ग्रीन ऑफिस स्पेस महज 44 फीसदी पर्यावरण अनुकूल, पर वसूल रहे ज्यादा किराया: रिपोर्ट

ग्रीन ऑफिस स्पेस महज 44 फीसदी पर्यावरण अनुकूल, पर वसूल रहे  ज्यादा किराया: रिपोर्ट

Wednesday September 07, 2022,

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संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण को और अधिक बिगड़ने से बचाने के लिए हरित भवन समय की आवश्यकता महसूस की गई. तेजी से विकास के कारण बढ़ते कार्बन फुटप्रिंट्स की समस्या से निजात की तरफ बढाया हुआ कदम हरित भवन (green buildings) देश के आई.टी. सेक्टर्स वाले शहरों में प्रमुख रूप से बनाये गए. हरित भवन एक ऐसा भवन होता है, जो अपने डिजाइन, निर्माण या संचालन में जलवायु संबंधी नकारात्मक प्रभावों को कम या समाप्त करते हुए हमारे जलवायु और प्राकृतिक वातावरण पर सकारात्मक प्रभाव पैदा करता है. ये इमारतें आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण होती हैं और पर्यावरण के अनुकूल होती हैं. इसी वजह से इनका किराया किसी अन्य इमारत से कहीं ज्यादा होती है.


संपत्ति सलाहकार जेएलएल इंडिया ने ‘भारत के कार्यालय बाजार में हरित इमारतों की हिस्सेदारी’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में जानकारी दी है कि देश के सात प्रमुख शहरों में विभिन्न सुविधाओं से लैस कुल कार्यालय स्थलों में से महज 44 फीसदी ही हरित श्रेणी में आते हैं. हालांकि यह अलग बात है कि पर्यावरण अनुकूल इन इमारतों को औसतन 36 फीसदी अधिक किराया मिलता है. सात प्रमुख शहर मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे और कोलकाता हैं.

क्या होते हैं हरित भवन?

हरित भवन पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव को कम करने के एकमात्र उद्देश्य के साथ निर्माण किया गया पर्यावरण की दृष्टि से एक टिकाऊ संरचना है. यह निर्माण प्रक्रिया के दौरान जितना संभव हो उतना कम कचरा उत्पन्न करता है. कोई भी भवन ‘हरित भवन’ हो सकता है, चाहे वह एक घर, कार्यालय, स्कूल, अस्पताल, सामुदायिक केंद्र या किसी अन्य प्रकार की संरचना हो, बशर्ते इसमें निम्नलिखित विशेषताएं शामिल हों- जैसे, ऊर्जा, जल और अन्य संसाधनों का कुशल उपयोग, अक्षय ऊर्जा का उपयोग, डिजाइन, निर्माण और संचालन का पर्यावरणीय दृष्टिकोण, पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को सक्षम करना, अच्छी आंतरिक पर्यावरणीय वायु गुणवत्ता, गैर-हानिकारक और पर्यावरण अनुकूल सतत भवन निर्माण सामाग्री का उपयोग इत्यादि.


भारत में सबसे लोकप्रिय हरित प्रमाणन/ रेटिंग प्रणाली यूएसजीबीसी एलईईडी, आईजीबीसी, गृहा और ईडीजीई है.


जेएलएल इंडिया ने कहा कि भारत में ग्रेड-ए कार्यालय स्थल (विभिन्न सुविधाओं से युक्त महंगे कार्यालय) 73.2 करोड़ वर्गफुट क्षेत्र में है जिनमें से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र की हिस्सेदारी 52.2 करोड़ वर्गफुट और अन्य क्षेत्र की हिस्सेदारी 21 करोड़ वर्गफुट है.


रिपोर्ट में कहा गया है कि, ‘‘भारत में कुल 32.1 करोड़ वर्गफुट का ग्रेड-ए कार्यालय स्थल हरित प्रमाणित है. यह सात शहरों में कुल 73.2 करोड़ वर्गफुट के ग्रेड-ए (प्रीमियम) कार्यालय स्थल का 43.8 फीसदी है.’’आंकड़ों के अनुसार हरित प्रमाणित इमारतों में सबसे ज्यादा 6.7 करोड़ वर्गफुट दिल्ली-एनसीआर में, इसके बाद 6.6 करोड़ वर्गफुट मुंबई में है.