉमर्स और स्टार्टअप्स का है। वर्कर्स की प्राथमिकता के अलावा कंपनियां लागत में कमी के लिए भी गिग वर्कर्स को चुन रही हैं। टीमलीज के मुताबिक भारत में इस समय करीब 25 लाख कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स हैं और यह संख्या अगले दशक तक 60 लाख हो सकती है। 

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