Future Retail की दिवाला प्रक्रिया को मंजूरी, जानिए कैसे अर्श से फर्श पर आए किशोर बियानी

By Vishal Jaiswal
July 21, 2022, Updated on : Thu Jul 21 2022 16:03:44 GMT+0000
Future Retail की दिवाला प्रक्रिया को मंजूरी, जानिए कैसे अर्श से फर्श पर आए किशोर बियानी
फ्यूचर समूह की कंपनी फ्यूचर रिटेल लि. (एफआरएल) के खिलाफ दिवाला कार्रवाई शुरू करने की अपील बैंक ऑफ इंडिया ने की थी. बैंक ऑफ इंडिया की अपील को एनसीएलटी ने स्वीकार कर लिया है.
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देश में मॉडर्न रिटेल बाजार के फादर कहे जाने वाले कारोबारी किशोर बियानी (Kishor Biyani) के फ्यूचर समूह Future Group की कर्ज में डूबी एक कंपनी के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने दिवाला कार्रवाई को मंजूरी दे दी है.


फ्यूचर समूह की कंपनी फ्यूचर रिटेल लि. (FRL) के खिलाफ दिवाला कार्रवाई शुरू करने की अपील बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) ने की थी. बैंक ऑफ इंडिया की अपील को एनसीएलटी ने स्वीकार कर लिया है.


बैंक ऑफ इंडिया की अपील को स्वीकार करते हुए एनसीएलटी ने विजय कुमार अय्यर को एफआरएल का समाधान पेशेवर (आरपी) नियुक्त किया है.

क्यों दिवालिया हो रही फ्यूचर रिटेल

फ्यूचर रिटेल के दिवालिया होने के पीछे उसका दो दिग्गज कंपनियों मुकेश अंबानी की रिलायंस Reliance Industries और अमेरिकी कारोबारी जेफ बेजोज की अमेजन Amazon के बीच फंसना है.


अगस्त 2020 में फ्यूचर समूह ने रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) के साथ 24713 करोड़ रुपये के विलय समझौते की घोषणा की थी.


समझौते के तहत खुदरा, थोक, लॉजिस्टिक एवं भंडारण खंडों में सक्रिय फ्यूचर समूह की 19 कंपनियों का रिलायंस रिटेल अधिग्रहण करने वाली थी. आरआरवीएल, आरआईएल समूह के तहत सभी खुदरा कंपनियों की होल्डिंग कंपनी है. हालांकि, अब यह डील कैंसिल हो चुकी है क्योंकि फ्यूचर समूह के सिक्योर्ड लेंडर्स ने इसे नामंजूर कर दिया है.

अमेजन क्यों कर रहा सौदे का विरोध?

इस विलय समझौते की घोषणा के बाद से ही अमेजन इसका विरोध कर रही थी. विभिन्न अदालती मुकदमों में अमेजन ने यह कहते हुए इस सौदे का विरोध किया कि उसके साथ हुए फ्यूचर समूह के निवेश समझौते का यह करार उल्लंघन करता है.


दरअसल, ई-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अमेजन ने साल 2019 में एफआरएल की प्रवर्तक कंपनी फ्यूचर कूपन्स प्राइवेट लिमिटेड (एफसीपीएल) में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक निवेश करार किया था.


इसके आधार पर उसने भविष्य में फ्यूचर रिटेल को खरीदने की योजना तैयार की थी. लेकिन इस बीच फ्यूचर रिटेल ने रिलायंस के साथ सौदा कर लिया था.

क्यों कर्ज चुकाने में विफल रहा फ्यूचर समूह?

फ्यूचर रिटेल पर 29 लेंडर्स के एक कंसोर्टियम का 17,000 करोड़ रुपये का कर्ज है. वहीं फ्यूचर ग्रुप पर कुल कर्ज 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है.


रिलायंस के साथ सौदे से मिलने वाले पैसे से एफआरएल अपना कर्ज चुकाने चाहता था. हालांकि, अब रिलायंस के साथ सौदा खत्म होने के बाद एफआरएल ने बैंक ऑफ इंडिया के कर्ज के भुगतान में चूक कर दी. इसके बाद इस साल अप्रैल में बैंक एफआरएल के खिलाफ एनसीएलटी में गया था.


वहीं, 12 मई को अमेजन ने दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता की धारा 65 के तहत इस मामले में हस्तक्षेप की अपील दायर की थी.


अमेजन ने कंपनी के खिलाफ दिवाला कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा था कि बैंक ऑफ इंडिया और एफआरएल के बीच साठगांठ है. अमेजन ने कहा था कि अभी इस मामले में दिवाला कार्रवाई शुरू करना उसके अधिकारों के साथ ‘समझौता’ होगा.

किशोर बियानी ने 35 साल पहले शुरू किया था सफर

किशोर बियानी को भारत में आधुनिक रिटेल का फादर कहा जाता है. फ्यूचर ग्रुप की फ्यूचर रिटेल के माध्यम से रिटेल बिजनेस का एक पूरा साम्राज्य खड़ा किया.


किशोर बियानी का जन्म 1961 में मुंबई के एक कपड़ा व्यापारी के घर हुआ. बियानी ने 1980 के दशक में मुंबई में स्टोन वॉश डेनिम फैब्रिक को बेचने से अपना कारोबारी सफर शुरू किया था.


उसके बाद उन्होंने 1987 में Erstwhile Manz Wear नाम से रिटेल बिजनेस शुरू किया. बाद में Erstwhile Manz Wear का नाम बदलकर पैंटालून्स कर दिया गया. 1992 में पेंटालून को शेयर बाजार में लिस्ट किया.

2001 में खोला पहला बिग बाजार

फ्यूचर समूह ने 2001 में भारत में पहला बिग बाजार स्टोर खोला. बिग बाजार इतना तेजी से और इतना ज्यादा पॉपुलर हुआ कि 6 साल के अंदर पूरे भारत में इसके लगभग 100 स्टोर हो गए.


2007 में बियानी के फ्यूचर ग्रुप ने इंश्योरेंस सेक्टर में कदम रखा और फ्यूचर जनरल इंश्योरेंस को लॉन्च किया. उसी साल फ्यूचर कैपिटल भी अस्तित्व में आई, जो इक्विटी ब्रोकिंग सॉल्युशंस, वित्तीय उत्पाद, वेल्थ मैनेजमेंट सर्विसेज और रियल एस्टेट ब्रोकिंग की पेशकश करती है.

कैसे कर्ज में डूबे किशोर बियानी?

साल 2008 की आर्थिक मंदी का फ्यूचर रिटेल के कारोबार पर बहुत बुरा असर हुआ. फ्यूचर रिटेल के साथ फ्यूचर समूह पर कर्ज का बोझ बढ़ने लगा. रिटेल साम्राज्य का कर्ज कम करने के लिए किशोर बियानी को कई बार एसेट्स को डाइवेस्ट करना पड़ा.


बियानी को साल 2012 में पैंटालून्स चेन में अपनी अधिकांश हिस्सेदारी आदित्य बिड़ला नुवो को बेचनी पड़ी. उसी साल फिर से पैसा जुटाने के लिए बियानी ने फ्यूचर कैपिटल होल्डिंग्स में भी अधिकांश हिस्सेदारी अमेरिका की प्राइवेट इक्विटी Warburg Pincus को बेच दी.


साल 2013 में फ्यूचर लाइफस्टाइल फैशन लिमिटेड ने डिजायनर अनीता डोंगरे के स्वामित्व वाली AND और एथनिक वियर फर्म बीबा अपैरल्स में 450 करोड़ रुपये में माइनॉरिटी हिस्सेदारी की बिक्री की.


अगस्त 2019 में किशोर बियानी ने फ्यूचर कूपन्स में 49 फीसदी हिस्सेदारी Amazon.Com NV Investment Holdings LLC. को बेच दी. फ्यूचर रिटेल में फ्यूचर कूपन्स की हिस्सेदारी 7.3 फीसदी है.


किशोर बियानी के फ्यूचर ग्रुप पर वित्तीय संकट साल 2020 की शुरुआत में तब बढ़ा, जब उनकी लिस्टेड एंटिटी फ्यूचर रिटेल डेट रिपेमेंट में असफल हो गई और कर्जदाताओं ने शेयरों को गिरवीं रखने की बात कही.

इनसाइर ट्रेडिंग मामले में भी फंसे

फरवरी 2021 में मार्केट रेग्युलेटर सेबी (SEBI) ने किशोर बियानी और उनके भाई अनिल के खिलाफ फ्यूचर रिटेल के शेयरों में इनसाइर ट्रेडिंग (भेदिया कारोबार) जांच के बाद एक साल के लिए सिक्योरिटीज मार्केट में दाखिल होने पर रोक लगा.


सेबी ने दोनों भाइयों पर दो साल तक फ्यूचर रिटेल के शेयरों की ट्रेडिंग पर भी रोक लगाई थी. साथ ही फ्यूचर कॉरपोरेट रिसॉर्सेज और बियानी बंधुओं में से प्रत्येक पर एक-एक करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था.