प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान उपभोक्ताओं को राहत दे रहे हैं ग्रोफर्स, डंजो और बिगबास्केट जैसे स्टार्टअप

By yourstory हिन्दी
December 12, 2019, Updated on : Thu Dec 12 2019 13:36:43 GMT+0000
प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान उपभोक्ताओं को राहत दे रहे हैं ग्रोफर्स, डंजो और बिगबास्केट जैसे स्टार्टअप
प्याज की मार से उपभोक्ताओं के आंसू पोंछ रहे हैं ये हाइपरलोकल डिलीवरी स्टार्टअप्स
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प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन ऑनलाइन ग्रॉसर्स और हाइपरलोकल डिलीवरी स्टार्टअप्स प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान अपने ग्राहकों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

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प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं। कहीं-कहीं ये 200 रुपये किलो के करीब बिक रहा है जिसके कारण भारतीय अपने रोज के भोजन में इस जरूरी चीज को शामिल करने के लिए आंसू बहा रहे हैं। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी कुछ स्टार्टअप्स के पास इसका समाधान है। दरअसल ऑनलाइन ग्रॉसर्स और हाइपरलोकल डिलीवरी स्टार्टअप प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान अपने ग्राहकों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।


BigBasket, Grofers, और Dunzo 87 रुपये और 140 रुपये प्रति किलो के बीच की कीमत में प्याज बेच रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों से, प्याज की कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं और इसको लेकर इंटरनेट पर अनेकों जोक्स बन रहे हैं। 2019 से 2020 के खरीफ सीजन के दौरान उत्पादन में 26 प्रतिशत की गिरावट के कारण सब्जी की कीमत बढ़ गई थी। उत्पादन में गिरावट का कारण लंबे समय बाद और बेमौसम बारिश रही।


हालांकि हाइपरलोकल डिलीवरी स्टार्टअप्स ने प्याज की इस बढ़ती मांग को एडवांटेज में बदल दिया है। इन स्टार्टअप्स द्वारा कम की गई प्याज की कीमत उपभोक्ता और स्टार्टअप दोनों के पक्ष में काम करती है। न केवल उपभोक्ताओं को कम कीमत में प्याज खरीदने का अवसर मिलता है, बल्कि इससे स्टार्टअप के ग्राहकों की संख्या भी बढ़ती है और ऑर्डर संख्या में भी इजाफा होता है। यही नहीं, इन स्टार्टअप्स की ये रणनीति उनके लिए एक ग्रेट प्रमोशनल टूल के रूप में भी काम करती है, जहां ग्राहक वर्तमान में महंगी बिकने वाली सब्जियों को आराम से खरीद सकते हैं।





बिगबास्केट के सह-संस्थापक और सीईओ हरि मेनन कहते हैं,

"प्राइसिंग काम करता है क्योंकि इसमें खरीदने और स्टोरेज के एलिमेंट होते हैं जो हम करते हैं। हमने पहले नासिक से प्याज की खरीद की थी और उसे स्टॉक करने में सक्षम रहे हैं। जिससे अब हम उपभोक्ता की आवश्यकता को पूरा करते हैं।"


जहां तक सरकार का सवाल है, उसने मिस्र और तुर्की से 36,090 मीट्रिक टन प्याज आयात करने की अपनी मंजूरी दे दी है। भारत ने आखिरी बार 2016 में 1,987 टन प्याज का आयात किया था। पिछले पांच वर्षों में यह एकमात्र समय है जब भारत को प्याज आयात करना पड़ा है।


RedSeer की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ऑनलाइन ग्रोसरी स्पेस 1.2 बिलियन का है। शोध फर्म को उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में ऑनलाइन बाजार 50 प्रतिशत तक बढ़ेगा। प्याज को रियायती दरों पर बेचना भी उपभोक्ताओं को ऑनलाइन किराने का सामान और सब्जियां खरीदने के लिए एक आसान तरीका है, जिसे आज भी काफी हद तक ऑफलाइन बाजार माना जाता है।


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