बेजुबानो को दिया माँ जैसा प्यार- प्रीती नारायणन

    By Priyanka Paruthi
    November 24, 2015, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:19:24 GMT+0000
    बेजुबानो को दिया माँ जैसा प्यार- प्रीती नारायणन
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    जानवर को जानवर ना समझ्ने वाली प्रीती नारायणन ने इन्हे अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बना लिया. कुत्तों के प्रति अपना असीम प्यार दिखाने वाली प्रीती ने अपने नजरिये से लोगो का नजरिया बदल दिया. इनके लिए कुछ कर गुजरने का होसला रख्ने वाली प्रीती ने अपनी सात साल की उम्र से अपना सारा जीवन इनकी सेवा में लगाने का निर्णय कर लिया था. उन्हें अच्छी तरह याद है की एक दिन जब वह स्कूल से वापिस आते समय एक गोल्डन रिट्रीवर नस्ल के एक कुत्ते को अपने साथ अपने घर ले आई थी और उनकी माँ ने उसि समय उन्हें बता दिया था की उस्की सारी ज़िम्मेदारी प्रीती की ही होगी. तब प्रीती ने उनकी ज़िम्मेदारी निभाते हुए उसे माँ जैसा प्यार दिया और उसके रहने के लिए एक छोटा सा आशियाना भी दे दिया. अपने आप को खुश नसीब बताने वाली प्रीती के परिवार ने उनका हर मोड़ पर साथ दिया. जानवरों का दुःख दर्द समझ्ने वाली प्रीती ने इनकी देखभाल को अपनी ज़िम्मेदारी बना लिया.

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    पढ़ाई खत्म करने के बाद इन्होने आठ साल कॉरपोरेट फील्ड में काम किया लेकिन यह काम उनके लिए सिर्फ काम ही था उनकी मंज़िल नहीं. उनकी मंज़िल को तो कुछ और ही मन्जूर था. कहते हैं जहाँ चाह वहां राह और फिर इनकी ज़िन्दगी ने कुछ ऐसा मोड़ लिया जहाँ वह अपनी आदर्श गीता सुरेन्द्रन गोल्डन रिट्रीवर ब्रीडर से जा मिली जिनसे उन्हें पता चला की वह अपने सपनों को सच में साकार कर सकती हैं और अपने इस जूनून को अपनी व्यवसाय बना सकती हैं. हालाँकि यह निर्णय उनके लिए इतना सरल नहीं था की वह अपने बने बनाये व्यवसाय को छोड़कर एक नई दिशा की ओर कदम बड़ा सकें लेकिन उनके जोश और हिम्मत ने इस कठिन निर्णय को सरल बना दिया और वह अपनी मन्जिल की और रुख्सत हो गई.

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    सैली नाम का कुत्ता जो उन्हें उनकी आदर्श ने उनकी शादी के तोह्फे के रूप मे दिया था बस वाही काफी था उन्हें अपनी मन्चाह मंज़िल की तरफ बढ़ने के लिए ओर वह कुछ समय के लिए इस भीड़ भाड़ वाली ज़िन्दगी से दूर चली गयी. इनकी ज़िन्दगी का सफर यही खत्म नहीं हुआ बल्कि वह इन्हे इनके अगले पड़ाव पशु चिकित्सक की ओर खीच ले गयी जहाँ उन्होंने कुत्तो के स्वास्थ्य से स्म्भन्दित जानकारी प्राप्त की ओर आज वे सेस्सना में आपरेशन से पहले व् बाद की प्रक्रिया को खूबी से संभल रही हैं. आज वे अपने केंद्र में १४ कुत्तों को एक माँ की तरह प्यार दे रही हैं ओर जब कोई उन कुत्तों के अंगीकरण के लिए आते हैं तो उन्हें सोम्प्ने से पेह्ले उन्हें परख्ती ओर अच्छी तरह से समझ्ती हैं की वह उन्हें सँभालने एवं उन्की देख भाल क़रने के लिए कितने काबिल हैं.

    प्रीती ने अपने बच्चो से भी बढ़कर जानवरों को प्यार दिया ओर आज वह हम सभी युवा पीरी के लिए एकमिसाल बन चुकी हैं.

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