मोटू-पतलू ने TV पर पूरे किए 10 साल, 1969 में एक मैगजीन ने दुनिया को दिए थे ये किरदार

By Ritika Singh
October 16, 2022, Updated on : Sun Oct 16 2022 05:59:45 GMT+0000
मोटू-पतलू ने TV पर पूरे किए 10 साल, 1969 में एक मैगजीन ने दुनिया को दिए थे ये किरदार
मोटू-पतलू शो निकलोडियन के टॉप 5 शो में से एक है और यह चैनल की टोटल रेटिंग में 45 प्रतिशत का योगदान करता है.
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मोटू और पतलू...आज ये दोनों कार्टून कैरेक्टर किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. देश में बच्चा-बच्चा इन्हें जानता है. कभी कॉमिक्स के पन्नों में दिखने वाले मोटू और पतलू आज टीवी पर दिखाई देते हैं, मुश्किलों में फंसते हैं, बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी हंसाते-गुदगुदाते हैं और फिर जीत के साथ कहानी खत्म करते हैं. मोटू और पतलू टीवी सीरीज के टीवी पर आज 10 साल पूरे (10 Years of Motu-Patlu) हो चुके हैं. 16 अक्टूबर 2012 को पहली बार यह शो टीवी पर निकलोडियन चैनल (Nickelodeon) पर दिखा था.


मोटू-पतलू शो निकलोडियन के टॉप 5 शो में से एक है और यह चैनल की टोटल रेटिंग में 45 प्रतिशत का योगदान करता है. शो के पूरे भारत में 7 भाषाओं में 28.90 करोड़ व्यूअर हैं. लेकिन मोटू-पतलू की फैन फॉलोइंग केवल इसकी टीवी सीरीज की वजह से नहीं है, बल्कि इनके फैन्स तो उस वक्त से हैं जब ये दोनों कैरेक्टर मैगजीन और कॉमिक्स में दिखा करते थे. आइए जानते हैं कैसे अस्तित्व में आए थे ये दोनों दोस्त...

मायापुरी ग्रुप ने दिया था जन्म

मायापुरी ग्रुप की शुरुआत की नींव उस वक्त पड़ी थी, जब भारत का विभाजन नहीं हुआ था. एसएल बजाज नाम के शख्स ने लाहौर में 1882 में एक कैलेंडर प्रिंटिंग प्रेस लगाई. इस प्रेस का नाम अरोरबन्स कैलेंडर प्रिंटिंग प्रेस था. बाद में मैगजीन निकालना भी शुरू किया. सालों तक वह प्रेस वहां चली. उसके बाद 1947 में भारत को आजादी मिली लेकिन साथ में बंटवारा भी. बंटवारे के चलते बजाज परिवार लाहौर में अपना सब कुछ छोड़कर बॉर्डर के इस ओर आ गया और फिर से प्रिंटिंग प्रेस के माध्यम से खुद को स्थापित करने लगा. इस बार बिजनेस की अगुवाई कर रहे थे, एसएल बजाज के बेटे आनंद प्रकाश बजाज, जिन्हें एपी बजाज के नाम से भी जाना जाता है.

जेब में थे केवल 13 रुपये

लोटपोट और मायापुरी के चीफ एडिटर व ओनर प्रमोद कुमार बजाज (PK Bajaj) ने YourStory Hindi के साथ बातचीत में बताया कि उनके पिता एपी बजाज जब बंटवारे के बाद भारत आए उनके पास केवल 13 रुपये थे. परिवार पहले से मसूरी में था. घर की ज्वैलरी बेचकर दिल्ली में प्रिंटिंग प्रेस को शुरू किया. प्रेस, बच्चों के लिए 8 भाषाओं में अक्षर ज्ञान वाली किताबों को भी प्रिंट करती थी. 1967 में अरोरबन्स प्रेस का नाम मायापुरी पड़ा.

यूं शुरू हुई लोटपोट

एपी बजाज ने 1969 में द्विभाषी कॉमिक मैगजीन 'लोटपोट' (Lotpot) को शुरू किया. उनका मकसद बच्चों को चित्रकथाओं के माध्यम से मनोरंजन के साथ-साथ अच्छी सीख उपलब्ध कराना था. इसी लोटपोट मैगजीन से अस्तित्व में आए मोटू और पतलू. इतना ही नहीं इसी लोटपोट मैगजीन में कार्टूनिस्ट प्राण का चाचा चौधरी कार्टून कैरेक्टर भी सबसे पहले साल 1971 में दिखा था. लोटपोट में मोटू-पतलू, घसीटाराम, डॉ. झटका और अन्य सभी कैरेक्टर्स के ओरिजिनल क्रिएटर कृपा शंकर भारद्वाज थे. इस मैगजीन को शुरू करने में उनकी भी अहम भूमिका रही.


दरअसल कृपा शंकर भारद्वाज उस वक्त दीवाना तेज मैगजीन के लिए ग्राफिक्स डिजाइन किया करते थे. साथ ही अरोरबन्स प्रेस की बुक्स के लिए भी डिजाइनिंग किया करते थे. उनके और एपी बजाज के बीच संबंध दोस्ती-यारी वाले थे. पीके बजाज के मुताबिक, कृपा शंकर ने एक दिन, एपी से कहा कि मैगजीन शुरू करते हैं. पहले तो एपी ने मना किया लेकिन फिर मान गए और फैसला हुआ कि बच्चों की मैगजीन को शुरू किया जाएगा. उसके बाद टीम ने आपस में विचार विमर्श करके मोटू-पतलू के साथ-साथ प्रमुख सपोर्टिंग कैरेक्टर डॉ. झटका, घसीटाराम को फाइनल किया.

चल निकले दोनों कैरेक्टर

लोटपोट के प्रमुख किरदार मोटू-पतलू, स्टान लॉरेल और ओलिवर हार्डी पर बेस्ड हैं. मोटू-पतलू दोनों को बेस्ट फ्रेंड दिखाया गया है, जो आए दिन किसी न किसी परेशानी में फंसते हैं और फिर अपनी सूझबूझ व एक-दूसरे पर भरोसे के साथ, उनसे बाहर भी निकल आते हैं. यह पूरी सिचुएशन बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी गुदगुदाती है. डॉ. झटका डॉक्टर-कम-साइंटिस्ट है और घसीटाराम को हर काम में 20 साल का तजुर्बा है.


शुरुआत में लोटपोट में चाचा चौधरी और मोटू-पतलू दोनों ही दिखते थे. पहले तीन पेज पर चाचा चौधरी और बाकी 8 पेज पर मोटू-पतलू जाते थे. बाद में जब चाचा चौधरी की अलग कॉमिक्स आने लगीं तो लोटपोट में केवल मोट-पतलू रह गए. इन दोनों दोस्तों को बच्चों के बीच काफी लोकप्रियता मिली. लोटपोट कॉमिक्स हाथों-हाथ बिकती थी. शुरुआत में लोटपोट एक मासिक पत्रिका थी. प्रतिक्रिया अच्छी मिलती देख, इसके महीने में 2 एडिशन निकाले जाने लगे. उसके बाद 1974 से इसे साप्ताहिक आधार पर निकाला जाने लगा. आज मोटू-पतलू की कॉमिक्स का प्रिंट एडिशन फिलहाल के लिए बंद हो चुका है लेकिन डिजिटल एडिशन, ऑनलाइन मौजूद है. इस वक्त मोटू-पतलू की डिजाइनिंग हरमिंदर माकड़ जी देख रहे हैं.

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फिर आया एनिमेशन का दौर

साल दर साल बीतते गए और एनिमेशन का दौर आया. PK Bajaj ने बताया कि उनके पिता एपी बजाज ने समय रहते ही बदलते ट्रेंड को भांप लिया था. उन्होंने ही सलाह दी थी कि जल्द ही प्रिंटेड कॉमिक्स का दौर खत्म हो जाएगा, इसलिए एनिमेशन में कदम रखा जाना चाहिए. उनकी सलाह को मानते हुए और बदलाव को अपनाते हुए मायापुरी ग्रुप के एमडी व सीईओ अमन बजाज ने कार्टून एनिमेशन में अपने बिजनेस को उतारा और दूरदर्शन के लिए एनिमेटेड प्रोग्राम बनाए. इसके लिए 1990 के दशक में ग्रुप ने 20 एप्पल कंप्यूटर खरीदे.

अमन बजाज, पीके बजाज के बेटे हैं.

हर चैनल ने किया रिजेक्ट

पीके बजाज बताते हैं कि जब मोटू-पतलू की एनिमेटेड सीरीज को शुरू करने का फैसला किया गया तो कोई भी चैनल इसे टेलिकास्ट करने के लिए तैयार नहीं था. 2.30 मिनट के सैंपल को हर तरफ से रिजेक्शन मिल रहा था. हर चैनल विदेशी टून्स कैरेक्टर्स चाहता था, भारतीय कैरेक्टर्स में किसी को रुचि नहीं थी. उसी वक्त निकलोडियन चैनल नया-नया शुरू हुआ था. निक ने मोटू-पतलू में रुचि दिखाई और इसमें भारतीय व्यूअर्स की कितनी रुचि होगी, यह जानने के लिए सर्वे कराया. सर्वे से पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला और शुरुआत में 26 एपिसोड बनाकर टेलिकास्ट के लिए दिए गए. बस फिर क्या था, मोटू-पतलू सीरीज चल निकली और आज यह पॉपुलैरिटी बटोर रही है.

16 अक्टूबर 2012 को TV सीरीज लॉन्च

साल 2011 में ग्रुप ने लोटपोट ई-मैगजीन लेकर आया और फिर 16 अक्टूबर 2012 में ग्रुप ने निकलोडियन पर मोटू-पतलू की टीवी कार्टून सीरीज टेलिकास्ट करना शुरू किया. इस सीरीज का तो नाम ही मोटू-पतलू है. टीवी सीरीज में इनके साथ सपोर्टिंग कैरेक्टर- घसीटाराम, डॉ. झटका, इंस्पेक्टर चिंगम, बॉक्सर, चोर जॉन द डॉन और उसके दो चेले नंबर 1 और नंबर 2, चायवाला आदि को भी दर्शाया जाता है.


मोटू-पतलू टीवी सीरीज को नीरज विक्रम ने लिखा है. इससे पहले वह सोनपरी व शाका लाका बूम बूम जैसे पॉपुलर किड्स शो भी लिख चुके हैं. सीरीज को कॉस्मोज-माया स्टूडियोज और वायकॉम 18 ने प्रॉड्यूस किया है. सीरीज में पहले मोटू-पतलू को एक फिक्शनल टाउन 'फुरफुरी नगर' का निवासी दिखाया गया था. बाद में उन्हें एक अन्य फिक्शनल टाउन 'मॉडर्न सिटी' का निवासी बना दिया गया. शो का थीम सॉन्ग है 'मोटू और पतलू की जोड़ी', जिसे संदेश शांडिल्य ने कंपोज किया और सुखविंदर सिंह ने गाया.

मोटू और उसका समोसा प्रेम

टीवी सीरीज में मोटू को समोसा लवर दिखाया गया है. समोसा देखते ही उसकी आंखें चमक उठती हैं और वह इसकी खुशबू सूंघने के बाद उसके पीछे-पीछे हवा में उड़ता हुआ समोसे तक चला जाता है. मोटू का समोसा प्रेम इतना ज्यादा है कि कितना ही खा ले, समोसा देखकर उसकी भूख फिर से जाग उठती है. भूखे पेट मोटू के दिमाग की बत्ती नहीं जलती और समोसा खाने के बाद वह बड़े से बड़े भीमकाय पहलवान को भी चित कर देता है. इतना ही नहीं वह एक बार में अनगिनत समोसे खा सकता है. दूसरी तरफ पतलू है, जिसके दिमाग में झट से आइडिया आ जाते हैं. पतलू को समोसा कुछ खास पसंद नहीं है लेकिन उसे अखबार पढ़ना पसंद है. पतलू का दिमाग और मोटू की शारीरिक ताकत को एक-दूसरे का पूरक दिखाया गया है.

जागरुक भी कर रहे मोटू-पतलू

नागरिकों में कर अनुपालन को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए भी मोटू-पतलू कैरेक्टर्स की मदद ली जा रही है. मोटू-पतलू की 10 कॉमिक बुक्स को आयकर विभाग के साथ एसोसिएशन में निकाला गया है. इसके अलावा भारत में ऑस्ट्रियन एंबेसी के लिए 'मोटू-पतलू इन ऑस्ट्रिया' कॉमिक बुक्स को रिलीज किया गया. साल 2017 में मोटू पतलू शो को बेस्ट एनिमेशन शो अवॉर्ड मिला. इतना ही नहीं 2019 में दिल्ली में मैडम तुसाद म्यूजियम में मोटू-पतलू स्टैच्यूज का उद्घाटन किया गया.

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​एपी बजाज की तस्वीर के साथ पीके बजाज (बाएं) और अमन बजाज (दाएं) (Image Source: Mayapuri Group)

मायापुरी ग्रुप के अन्य बिजनेस व कुछ अहम उपलब्धियां

  • 1962 में बजाज परिवार ने पॉल्ट्री और डेयरी बिजनेस शुरू किए. वर्तमान में यह हरियाणा के गुरुग्राम में स्थित हैं.
  • 1974 में मायापुरी मैगजीन के साथ बॉलीवुड जर्नलिज्म में कदम रखा.
  • 1979 में पेपर मैन्युफैक्चरिंग व रिसाइक्लिंग यूनिट 'बजाज पेपर मिल्स प्राइवेट लिमिटेड' लगाई.
  • 1991 में मायापुरी ग्रुप, वीडियो प्रॉडक्शन में उतरा और दूरदर्शन पर फिक्शन और नॉन-फिक्शन कॉन्टेंट का प्रॉड्यूसर बना.
  • 1991 में ही दूसरी पेपर रिसाइक्लिंग यूनिट शुरू की.
  • 1999 में ग्रुप लश्कारा और ईटीसी पंजाबी के लिए ग्लोबल एयर्ड कॉन्टेंट का प्रमुख प्रॉड्यूसर बना.
  • 2011 में ग्रुप ने लोटपोट ई-मैगजीन और मायापुरी ई-मैगजीन लॉन्च कीं.
  • 2011 में ही मायापुरी यूट्यूब चैनल लॉन्च किया.
  • 2017 में शेख चिल्ली एंड फ्रेंड्स को डिस्कवरी किड्स चैनल पर शुरू किया गया.
  • 2017 में ही Mayapuri.com और Bollyy.com को लॉन्च किया गया.
  • 2019 में लोटपोट 2डी मोरल लेसन्स बेस्ड स्टोरीज को जी5 के साथ मिलकर रिलीज किया गया.
  • 2022 में लोटपोट ने आईपी बेस्ड गेम्स की पेशकश की.


मायापुरी ग्रुप अब तक 100 से ज्यादा टीवी शो और 15 से ज्यादा विज्ञापन बना चुका है. जी5 पर इसकी 150 से ज्यादा बाल कहानियां उपलब्ध हैं. इसके अलावा एनिमेटेड कैरेक्टर्स के 1100 से ज्यादा शो और 28 से ज्यादा एनिमेटेड मूवीज का निर्माण यह ग्रुप कर चुका है. मायापुरी ग्रुप की योजना 2022-23 में वर्चुअल ऑडियंस को मेटावर्स पर मायापुरी के करीब लाने की है.