हाईटेक हो रहा है यह स्कूल... लॉन्च करेगा खुद का सैटेलाइट, कैंपस में बना रहा स्पेस स्टेशन

यह प्रोजेक्ट भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 'आजादी का अमृत महोत्सव' का एक हिस्सा है और इसकी निगरानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा की जाएगी.
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अपने छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान में प्रशिक्षित करने के लिए देश के एक प्राइवेट स्कूल ने अपना खुद का नैनो सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी कर ली है. यह लॉन्चिंग एमपी बिड़ला समूह का द साउथ प्वाइंट हाईस्कूल कर रहा है.

इस लॉन्चिंग के लिए इंडियन टेक्नोलॉजी कांग्रेस एसोसिएशन (आईटीसीए) और स्कूल के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं.

साउथ प्वाइंट इस तरह की परियोजना शुरू करने वाला देश के दो स्कूलों में से एक और पूर्वी भारत में एकमात्र स्कूल है.

'आजादी का अमृत महोत्सव' का हिस्सा है प्रोजेक्ट

यह प्रोजेक्ट भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में 'आजादी का अमृत महोत्सव' का एक हिस्सा है और इसकी निगरानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा की जाएगी.

इस समझौते के साथ यह स्कूल उन 75 स्टूडेंट सैटेलाइट मिशन, 2022 का हिस्सा बन गया है, जहां इसरो आजादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में 75 स्टूडेंट सैटेलाइट्स को लॉन्च करेगा.

सैटेलाइट को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा जाएगा. सैटेलाइट से प्रभावी डेटा संग्रह की निगरानी और सुनिश्चित करने के लिए अंतरिक्ष प्रयोगशाला की स्थापना की जाएगी.

‘प्रियंवदासैट’ रखा गया नाम

एमपी बिड़ला समूह के द साउथ प्वाइंट हाईस्कूल ने कारोबारी समूह की पूर्व अध्यक्ष प्रियंवदा बिड़ला की याद में अपने उपग्रह का नाम ‘प्रियंवदासैट’ रखने का फैसला किया है.

स्कूल की प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष कृष्ण दमानी ने कहा कि 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्र इस प्रोजेक्ट से जुड़ेंगे. इस प्रोजेक्ट के 9 महीने बाद शुरू होने की उम्मीद है.

दमानी ने कहा, "यह इनोवेशन कल्चर को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान आधारित शिक्षा और अनुभव आधारित शिक्षा पर अधिक जोर देना सुनिश्चित करेगा तथा अंतरिक्ष क्षेत्र और संबद्ध क्षेत्रों से छात्रों की भविष्य की पीढ़ी को रूबरू कराएगा."

दमानी ने कहा, "हमारे बच्चों को प्रशिक्षित किया जाएगा और वे उपग्रह की डिजाइनिंग तथा निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा होंगे, जिसे इसरो द्वारा श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया जाएगा."

आईटीसीए के मार्गदर्शन में कैंपस में एक स्पेस सेंटर भी स्थापित किया जाएगा. यह एक ग्राउंड स्टेशन होगा जहां से सैटेलाइट को नियंत्रित किया जा सकता है और डेटा निकाला जा सकता है. इसका उपयोग बड़े पैमाने पर छात्रों और समाज के लाभ के लिए किया जा सकता है. फैकल्टी को ऐसा करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि सैटेलाइट अगले तीन सालों तक ऑर्बिट में रहेगा. उसके बाद जब तक हम दूसरे उपग्रह के लिए नहीं जाते, तब तक स्पेस सेंटर मौजूद रहेगा. इसके साथ ही क्यूबसैट की एक इंजीनियरिंग रेप्लिका होगी जिसे सीनियर स्टूडेंट्स और स्कूल फैकल्टी द्वारा तोड़ा और फिर से जोड़ा जा सकेगा.

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