ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर झूठे रिव्यू की जांच के लिए फ्रेमवर्क तैयार करेगी सरकार

By रविकांत पारीक
May 29, 2022, Updated on : Sun May 29 2022 05:05:04 GMT+0000
ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर झूठे रिव्यू की जांच के लिए फ्रेमवर्क तैयार करेगी सरकार
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने फर्जी और भ्रामक ऑनलाइन समीक्षाओं के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर चर्चा करने के लिए हितधारकों के साथ बैठक की
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केंद्र, ई-कॉमर्स (e-commerce) वेबसाइटों पर नकली समीक्षाओं (fake reviews) पर नजर रखने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करेगा। उपभोक्ता मामले विभाग (DoCA) भारत में ई-कॉमर्स संस्थाओं द्वारा अपनाई जा रही मौजूदा व्यवस्था और विश्व स्तर पर उपलब्ध सर्वोत्तम कार्य प्रणाली का अध्ययन करने के बाद, इस रूपरेखा को विकसित करेगा।


DoCA ने वेबसाइटों पर नकली समीक्षा को लेकर भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) के साथ-साथ ई-कॉमर्स कंपनियों, उपभोक्ता अधिकार मंचों, कानून विश्वविद्यालयों, वकीलों, FICCI, CII, उपभोक्ता के अधिकारों को लेकर आवाज उठाने वाले लोग सहित विभिन्न हितधारकों के साथ एक बैठक की और आगे आने वाली समस्याओं तथा फर्जी समीक्षा की जांच के लिए तैयार फ्रेमवर्क के रोडमैप पर चर्चा की। चूंकि ई-कॉमर्स में उपभोक्ताओं के पास प्रोडक्ट को भौतिक रूप से देखने या जांचने की सुविधा नहीं होती है। वह प्रोडक्ट को वचुर्अली खरीदता है। ऐसे में उपभोक्ता उन खरीदारों की राय और समीक्षा पर बहुत ज्यादा भरोसा करता है, जिन्होंने पहले से ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खरीदारी या सेवा ली है।

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सांकेतिक चित्र

DoCA सचिव, रोहित कुमार सिंह ने कहा, "समीक्षक की प्रामाणिकता सुनिश्चित करके पता लगाने की क्षमता और मंच की संबद्ध देयता यहां दो प्रमुख मुद्दे हैं। इसके अलावा ई-कॉमर्स कंपनियों को यह खुलासा करना चाहिए कि वे निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से प्रदर्शित करने के लिए "सबसे प्रासंगिक समीक्षा" कैसे चुनते हैं।"


सभी हितधारकों ने सहमति व्यक्त की कि इस मुद्दे की बारीकी से निगरानी की जानी चाहिए और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के इस मुद्दे को हल करने के लिए नकली समीक्षाओं को नियंत्रित करने वाली उपयुक्त रूपरेखा विकसित करनी चाहिए।


ई-कॉमर्स कंपनियों के हितधारकों ने दावा किया कि उनके पास ऐसी रूपरेखा हैं जिसके द्वारा वे नकली समीक्षाओं की निगरानी करते हैं। उन्हें इस मसले पर कानूनी रूपरेखा विकसित करने में भाग लेने में प्रसन्नता होगी।


इस बैठक में सचिव DoCA के साथ निधि खरे, अतिरिक्त सचिव और अनुपम मिश्रा, संयुक्त सचिव ने भाग लिया। मनीषा कपूर, सीईओ, ASCI ने नकली और भ्रामक समीक्षाओं की श्रेणियों और उपभोक्ता हित पर उनके प्रभाव पर प्रकाश डाला। इस बैठक में पैसा देकर कराई गई समीक्षाएं, संदिग्ध समीक्षाएं और प्रोत्साहन वाली समीक्षाओं जिनका खुलासा नहीं होने की स्थिति में, जो उपभोक्ताओं के लिए वास्तविक समीक्षाओं को पहचानना चुनौतीपूर्ण बना देता है, पर चर्चा की गई।