एक बार फिर टिक टॉक और हेलो एप निशाने पर, पीएम मोदी से पाबंदी की गुहार!

By जय प्रकाश जय
July 18, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:33:06 GMT+0000
एक बार फिर टिक टॉक और हेलो एप निशाने पर, पीएम मोदी से पाबंदी की गुहार!
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"आरएसएस के सह-संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक ताज़ा शिकायत में कहा है कि टिक टॉक, हेलो एप राष्ट्रविरोधी तत्वों का अड्डा बन गए हैं। पाबंदी के साथ ही अब इनके इस्तेमाल के लिए कानून बनाना जरूरी हो गया है। टिकटॉक और हेलो को सरकार ने नोटिस भेजकर 21 सवालों के जवाब मांगे हैं। साथ ही इनका जवाब नहीं देने की स्थिति में प्रतिबंध का सामना करने की चेतावनी भी दी है। उधर दूसरी तरफ टिकटॉक ने कहा है कि वह सरकार के साथ सहयोग करने को प्रतिबद्ध है।"


टिक टॉक


गूगल कहता है- 'टिक टॉक एक ग्लोबल वीडियो कम्युनिटी है। अब आसानी से वीडियो बनाए और देखें और अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। स्पेशल इफेक्ट्स और मज़ेदार फिल्टर्स इस्तेमाल करें। हजारों वीडियो देखें सिर्फ टिक टॉक पर।' लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास शिकायत पहुंची है कि 'टिक टॉक' और 'हेलो' एप राष्ट्रविरोधी तत्वों का अड्डा बन गए हैं। चीन के बाइट डांस के स्वामित्व वाले एप से भारत के किशोरों को बरगलाया जा रहा है। उन पर शीघ्र प्रतिबंध लगाया जाए। उधर दूसरी तरफ टिकटॉक और हेलो को सरकार ने नोटिस भेजकर 21 सवालों के जवाब मांगे हैं। साथ ही इनका जवाब नहीं देने पर इन एप को प्रतिबंध का सामना करने की चेतावनी भी दी है। हालांकि, टिकटॉक ने कहा है कि वह सरकार के साथ सहयोग करने को प्रतिबद्ध है।


इसी साल अप्रैल में मद्रास उच्च न्यायालय अपने एक फैसले में कह चुका है कि 'आक्रामक वीडियो के कारण टिक टॉक एप का इस्तेमाल करने बच्चों के साथ यौन विकार अत्याचार का अंदेशा होता है। ऐसे बच्चे आसानी से यौन शिकारियों के संपर्क में आ सकते हैं। आपत्तिजनक कंटेट के कारण टिक टॉक का इस्तेमाल खतरे से खाली नहीं है। इस एप पर आपत्तिजनक कंटेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार को इस पर बैन लगाना चाहिए।' कोर्ट ने केंद्र सरकार से 16 अप्रैल 2019 से पहले इस मामले पर जवाब भी तलब कर लिया था। इसी साल फरवरी में तमिलनाडु के आईटी मंत्री एम मणिकंदन कह चुके हैं कि टिक टॉक एप के कंटेंट 'असहनीय' हो चुके हैं। 


फिलहाल, पीएम मोदी से स्वदेशी जागरण मंच ने टिक टॉक और हेलो एप पर पाबंदी की गुहार लगाई है। पीएम से लिखित शिकायत करने वाले स्वदेशी जागरण मंच का दावा है कि दोनों एप भारत के युवाओं पर खराब असर डाल रहे हैं। देश में मीडिया में विदेशी निवेश को लेकर काफी सख्त नियम हैं लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की आड़ में ऐसे एप नियम से बच जाते हैं। ये राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रहार कर रहे हैं।


टिक टॉक पर राष्ट्रविरोधी सामग्री व्यापक रूप से साझा की जा रही है। इससे हमारे सामाजिक के ताने-बाने को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इस तरह के एप को भारत में पाबंद करने के लिए नया कानून बनाना जरूरी हो गया है। इससे पहले मंच आम चुनाव के दौरान अपनी चिंताओं से चुनाव आयोग को भी लिखित रूप से अवगत करा चुका है। भारत में इस समय एंड्रॉयड मोबाइल फोन में प्ले स्टोर और आईफोन में एप स्टोर द्वारा मुहैया कराये जाने वाले एप की निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है। 




टिक टॉक कंपनी प्रबंधन का कहना है- 'उनका एप लोकल कानून और नियमों को मानने के लिए प्रतिबद्ध है। वह 'IT Rules 2011' के नियमों का पालन कर रहा है।' उल्लेखनीय है कि अमेरिका में टिक टॉक एप की काफी आलोचना हो चुकी है। पिछले साल इंडोनेशिया सरकार अपने एक लाख, सत्तर हजार नागरिकों की हस्ताक्षरित अपील पर टीक टॉक को अपने देश में बैन कर चुकी है। यद्यपि बाद में टिक टॉक के अधिकारियों के आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के वायदे के बाद वह पाबंदी हटा ली गई थी।


टिक टॉक के म्यूजिक कंटेंट डायरेक्टर मैरी रहमानी कहते हैं कि टिकटॉक कलाकारों को उनकी प्रतिभा दिखाने का मौका देता है। हालांकि, उसका उभार म्यूजिक इंडस्ट्री के मुश्किल दिनों में हुआ है। म्यूजिक की आय स्ट्रीमिंग से ही है। वह ऑनलाइन मुफ्त है। स्ट्रीमिंग आय के बंटवारे पर विवाद चल रहा है। विवाद इस बात पर है कि कलाकारों को कितना पैसा दिया जाए। 


गौरतलब है कि चीन (बीजिंग) की कंपनी का टिक टॉक एप इस समय भारत में दस लाख मिलियन से अधिक मोबाइल फोन पर डाउनलोड है। इस एप पर भारत में कुल 5.4 मिलियन लोग सक्रिय हैं। पिछले एक साल में ही टिकटॉक सर्वाधिक डाउनलोड होने वाला एप बन गया है। अक्टूबर-2018 में पहली बार इस एप पर रिकॉर्ड तीन करोड़ 80 लाख डाउनलोड होने के बाद इससे युवाओं के नशे का ऐसा याराना सामने आया था। इस कामयाबी के पीछे अपरिपक्व टीनएजर्स की ललक रही है। उसके सबसे अधिक पॉपुलर वीडियो टि्वटर, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे अन्य प्लेटफार्म पर भी आ रहे हैं। 75 अरब डॉलर की चीनी मीडिया कंपनी बाइटडांस ने सोशल मीडिया सर्विस म्यूजिक ली के यूरोप, अमेरिका के छह करोड़ यूजर्स को इस एप में शामिल करने के लिए दो साल पहले उसे खरीद लिया था। 


यह भी उल्लेखनीय है कि तेरह वर्ष से कम आयु के बच्चों की निजी जानकारी अवैध रूप से एकत्र करने के आरोप में टिक टॉक कंपनी को इसी साल फरवरी 2019 में अमेरिकी सरकार को 57 लाख डॉलर चुकाने पर सहमत होना पड़ा था। अप्रैल में भारत सरकार ने भी बच्चों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए इस एप के डाउनलोड पर रोक लगा दी थी। बाद में पाबंदी हटा ली गई। टिक टॉक पर सफलता की सबसे बड़ी कहानी अटलांटा, अमेरिका के युवा लिल नेस एक्स की है। उसने टि्वटर और इंस्टाग्राम पर मीम्स के जरिए अपने एक गाने- ओल्ड टाउन रोड को प्रमोट किया। कुछ माह बाद वह टिकटॉक पर आया। लोगों ने स्वयं को काउब्वॉय और काउगर्ल का रूप देकर गाने पर अपने वीडियो बनाए। नतीजा ये रहा कि जबर्दस्त होड़ के बीच कोलंबिया रिकॉडर्स ने नेस एक्स से अनुबंध कर लिया।