IIT से पढ़े 2 दोस्तों ने बनाया एडटेक स्टार्टअप, बच्चों को एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज से जोड़ने में कर रहा है मदद

KidEx बच्चों को ऑनलाइन माध्यम के जरिए अलग-अलग तरीके के एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज और हॉबी में भाग लेना में मदद करती है। इस स्टार्टअप को 2020 में गुरुग्राम से शुरू किया गया था।

IIT से पढ़े 2 दोस्तों ने बनाया एडटेक स्टार्टअप, बच्चों को एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज से जोड़ने में कर रहा है मदद

Tuesday June 15, 2021,

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महामारी के कारण बच्चे पिछले एक साल से भी अधिक समय से अपने घरों के अंदर है। इसके चलते उनका बाहरी दुनिया से संपर्क और पार्कों/मैदानों में जाकर खेलना भी कम हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आउटडोर गेम बच्चे के समग्र विकास और सीखने के लिए अहम है। साथ ही विभिन्न प्रकार की प्रतिभाओं को उनके प्रारंभिक विकास के लिए सम्मानित और प्रोत्साहित करना भी महत्वपूर्ण है।


बच्चों को जीवन के शुरुआती चरण में उनकी प्रतिभा के कई पहलुओं का अनुभव मिले, इसे सुनिश्चित करने के लिए आईआईटी खड़गपुर के दोस्तों अमृतांशु कुमार और कपिश सराफ ने मार्च 2020 में गुरुग्राम में एक एडटेक स्टार्टअप KidEx की स्थापना की।


KidEx एक डेटा-संचालित डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो बच्चों के समग्र विकास को सक्षम करने के लिए क्लासेज और कॉम्पिटीशन आयोजित करता है। जैसे- एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज, को-करिकुलर एक्टिविटीज और जीवन कौशल आदि।


अमृतांशु बताते हैं, अब तक 1,000 से अधिक स्कूल और 50,000 बच्चे उनके प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। स्टार्टअप सालाना आधार पर 200 प्रतिशत की ग्रोथ का दावा करता है।

सांकेतिक चित्र (फोटो साभार: unsplash.com)

सांकेतिक चित्र (फोटो साभार: unsplash.com)

इसी सेगमेंट में क्यों?

दोनों सह-संस्थापक आईआईटी खड़गपुर में बैचमेट थे और बाद में यह आईआईएम कलकत्ता में भी बैचमेट और विंगमेट बन गए।


कपीश कहते हैं, "हमने महसूस किया कि एक गला-काट प्रतियोगिता चल रही है था और इसके चलते बहुत कम उम्र से ही बच्चे हर चीज छोड़कर पढ़ाई से जुड़े करियर को चुन रहे हैं या उन्हें ऐसा करने का निर्देश दिया जा रहा है।"


कपीश कहते हैं, "2019 में कहीं न कहीं, कई बातचीत के दौरान, हमने महसूस किया कि यही समय सही है और हमने इसमें उतरने का फैसला किया।"


दोनों सह-संस्थापकों के पास बीसीजी और ब्लैकरॉक जैसी कंपनियों में काम करने का अनुभव है। ऐसे में वे शुरुआत में अपने सहयोगियों और बॉस का समर्थन हासिल करने में सक्षम थे।


अमृतांशु ने YourStory को बताया, "आज KidEx एक 100 सदस्यों वाला संगठन है, जिसमें अध्यापन, असेसमेंट्स, मार्केटिंग, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स आदि जैसे विभागों में काम करने वाले पूर्णकालिक कर्मचारी और फ्रीलांसर दोनों हैं।"

यह कैसे काम करता है?

माता-पिता अपने बच्चों को को-करिकुलर क्लास के लिए या फिर राष्ट्रीय ऑल राउंडर चैम्पियनशिप के लिए प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर कर सकते हैं। बच्चे के समग्र विकास की जरूरतों के बारे में KidEx टीम की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए, वे हर तीन से छह महीने में बच्चे को नई गतिविधियों से परिचित करा सकते हैं।


स्टार्टअप बच्चों को विकास के विभिन्न पहलुओं जैसे स्टॉप मोशन वीडियो बनाने, साइन लैंग्वेज सीखने, कराटे, शब्दावली में सुधार करने, बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) में सुधार करने में मदद करता है। कक्षाएं अनुकूलित समूह आकारों में आयोजित की जाती हैं।


टीम बच्चों को प्रासंगिक कौशल सिखाने के लिए गेम से जुड़े टूल भी मुहैया करती है। चूंकि अभी महामारी फैली है, ऐसे में टीम किसी बच्चे को बाहर जाकर खेल खेलने के लिए नहीं कह सकती है। इसलिए, स्टार्टअप ने बच्चों के अंदर मौजूद कौशल को बढ़ावा देने के लिए नई एक्टिविटीज बनाई हैं। इसने स्कूलों के साथ उनका वर्चुअल एक्स्ट्रा करिकुलर डिपार्टमेंट भी बनाया है।


कपीश कहते हैं, "KidEx ने पूरे भारत में 1,000 से अधिक स्कूलों का एक समूह बनाया है और छह साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए इंट्रा-स्कूल टूर्नामेंट आयोजित करने के साथ-साथ ऑनलाइन कक्षाएं भी आयोजित कर रहा है।"


कपीश कहते हैं, “हमारे सहयोगी स्कूलों का कहना है कि प्लेटफॉर्म ने उन्हें छात्रों को कम से कम लागत पर अधिकतम गुणवत्ता ऑफर करने में मदद की है। हमें 200 से अधिक स्कूलों की तरफ से उनके छात्रों के निरंतर समग्र विकास के लिए आधिकारिक भागीदार बनने का अनुरोध मिला है।”

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वह बताते हैं कि KidEx जिस समस्या को हल कर रहा है, वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की तर्ज पर बच्चों के समग्र विकास को सक्षम करना है। उनका कहना है कि उन्होंने लगातार 85 प्रतिशत का शुद्ध प्रमोटर स्कोर बनाए रखा है।


जून 2020 में, KidEx ने नेशनल ऑल राउंडर चैंपियनशिप (अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग के सहयोग से आयोजित एक द्वि-वार्षिक कार्यक्रम) का पहला संस्करण आयोजित किया। यह खेल के तरीके से बच्चों के लिए स्व-शिक्षण और निरंतर सुधार को बढ़ावा देने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम था। प्लेटफॉर्म का दावा है कि उसे 1,000 से अधिक प्रतिभागियों के माता-पिता से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी।

चुनौतियां

स्टार्टअप के लिए मुख्य चुनौती ग्राहकों तक पहुंचना और उनका ध्यान आकर्षित करना रहा है।कपीश कहते हैं, एडटेक कंपनियों की मार्केटिंग और बिक्री टीमों ने ग्राहकों पर ताबड़तोड़ विज्ञापनों की एक तरह से बमबारी कर दी है, जिसके चलते माता-पिता पर महामारी के बीच एक मनोवैज्ञानिक दबाव बना है। उनका कहना है कि उनका पूरा ध्यान आकर्षित करना और उत्पाद की खासियत की सराहना करने में उनकी मदद करना एक चुनौतीपूर्ण काम रहा है।


वह कहते हैं, "कई चरणों में, हमने बहुत प्रारंभिक स्तर पर ही समस्याओं को हल करने के लिए चुना, क्योंकि एडटेक के लिए क्योंकि ग्राहक अनुभव सबसे अहम है। इसका स्पष्ट रूप से विकास की गति पर प्रभाव पड़ता है।"


कपीश कहते हैं, "पूरी टीम द्वारा किए गए काम के चलते, हमने साल-दर-साल 200 प्रतिशत की ग्रोथ जारी रखा हैं।"

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बाजार और भविष्य

अमृतांशु कहते हैं, "हम 25-30 लाख डॉलर के वार्षिक जीएमवी में बढ़े हैं, जिसका अर्थ है कि प्लेटफॉर्म पर छात्रों की तरफ से सीखने के लिए साल भर में 2.5 करोड़ मिनट समय बिताया जा रहा है।"


रेडसीर के एक अनुमान के मुताबिक 2022 तक ऑनलाइन K-12 एजुकेशन सेगमेंट 6.3 प्रतिशत बढ़ेगा और इसका बाजार 1.7 अरब डॉलर हो जाएगा। स्टेटिस्टा के अनुसार, 2019 में वैश्विक ई-लर्निंग बाजार 101 अरब डॉलर का था। 2026 तक, बाजार तेजी से बढ़ने के साथ 370 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।


सिकोइया इंडिया कैपिटल के निवेश वाली केवाईटी और मैट्रिक्स इंडिया पार्टनर्स के निवेश वाली Crejo.Fun जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भारत में एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज पर फोकस बढ़ रहा है।


स्टार्टअप के कई राजस्व मॉडल हैं, लेकिन इसके राजस्व का मुख्य स्रोत दी जाने वाली सेवाओं, यानी कक्षाओं और प्रतियोगिताओं के बदले में लिया जाने वाला शुल्क है।


प्रोडक्ट और सीखने के कार्यक्रम के आधार पर इसकी कीमत 300 रुपये से 3,000 रुपये प्रति माह तक अलग-अलग होती हैं। प्रोडक्ट सभी आय स्तरों वाले माता-पिता के लिए सुलभ हो, स्टार्टअप यह सुनिश्चित करने के लिए कई मूल्य निर्धारण मॉडल को अपनाया है।


कंपनी के लगभग 53 प्रतिशत ग्राहक टियर II और III शहरों से है, जबकि 47 प्रतिशत टियर I शहरों से हैं, जिससे यह एक अखिल भारतीय प्लेटफॉर्म बन गया है।


भविष्य के बारे में बोलते हुए अमृतांशु कहते हैं, "अब तक, हम प्रोडक्ट को अच्छा करने और अपने अंतिम यूजर्स, यानी बच्चों, माता-पिता और स्कूलों की आवश्यकताओं को समझने पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे।"


वह कहते हैं, “अगले तीन से चार महीनों के लिए हमारा ध्यान ग्राहकों के लिए एंड-टू-एंड अनुभव को डिजिटल बनाने और फिर भारत में एक लाख से अधिक स्कूलों को इस नेटवर्क से जोड़ने पर है। ताकि अगले 12 से 18 में महीनों 1 करोड़ से अधिक बच्चों का नेटवर्क तैयार हो सके। इसके साथ ही ग्राहक एनपीएस को 85 प्रतिशत पर बनाए रखने का लक्ष्य है।"


Edited by Ranjana Tripathi