कैसे किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करता है एग्रीटेक स्टार्टअप Gramik

Gramik के साथ राज यादव और गौरव कुमार देश के अन्नदाता किसानों को शिक्षित और सशक्त बनाना चाहते हैं. वे किसानों के लिए उनकी खेती की उपज में सुधार लाने और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. स्टार्टअप का हेडक्वार्टर लखनऊ में जबकि इसका कॉर्पोरेट ऑफिस पूणे में है.

कैसे किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करता है एग्रीटेक स्टार्टअप Gramik

Thursday June 22, 2023,

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हाइलाइट्स

  • राज यादव और उनके दोस्त गौरव कुमार ने 2021 में एग्रीटेक स्टार्टअप Gramik की शुरुआत की थी
  • Gramik ने 1.50 लाख से अधिक किसानों की 300 फीसदी तक आय बढ़ाने में मदद की है. और 350 से अधिक लोगों को रोजगार दिया है
  • लखनऊ में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में, Gramik को सूबे के टॉप 10 स्टार्टअप में शॉर्टलिस्ट किया गया
  • Gramik ने अब तक तीन राउंड में कुल 73.3 मिलियन रुपये जुटाए हैं
  • जब महारत और इरादे मिलते हैं, तो एक ऑन्त्रप्रेन्योर पैदा होता है: राज यादव

किसानों की समस्याओं को सबसे बेहतर कौन समझ सकता है खुद किसान. और उसी किसान का बेटा जब उन तमाम समस्याओं को हल करने की ठान ले तो... इसकी दूसरी मिसाल शायद ही कोई मिले. कुछ ऐसा ही कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले राज यादव.

राज के पिता किसानों के उस तबके से थे जिनकी अपनी खुद की जमीन नहीं थी. वे गांव के दूसरे लोगों की जमीन लेकर खेती किया करते थे. ऐसे में आमदनी की तो बात ही छोड़ दो, परिवार का पेट पालना भी भारी होता था. ऐसे में राज का बचपन अपने माता-पिता का हाथ बटाने में गुजरा. उस उम्र में जहां एक ओर गांव के बच्चे क्रिकेट खेला करते थे, राज चाय का स्टाल और पान की दुकान चलाते थे. परिवार में पैसों की ऐसी तंगी थी कि खाने के भी लाले होते थे. जब कोई मेहमान घर आता था, तब दाल-चावल और रोटी मिलने को; राज 'लग्जरी खाना' कहते हैं.

मगर राज स्कूल के दिनों में पढ़ाई में होशियार थे. जब वे स्कूल टॉप करने में कामयाब रहे तब उनके परिवार ने उनकी हौसला-अफ़ज़ाई की और उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए कहा. वे कॉलेज की पढ़ाई के लिए शहर आ गए. तब कम्प्यूटर, सॉफ्टवेयर और इंटरनेट तूल पकड़ रहे थे. एक करीबी रिश्तेदार ने उन्हें आईटी (इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी) में इंजीनियरिंग करने का सुझाव दिया. ये बात उन्हें भी रास आ गई और उन्होंने अपनी डिग्री हासिल की.

आगे चलकर उन्हें युनाइटेड नेशंस चिल्ड्रंस फंड (UNICEF), बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (BMGF), ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (AIIMS), टाटा मेमोरियल सेंटर (TMC), और इंटरनेशनल एटोमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) जैसी नामचीन संस्थाओं में काम करने का मौका मिला. यहां मिली सीख और अनुभव ने उन्हें एक बड़े उद्देश्य के लिए काम करने के लिए प्रेरित किया. वे जिस समुदाय से आते हैं, उन्होंने उसके लिए कुछ करने का मन बनाया. टेक्नोलॉजी में हासिल अपनी महारत (expertise) को उन्होंने किसानों के हितों के लिए समर्पित कर दिया.

राज यादव कहते हैं, 'जब महारत और इरादे मिलते हैं, तो एक ऑन्त्रप्रेन्योर पैदा होता है.'

आज, राज एक सफल ऑन्त्रप्रेन्योर हैं. ऑन्त्रप्रेन्योरशिप की राह उन्होंने साल 2014 में चुनी, जब उन्होंने अपनी खुद की IT सर्विस कंपनी 18Pixels की स्थापना की. यहां उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मिल सके, इसके लिए कई इनोवेटिव समाधान तैयार किए. एक किसान परिवार में पैदा होने के कारण, उनके पास हमेशा किसानों के लिए कुछ करने का विजन था. बस इसी सोच के साथ उन्होंने अपने ऑन्त्रप्रेन्योरशिप के सफर को जारी रखते हुए साल 2021 में एग्रीटेक स्टार्टअप Gramik की शुरुआत की. राज यादव Gramik के फाउंडर और सीईओ (चीफ़ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर) हैं और यहां उनका साथ दे रहे हैं उनके दोस्त को-फाउंडर और सीओओ (चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफिसर) गौरव कुमार. गौरव ने आईआईटी रुड़की से बी.टेक करने के बाद आईआईएम बैंगलोर से एमबीए की डिग्री ली है.

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राज यादव (फाउंडर, सीईओ) और गौरव कुमार (को-फाउंडर, सीओओ) — Gramik

Gramik (इसे पहले AgriJunction के नाम से जाना जाता था) के साथ राज और गौरव देश के अन्नदाता किसानों को शिक्षित और सशक्त बनाना चाहते हैं. वे किसानों के लिए उनकी खेती की उपज में सुधार लाने और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. स्टार्टअप का हेडक्वार्टर लखनऊ में जबकि इसका कॉर्पोरेट ऑफिस पूणे में है.

Gramik किसानों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को क्वालिटी फार्म इनपुट्स, एक्सपर्ट नॉलेज, टेक्नीकल इनोवेशंस और बिजनेस स्किल्स के जरिए ग्रामीण समुदायों को मजबूत बनाकर ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल रहा है. स्टार्टअप पूरी सप्लाई चेन को शामिल करके, इनपुट क्वालिटी सुनिश्चित करके और बेहतर उपज के लिए किसानों को सटीक शोध मुहैया करके भारत में खेती की तस्वीर बदल रहा है.

एग्रीटेक स्टार्टअप को भारत के पहले पीयर कॉमर्स स्टार्टअप की संज्ञा दी गई है. इसे आसान भाषा में समझे तो यह ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने के लिए उल्लेखनीय प्रयास करके एक अधिक सोशल रिस्पोंसिबल इकोसिस्टम तैयार कर रहा है. स्टार्टअप न केवल 1.50 लाख से अधिक किसानों की 300 फीसदी तक आय बढ़ाने में मददगार साबित हुआ है, बल्कि इसने 350 से अधिक लोगों को रोजगार देकर उनके लिए आजीविका भी बनाई है.

इसी साल, फरवरी महीने की शुरुआत में, लखनऊ में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (Global Investors Summit) में, Gramik को सूबे के टॉप 10 स्टार्टअप में शॉर्टलिस्ट किया गया, जो 8,000 स्टार्टअप के बीच कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए समर्पित है. कृषि-क्षेत्र में प्रमुख खिलाड़ियों में से एक के रूप में, अपने आशाजनक रेवेन्यू मॉडल और विकास की संभावनाओं के लिए स्टार्टअप ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में निवेशकों और सरकारी अधिकारियों - दोनों से सराहना और समर्थन हासिल किया.

हाल ही में Gramik के फाउंडर और सीईओ राज यादव ने YourStory के साथ बात करते हुए स्टार्टअप की शुरुआत, बिजनेस और रेवेन्यू मॉडल, फंडिंग, चुनौतियों, इसकी USP (unique selling proposition) और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया.

क्या करता है Gramik

Gramik गुणवत्तापूर्ण कृषि उपज तक किसानों की पहुंच की समस्या को हल करता है. उन्हें अपनी मिट्टी और वह सब कुछ जानने की जरूरत है जो यह कर सकता है, साथ ही उनकी उपज में सुधार लाने, आमदनी बढ़ाने में मदद करने के लिए यह बेहतरीन इनपुट देता है. इसने भारतीय किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए डिजिटल बाज़ार बनाया है.

राज बताते हैं, "यहां तक कि सरकार भी इसे विकास के क्षेत्र के रूप में पहचानती है और इसीलिए हमने देखा कि 2023-24 के केंद्रीय बजट में लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये का भारी भरकम बजट इस सेक्टर को आवंटित किया गया है. हमने माना कि जहां ऑनलाइन विजिबिलिटी से सभी उद्योगों को लाभ हो रहा है, वहीं कृषि, हमारे देश का प्रमुख नियोक्ता, अभी भी पिछड़ा हुआ था. डिजिटाइजेशन और ऑटोमेशन की मदद से, हम किसानों को कार्रवाई योग्य डेटा मुहैया करना चाहते थे ताकि वे अपनी उपज की स्थिति बना सकें और उन्हें उच्च मूल्य वाले कृषि कच्चे माल तक पहुंचने, मिलावटी और खराब उपकरणों से बचने और उनकी उपज में सुधार करने के लिए सशक्त बना सकें."

वे आगे बताते हैं, "हमने अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण मैन्युफैक्चरिंग बिजनेसेज तक पहुंच प्रदान करके और ग्रामीण क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी में चुनौतियों का समाधान करके ग्रामीण समुदायों को मजबूत करने और उनका जीवन संवारने का लक्ष्य रखा है. माल के तेज B2B (Business-to-Business) संचलन की सुविधा देकर, हम बिजनेसेज को उनके ग्राहक नेटवर्क को बढ़ाने, उनके संचालन को बढ़ाने और उनके ग्राहकों से रिव्यू और रेटिंग प्राप्त करने में सक्षम बनाते हैं जो कृषि मूल्य श्रृंखला में उनकी जवाबदेही की घोषणा करते हैं."

बिजनेस मॉडल

बिजनेस मॉडल के बारे में पूछे जाने पर राज बताते हैं, "हमने जो बिजनेस मॉडल बनाया है, वह है- कलेक्टिव कोऑपरेटिव सोशल कॉमर्स मॉडल."

Gramik का कलेक्टिव कोऑपरेटिव सोशल कॉमर्स मॉडल एक सहयोगी और समुदाय संचालित दृष्टिकोण है जो साझा स्वामित्व, पारदर्शिता और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ एक वैल्यू चेन बनाता है. इसका उद्देश्य खुद पर आश्रित लोगों के साथ एक एग्री इकोसिस्टम बनाना है, जो बिचौलियों के बिना काम कर सके.

राज इस मॉडल के बारे में समझाते हुए आगे बताते हैं, "इस मॉडल में, Gramik ग्रामीण व्यवसायों के लिए एक बाज़ार प्रदान करता है और कृषि-व्यवसायों के लिए दृश्यता और विश्वसनीयता बनाता है जो टेक्नोलॉजी, इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स, पेमेंट प्रोसेसिंग, डिमांड जनरेशन, ऑन-ग्राउंड इम्पलिमेंटेशन, कैपेसिटी बिल्डिंग, ट्रेनिंग और कस्टमर सपोर्ट मुहैया करते हैं. ये सब होता है इसके लास्ट-माइल पार्टनर "पीयर पार्टनर" के जरिए.

इसी सेक्टर में AgroStar, DeHaat, Gramophone, WayCool और Ninjacart जैसे खिलाड़ियों को यह स्टार्टअप टक्कर दे रहा है.

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फंडिंग

राज ने Gramik में व्यक्तिगत तौर पर 70 लाख रुपये का निवेश किया है. वहीं Gramik के फंडिंग जुटाने की बात करें तो इसने अब तक तीन राउंड में कुल 73.3 मिलियन रुपये जुटाए हैं. स्टार्टअप को Godrej Agrovet के मैनेजिंग डायरेक्टर बलराम सिंह, Mercer Mettl के सीईओ सिद्दार्थ गुप्ता, Zivame की फाउंडर ऋचा कार और NBFC Western Capital जैसे एंजेल निवेशकों का समर्थन हासिल है.

क्या रहीं चुनौतियां

Gramik को शुरू करने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा? इसके जवाब में राज कहते हैं, "अपनी खुद की IT सर्विस कंपनी 18Pixels की स्थापना करने के बाद, हमें कम तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. हम भाग्यशाली थे कि एक ऐसी कोर टीम के साथ शुरुआत की जिसने अपने खुद के परिभाषित विभागों का नेतृत्व किया. और बस इसी तरह सबने मिलकर Gramik बनाया."

वे आगे बताते हैं, "हां... किसानों का विश्वास जीतना एक मुद्दा था, क्योंकि टेक्नोलॉजी से उनका नाता नहीं रहा. और ये सच भी तो है. अपने गृहनगर से सदस्यों को इकट्ठा करना आसान था, लेकिन दूसरे गांवों के किसानों का विश्वास जीतना एक चुनौती थी. हमने उनकी ऑनबोर्डिंग को आसान बनाया और उनकी झिझक को दूर करने में उनकी मदद की. जब उन्होंने Gramik के साथ सहयोग करने के बाद गेहूं के लिए लगभग 60 फीसदी और सब्जियों के लिए 100 फीसदी तक की उपज वृद्धि दर देखी तो वे आश्वस्त हो गए."

अधिक उपज देने वाले इनपुट, विश्लेषणात्मक परामर्श और सामग्री की रियायती खरीद के मोर्चों पर मदद करते हुए, किसानों को Gramik के साथ स्मार्ट तरीके खेती करने के लिए आश्वस्त किया गया.

रेवेन्यू मॉडल, भविष्य की योजनाएं

राज बताते हैं, "हम किसानों को लाभ कमाने में मदद करके मुनाफा कमाते हैं. हम उन्हें दो तरीकों से पैसे बचाने में मदद करते हैं. हम बिचौलियों को खत्म करते हैं. इस प्रकार, डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्राप्त पारदर्शिता उन्हें सबसे अच्छे दामों पर अपनी फसल बेचने में मदद करती है."

वे आगे बताते हैं, "इसके बाद, ग्रामिक की डेटा-संचालित, प्रशिक्षण-उन्मुख सहायता के साथ, हम किसानों को अनुकूलित परामर्श प्रदान करते हैं जो उनके रकबे का अध्ययन करते हैं, उपज-अधिकतम योजनाओं की सूची बनाते हैं, और उनके कृषि शस्त्रागार में आवश्यक इनपुट और टेक्नोलॉजी मुहैया करते हैं."

यह कम लागत पर प्राप्त बेहतर गुणवत्ता वाली उपज के रूप में किसान को शानदार परिणाम देता है और फिर फसल को अच्छे दामों पर बेचा जाता है.

किसानों के लिए लाभ का यह मॉडल Gramik की भी मदद करता है. Gramik के पास ज्यादा गोदाम नहीं है, क्योंकि यह लागत को बचाने पर जोर देता है ताकि किसानों को बाजार से कम कीमत पर एग्री इनपुट मिल जाए. यह कृषक समुदाय के साथ संबंधों को मजबूत करता है और उनके बीच विश्वास को बढ़ाता है.

रेवेन्यू के आंकड़े साझा करते हुए सीईओ राज यादव कहते हैं, "वित्त वर्ष 2022-23 में Gramik ने 80 करोड़ रुपये का GMV (Gross Merchandise Value) हासिल किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 26 गुना अधिक है. इसके अलावा, हमने 2023-24 वित्तीय वर्ष में 250 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है."

Gramik के पास तीन लाख से अधिक ग्राहक हैं. Gramik को लेकर भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए राज कहते हैं, "वर्तमान में, हम उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के पश्चिमी भाग में विस्तार करने की योजना बना रहे हैं. हम इस वर्ष के अंत तक मध्य प्रदेश राज्य में अपनी सेवाओं का विस्तार करने की भी योजना बना रहे हैं."

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सांकेतिक चित्र

Gramik की USP

पीयर मॉडल: स्टार्टअप अपने लास्ट माइल पार्टनर आजीविका सखी/पीयर पार्टनर के जरिए सीधे किसानों के साथ काम करता है. ये साथी किसानों को इनपुट विश्लेषण, क्षेत्र की निगरानी, जलवायु और मिट्टी की रिपोर्ट, बीज किस्म की शिक्षा, और बिचौलियों को खत्म करने के लिए हमारे टेक्नोलॉजी प्लेटफार्मों का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित करते हैं और उन्हें कम कीमत पर तेजी से जो चाहिए उसे प्राप्त करने में सहायता करते हैं.

ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण: राज बताते हैं, "हम किसानों की जरूरतों को समझने के लिए उनके साथ लगन से काम करते हैं और उन जरूरतों को पूरा करने के लिए तकनीक और सेवाओं को तैयार करते हैं. किसान के खेत का लगभग फोरेंसिक विश्लेषण किया जाता है जो इस बात पर प्रकाश डालता है कि कौन सी फसल उस मिट्टी पर उगेगी, और यदि एक से अधिक फसल उगाने की संभावना है तो रणनीतिक रूप से फसल की विविधता को कैसे अधिकतम किया जाए."

मजबूत भागीदारी: इसमें प्रमुख हितधारकों के साथ मजबूत भागीदारी एक अधिक कुशल और एकीकृत एग्री इकोसिस्टम का निर्माण करती है. इस इकोसिस्टम में भागीदार इनपुट प्रदाता, वितरक, खरीदार और वित्तीय संस्थान हैं, जो किसानों के लिए सर्वोत्तम कृषि परिणाम प्राप्त करने के लिए एक टिकाऊ, लागत प्रभावी माध्यम को सक्षम करते हैं.

टेक्नोलॉजी: अन्नदाताओं के लिए टेक्नोलॉजी केवल कल्पना नहीं है, यह अनिवार्य है. इन किसानों और एग्री बिजनेसेज ने बेहतरीन क्वालिटी वाली उपज हासिल हासिल की है. बाजार में उचित प्लेसमेंट की कमी उनकी क्षमता को सीमित करती है. और इन कृषि उपकरणों के निर्माण के पीछे फलती-फूलती क्षमता वाले छोटे व्यवसाय के मालिक हैं. 3 लाख से अधिक किसानों और एक हजार व्यवसायों के नेटवर्क वाले एक डिजिटल मार्केटप्लेस में बीज और उर्वरक, कीटनाशक और खाद, कृषि उपकरण, पौध नर्सरी और पोषक तत्व, भोजन और पशु चारा, और फसल बीमा सहकारिता के निर्माता शामिल हैं.

लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी: Gramik वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को धीमी गति से चलने वाले स्टॉक को नष्ट करने और अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से उनकी पहुंच बढ़ाने में मदद करने के लिए टेक्नोलॉजी का लाभ उठाकर ग्रामीण क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी में चुनौतियों का समाधान करता है.

डेटा एनालिटिक्स और AI: डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके कृषि पद्धतियों के लिए डेटा-संचालित दृष्टिकोण Gramik के किसानों और साथियों के लिए कार्रवाई योग्य अंतर्दृष्टि प्रदान करता है.

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