Flipkart ने LGBTQIA+ समुदाय के लिए 'प्राइड मंथ' में उठाए ये अहम कदम

आमतौर पर, LGBTQIA+ समुदाय को अपने कार्यस्‍थलों पर काफी भेदभाव का सामना करना पड़ता है. इन पहलुओं की ओर ध्‍यान देने की जरूरत है और फ्लिपकार्ट ने ऐसा न हो यह सुनिश्चित करने के लिए अपने स्‍तर पर कई उपायों की पहल की है.

कोई भी ऐसा संगठन जो अपने कारोबार को वैश्विक स्‍तर पर पहचान दिलाना चाहता है, उसे प्रतिभावान पेशेवरों की जरूरत होती है, जो उसकी सोच को साकार कर सकें. LGBTQIA+ समुदाय में ऐसे कई प्रतिभाशाली पेशेवर हैं जो अपने-अपने चुनींदा प्रोफेशनल क्षेत्रों में शानदार असर छोड़ने की कुव्‍वत रखते हैं. इसलिए किसी भी बिज़नेस के लिए यह जरूरी है कि वह ऐसा वातावरण तैयार करे, जिसमें इस समुदाय के लोग न सिर्फ अपनी सही जगह तलाश सकें, बल्कि सुरक्षित रहते हुए और आगे बढ़ सकें.

Flipkartफ्लिपकार्ट ने हमेशा से ही समावेशी रुख रखा है और सभी को साथ लेकर चलने का मंत्र इसकी वर्क कल्‍चर का मजबूत आधार स्‍तंभ है. भारत के स्‍वदेशी ई-कॉमर्स मार्केटप्‍लेस के रूप में, फ्लिपकार्ट ने ऐसा माहौल तैयार करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है, जो हरेक का खुली बांहों से स्‍वागत करता है.

आमतौर पर, LGBTQIA+ समुदाय को अपने कार्यस्‍थलों पर काफी भेदभाव का सामना करना पड़ता है. इन पहलुओं की ओर ध्‍यान देने की जरूरत है और फ्लिपकार्ट ने ऐसा न हो यह सुनिश्चित करने के लिए अपने स्‍तर पर कई उपायों की पहल की है.

इसके अंतर्गत, फ्लिपकार्ट समय-समय पर अपने लीडर्स, पीपल मैनेजर्स और कर्मचारियों के लिए सेंसीटाइज़ेशन सेशंस आयोजित करता है, ताकि उन्‍हें LGBTQIA+ समुदाय से जुड़े कई महत्‍वपूर्ण विषयों के बारे में जागरूक बनाया जा सके और साथ ही, उनके मामलों में संवेदनशीलता जगायी जा सके. फ्लिपकार्ट ने LGBTQIA+ सदस्‍यों को परस्‍पर संपर्क में रहने के लिए एक कम्‍युनिटी भी तैयार की है, साथ ही, एक काउंसलिंग सुविधा भी शुरू की है जो उन्‍हें अपने मन के भावों को व्‍यक्‍त करने और अपना भावनात्‍मक पहलू और मजबूत बनाने में मदद करती है. फ्लिपकार्ट की डे-केयर सुविधा भी सभी कर्मचारियों के लिए है जिसमें 6 साल तक की उम्र के बच्‍चे आ सकते हैं, इसी तरह ‘पीरियड लीव पॉलिसी’ के तहत महिलाओं और ट्रांसजेंडर सदस्यों को मासिक धर्म के दौरान स्वतः स्वीकृत एक दिन की छुट्टी दी जाती है. इसके अलावा, फ्लेक्सबेन कार्यक्रम जैसी पहल यह सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन की गई है कि LGBTQIA+ जोड़ों को विपरीत लिंग वाले जोड़ों की तरह ही लाभ मिले.

चलते मासिक धर्म (मैन्‍स्‍ट्रुएशन) के दौरान, महिलाओं तथा ट्रांसजैंडर सदस्‍यों को एक दिन का अवकाश ऑटो-एप्रूव्‍ड आधार पर मिलता है. इसके अलावा, FlexBen प्रोग्राम जैसी पहल भी संगठन के स्‍तर पर की गई हैं जो यह सुनिश्चित करती है कि LGBTQIA+ कपल्‍स को भी उसी तरह के लाभ मिल सकें जैसे कि विपरीत सैक्‍स कपल्‍स को मिलते हैं.

इतना ही नहीं, फ्लिपकार्ट ने एडॉप्‍शन असिस्‍टैंस पॉलिसी भी शुरू की है जिसमें ‘प्राइमरी केयरगिवर’ और ‘सेकंडरी केयरगिवर’ का प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि अलग-अलग प्रकार की पारिवारिक संरचनाओं से आने वाले सभी कर्मचारियों का समावेशन हो सके. साथ ही, पार्टनर कर्मचारियों तथा एक वर्ष से अधिक आयु का बच्‍चा/बच्‍चे गोद लेने वाले सेकंडरी केयर गिवर्स के लिए पेड लीव्‍स बढ़ायी गई हैं. इन नीतियों के चलते, फ्लिपकार्ट का उद्देश्‍य अपने कार्यस्‍थलों पर ऐसा वातावरण तैयार करना है जिसमें प्रत्‍येक व्‍यक्ति खुद को महत्‍वपूर्ण समझ सके, जिसे सहयोग प्राप्‍त होता है और वह कंपनी के विकास में योगदान करने वाला साबित हो सके.

यह भी पढ़ें
फिनटेक अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए डिजिटल सेल्स चैनलों का कैसे लाभ उठा रहे हैं?