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एडटेक स्टार्टअप Toppr ने कैसे बनाई ऐसी तकनीक, जो छात्रों को उनके मुताबिक सीखने में करती है मदद

प्रोडक्ट रोडमैप की इस कहानी में हम आपको बतायेंगे एडटेक स्टार्टअप 'टॉपर (Toppr)' के बारे में, जो किसी भी व्यक्ति के मुताबिक सीखने के अनुभवों और नतीजों पर करता है फोकस।

एडटेक स्टार्टअप Toppr ने कैसे बनाई ऐसी तकनीक, जो छात्रों को उनके मुताबिक सीखने में करती है मदद

Monday July 26, 2021 , 8 min Read

12वीं कक्षा तक के बच्चों (K-12) की तैयारियों को ध्यान में रखकर जीशान हयात और हेमंत गोटेती 2013 में एडटेक प्लेटफॉर्म टॉपर की स्थापना की। इस सेक्टर में सफलता की संभावना को सूंघते हुए मुंबई स्थित इस स्टार्टअप ने आखिरकार सीखने के विभिन्न रूपों को एक छत के नीचे साथ लाने का फैसला किया।


जीशान ने बताया,

"हमने अपने रोडमैप को परिभाषित करने के लिए K-12 छात्र की सीखने की जरूरतों का 360 डिग्री अप्रोच अपनाया। हमने ओलंपियाड और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर भी ध्यान केंद्रित किया, और उनकी खास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए टेक्नोलॉजी विकसित की।”


जीशान इससे पहले भी कुछ कंपनियों की स्थापना कर चुके थे।


टॉपर के सह-संस्थापकों ने अपने पहले कर्मचारी जो कोचिट्टी के साथ मिलकर शुरुआत की और सबसे पहले सीखने को व्यक्तिगत बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। टॉपर के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जो, बताते हैं कि उन्होंने जो पहली बड़ी चुनौती से पार पाना था, वह प्रैक्टिस सेट से जुड़ी चुनौती थी। उन्होंने महसूस किया कि छात्र अपना 70 प्रतिशत समय प्रश्नों का अभ्यास करने में बिता रहे थे।


जो कहते हैं, "हालांकि, प्रत्येक छात्र की अभ्यास की जरूरतें अपने आप में अलग होती हैं।"

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उस समय इन चार लोगों की टीम ने शिक्षकों, कॉलेज के छात्रों और पेशेवरों और फ्रीलांसर को शामिल करते हुए तमाम विषयों के विशेषज्ञों के लिए एक कम्युनिटी प्लेटफॉर्म बनाना शुरू किया, जो स्टार्टअप को अभ्यास में मदद कर सकें क्योंकि टीम का मानना था कि एक व्यक्तिगत इंजन को एक बड़ी मात्रा में कंटेंट की आवश्यकता होती है।


इसने हजारों विशेषज्ञों के लिए एक नई संभावना खोली, जो अपने खाली समय में कमाई कर सकते थे। साथ ही इसने टीम को केवल तीन महीनों में अभ्यास करने और बेहतर सीखने के लिए कक्षा 11 और 12 के लिए तीन महीनों का एमवीपी लॉन्च करने में भी मदद की।


टॉपर का दावा है कि आज उसके पास 3.5 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स हैं।

प्रमुख उत्पाद

टॉपर का प्रमुख उत्पाद - लर्निंग ऐप है, जो स्कूल के बाद सीखने के लिए है। यह लाइव कक्षाएं, अभ्यास, टेस्ट, ट्यूटर से सवाल पूछें जैसी सुविधाओं के साथ कई रिकॉर्ड की गई सामग्री प्रदान करता है।


इसके पास स्कूल ओएस नाम का एक उत्पाद भी है, जो स्कूलों के ऑनलाइन कार्य करने के लिए एक ऑपरेटिंग सिस्टम, लाइव कक्षाएं, असाइनमेंट, उपस्थिति, छोटे-छोटे साइज के कंटेंट मुहैया कराती है। वहीं आसंर नाम का प्रोडक्ट होमवर्क और परीक्षा से जुड़ी सहायता मुहैया कराता है। कंपनी के कोडर नाम का प्रोडक्ट एक एक्स्ट्रा करिकुलर 1-ऑन-1 कोडिंग कक्षाएं ऑफर करती है। जबकि कम्युनिटी नाम का प्रोडक्ट सभी उत्पादों में अच्छी सामग्री और ट्यूटर उपलब्धता से जुड़े कार्यों को देखता है।

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टीम के अनुसार, ये उनके तकनीकी स्टैक के चार प्रमुख मूलभूत तत्वों के अंतर्गत आते हैं। इनमें एडेप्टिव लर्निंग के लिए मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित सिफारिश इंजन शामिल हैं। प्रश्न सेट को हल करते समय, यह यूजर्स को वो सवाल भेजती है, जो उसके पिछले प्रयासों और सटीकता के इतिहास पर आधारित होता है। प्रत्येक छात्र को उनकी प्रगति के आधार पर हल करने के लिए समस्याओं का एक कस्टम सेट मिलता है।


हेमंत बताते हैं,

"हमारे प्रश्नों में 80 करोड़ से अधिक लाइफटाइम प्रयास हैं, जो छात्र को अगले प्रश्न की सिफारिश करने के लिए एमएल इंजन को आधार मुहैया कराते हैं।"


इसमें छात्र की शंकाओं का उत्तर देने के लिए एक डाउट्स इंजन है। यूजर्स के फीडबैक के माध्यम से, टीम ने महसूस किया कि छात्रों को स्कूल के बाहर शिक्षक या ट्यूटर के समर्थन की कमी महसूस होती है, खासकर जब वे किसी विशेष समस्या से फंस जाते हैं। टीम ने इसके लिए दो-चरणीय समाधान तैयार किया -पहला स्वचालित रूप से प्रश्नों का उत्तर देने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और दूसरा छात्रों के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए 24X 7 ट्यूटर सपोर्ट सिस्टम।


हेमंत कहते हैं,

"यह एक जटिल उत्पाद था क्योंकि इसमें चैट फीचर, सही ट्यूटर से मिलान और ट्रेनिंग, फीडबैक और निगरानी लूप बनाने की जरूरत थी, जो काफी हद तक यूजर्स के मुताबिक हो। हमने सही उत्पाद निर्णय लेने और दोनों हितधारकों (छात्रों, ट्यूटर्स) के लिए मुताबिक बनाने से पहले छात्र संदेशों की मैन्युअल रूप से समीक्षा करने में बहुत समय बिताया।”


टॉपर व्यक्तिगत पाठ्यक्रम निर्माण के लिए एक सामग्री इंजन भी प्रदान करता है। यह विभिन्न प्रकार की सामग्री प्रदान करता है जैसे प्रश्न, वीडियो, कहानियां और विषय, अध्याय, ग्रेड आदि के आधार पर अवधारणाएं।


फोटॉन टूल का इस्तेमाल एम्बेड किए वीडियो/ऑडियो लेयर्स के जरिए लाइव क्लास, लाइव पोल, क्विज, क्लासबोर्ड और लाइव चैट आयोजित करने के लिए किया जाता है। हेमंत कहते हैं, “हमने मई 2020 से स्कूलों में 16 मिलियन से अधिक लाइव कक्षाएं आयोजित करने के लिए फोटॉन का उपयोग किया है।”

उत्पाद कैसे विकसित हुआ?

जो का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले लर्निंग ऐप को लॉन्च किया, जिसकी मुख्य विशेषता प्रैक्टिस और टेस्ट थे। जो कहते हैं, "जैसे-जैसे छात्र ऐप से जुड़े, हमें और कमियां मिलीं। इनमें से कुछ को उस समय के बुनियादी ढांचे के साथ हल किया जा सकता था और कुछ को इंटरनेट की पहुंच बेहतर होने तक इंतजार करना पड़ा।”


जैसे-जैसे भारत में इंटरनेट के बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ, टीम ने सीखने से जुड़े वीडियो स्ट्रीम करना शुरू कर दिया, और पुस्तकालय में वीडियो सामग्री को जोड़ा।

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जीशान कहते हैं, उत्पाद विकसित होता रहा क्योंकि टीम ने महसूस किया था कि शिक्षा के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं।


जीशान कहते हैं,

"जैसे ही हम एक जरूरत को हल करते हैं, हम दूसरी खोज लेते हैं। इसलिए मौजूदा सुविधाओं में सुधार और नई जरूरतों की खोज के बीच, उत्पाद काफी तेजी से, महीने दर महीने आगे बढ़ रहा है।”

फीडबैक से जुड़ी खामियां

टॉपर में प्रोडक्ट वर्टिकल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट राजशेखर रात्रे बताते हैं कि उत्पाद विकास के लिए प्रतिक्रिया यानी फीडबैक सबसे महत्वपूर्ण तत्व है।


राजशेखर कहते हैं,

“लॉन्च के तुरंत बाद, हम सीधे यूजर्स से सुनना पसंद करते हैं। जैसे-जैसे ऐप का इस्तेमाल बढ़ता जाता है, डेटा काफी अहम दृष्टिकोण प्रदान करता है। इन सभी के साथ-साथ वर्षों में हासिल किए अनुभव से हमें नई समस्याओं की पहचान करने और उन्हें हल करने में मदद मिलती है। जब हमने अपने उपयोगकर्ताओं के बीच बढ़ती मांग को देखा, तो हमने डाउट फीचर का निर्माण किया और उसके तहत अपनी लाइब्रेरी में वीडियो जोड़े।'

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जो इसी को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि यूजर्स की प्रतिक्रिया बहुत अच्छी थी, लेकिन कुछ फीचर्स लोगों को ध्यान खींचने में या तो विफल रहे या उत्पाद के विकसित होने के साथ उनका उपयोग नहीं किया गया।


जो कहते हैं,

“हमने छात्रों के लिए बातचीत करने और एक-दूसरे के सवालों के जवाब देने के लिए एक डिस्कस फीचर शुरू की। हालांकि, यह हमारे प्रश्न बैंक की तुलना में प्रश्न और उत्तर की गुणवत्ता पर एक समझौता था, जिसके कारण यूजर्स के बीच इसे कम अपनाया गया। इसके अलावा, सामग्री मॉडरेशन बड़े पैमाने पर एक चुनौती थी। इसलिए, हमने इसे बंद कर दिया।”


टीम ने यह भी महसूस किया कि कई छात्र जब भी फंसते हैं या कसी विषय के बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो वे वेब सर्ज इंजन का उपयोग करेंगे। ऐसे में टॉपर को ऑर्गेनिक ट्रैफिक के लिए छात्रों को सही सामग्री प्रदान करनी थी।


हेमंत कहते हैं,

“हमने अपनी विशाल सामग्री को बनाया वेब के हिसाब से ढाला। साथ ही टॉपर के पेज के एसईओ को बेहतर किया और उसे मोबाइल फ्रेंडली बनाया, ताकि हमारी SERP रैंकिंग, CTR और इंप्रेंसंस को बेहतर बनाया जा सके। इसका नतीजा यह रहा कि ट्रैफिक एक साल में 9 गुना बढ़ गया। हम 35 मिलियन मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं के साथ भारत में K-12 छात्रों के लिए रैंक-1 डेस्टिनेशन बन गए हैं।”

महामारी में मिला सहारा

महामारी के दौरान, एजुकेशन से जुड़े ऐप और प्लेटफार्म की संख्या में तेजी आई। बार्क इंडिया और नीलसन की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले साल लॉकडाउन के बाद से स्मार्टफोन पर एजुकेशन ऐप पर खर्च होने वाले समय में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।


एडटेक प्लेटफॉर्म जैसे अपग्रेड, वेदांतु, सिंपललर्न और ड्रोनस्टडी अगले साल कम से कम 3,000 नए रोजगार पैदा करने पर विचार कर रहे हैं।


एडटेक सेक्टर की यूनिकॉर्न कंपनी बायजूस ने अपने कंटेंट को लोगों के लिए फ्री कर दिया था, जिससे उसके प्लेटफॉर्म पर 7.5 मिलियन नए उपयोगकर्ता देखे। लॉकडाउन के दौरान इसके ऐप पर बिताया गया समय 70 मिनट प्री-लॉकडाउन से बढ़कर 91 मिनट हो गया। वहीं अनएकेडमी ने 1.4 बिलियन वॉच मिनट रिकॉर्ड का वा किया है। हालांकि, Toppr के लिए मुख्य अंतर इसके व्यक्तिगत सीखने के परिणाम रहे हैं।


जीशान का कहना है कि टीम उपयोगकर्ताओं की जरूरतों और उभरने वाली नई तकनीकों के आधार पर इनोवेशन करना जारी रखेगी। वह बताते हैं कि बड़े छात्र समुदाय जैसे रैंक डिस्कवरी, आकलन के आधार पर कमी विश्लेषण, मल्टीप्लेयर लर्निंग गेम्स आदि का लाभ उठाकर विकास और नई सुविधाओं के निर्माण की बहुत बड़ी संभावना है।


जीशान कहते हैं,

"सीखने की प्रणाली में एक प्रमुख हितधारक स्कूल भी हैं, जिन्हें स्कूल ओएस एक मंच पर लाता है। अभी, स्कूल के बाद की शिक्षा और इन-स्कूल शिक्षा अलग-अलग सेट हैं और प्रत्येक बुलबुले में क्या होता है, इसकी कोई दृश्यता नहीं होती है। यह पहली बार है जब कोई B2B स्कूल उत्पाद B2C गुणवत्ता वाले उत्पाद का अनुभव कर रहा है। इसके अलावा, हम एक अनूठी स्थिति में हैं जहां हम स्कूल के साथ-साथ स्कूल के बाद की शिक्षा को भी पूरा करते हैं। दोनों को एकजुट करना कुछ ऐसा है जिसे लेकर हम बहुत उत्साहित हैं।"


Edited by Ranjana Tripathi