FabIndia का कूड़े को खजाने में बदलने का अनोखा प्रयास

By रविकांत पारीक
July 15, 2022, Updated on : Fri Jul 15 2022 07:40:15 GMT+0000
FabIndia का कूड़े को खजाने में बदलने का अनोखा प्रयास
फैबइंडिया ग्रुप के पास पूरे भारत में लगभग 50,000 कारीगरों, 12,000 किसानों और 900 विक्रेताओं का नेटवर्क है.
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भारत में हर दिन 100,000 मेट्रिक टन से अधिक कचरा पैदा होता है, कचरे का प्रबंधन देश की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है. लैंडफिल को उसकी अंतिम सीमा तक बढ़ाया जा रहा है, और लगातार बढ़ता कचरा मिट्टी और भूजल जैसे प्राकृतिक संसाधनों को दूषित कर रहा है. जहां उद्योग और नीतिगत स्तर पर सुधार शुरू किए जा रहे हैं, वहीं कारोबारियों ने भी जागरुकता की अलख जगाई है.


रिटेल ब्रांड, Fabindiaके कालीन और आउटडोर कुर्सियों का ‘शून्य' (Shunya) कलेक्शन रिसाइकल किए गए पीईटी (पॉलीइथाइलीन टेरेफेथलेट) यार्न से बना है जिसे सिंगल-यूज़ वाली प्लास्टिक की बोतलों से तैयार किया गया है. 2020 में लॉन्च किए गए कलेक्शन का टाइटल ‘शून्य' है, जिसका अर्थ है 'शून्य, जो शून्य अपशिष्ट' को दर्शाता है.


पर्यावरण के अनुकूल और 120*180 सेमी माप के एक जीआरएस (ग्लोबल रिसाइकल्ड स्टैंडर्ड)-प्रमाणित कालीन को तैयार करने में लगभग 260 से 300 प्लास्टिक की बोतलें लगती हैं. इसके अलावा, प्रत्येक कालीन की बिक्री से प्राप्त राशि में से 100 रुपये दिल्ली स्थित एक एनजीओ को दान किए जाते हैं, जिसका नाम चिंतन (Chintan) है. यह एनजीओ कचरा चुनने वालों के उत्थान के लिए काम करता है. अब तक फाउंडेशन को 55000 रुपये दान किए जा चुके हैं.


कंपनी ने 'नियामा' (Niyama) के नाम से अगरबत्तियों (incense sticks) की रेंज भी लॉन्च की है जिन्हें उत्तर प्रदेश के मंदिरों से इकट्ठा किए गए फूलों से तैयार किया गया है. रोजाना लगभग 8.4 टन फूलों का कचरा इकठ्ठा करने के लिए फैबइंडिया ने एक बायोमटिरियल स्टार्टअप, फूल इंडिया (Phool India) के साथ साझेदारी की है. इस कचरे से विभिन्न प्रकार की सुगंधों में चारकोल मुक्त, जैविक धूप तैयार करने के लिए ‘फ्लावरसाइकलिंग' (Flowercycling) तकनीक का उपयोग किया जाता है. ये रिसाइकल्ड धूप पुष्प सुगंध वाली अगरबत्तियाँ फैबइंडिया के रिटेल स्टोर और ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर उपलब्ध हैं.


गुदरी (Gudri) एक और तकनीक है जिसमें दर्जी और कपड़ा कारखानों के बेकार कपड़ों पर पैबंद लगाया जाता है. हटा दिए गये, बचे और अप्रयुक्त कपड़े के टुकड़ों की सिलाई की जाती है और रनिंग स्टिच से उन्हें अलंकृत किया जाता है. यह कपड़ा मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात से प्राप्त होता है.


एक मूल्य वर्धित अपशिष्ट प्रबंधन प्रयास होने के अलावा, इस तरह की पहल ने कई समुदायों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं.


आपको बता दें कि फैबइंडिया ग्रुप के पास पूरे भारत में लगभग 50,000 कारीगरों, 12,000 किसानों और 900 विक्रेताओं का नेटवर्क है. कंपनी का व्यवसाय डिजाइन द्वारा स्थिरता पर केंद्रित है और इसने ऐसे विभिन्न समुदायों को शामिल करने के मॉडल के माध्यम से विभेदित आपूर्ति-पक्ष समुदाय बनाने की कोशिश की है, जो यह प्रदर्शित करते हैं कि सामान्य उद्देश्य और संरेखित मूल्य किस तरह से न्यायसंगत और समावेशी विकास और प्रभाव ला सकते हैं.