CAA के खिलाफ हिंसा में नुकसान की भरपाई के लिए मुस्लिम समाज ने डीएम को सौंपा 6.27 लाख रुपये का डीडी

CAA के खिलाफ हिंसा में नुकसान की भरपाई के लिए मुस्लिम समाज ने डीएम को सौंपा 6.27 लाख रुपये का डीडी

Monday December 30, 2019,

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बुलंदशहर में CAA के खिलाफ हिंसा में नुकसान की भरपाई के लिए मुस्लिम समाज ने दिये छह लाख रुपये। डीएम से समुदाय के सदस्यों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की अपील। बीते 20 दिसंबर को बुलंदशहर में समुदाय के लोगों ने किया था विरोध प्रदर्शन।


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फोटो क्रेडिट: huffingtonpost



उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में मुस्लिम समाज के एक वर्ग ने संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में उत्तर प्रदेश में हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक सम्पत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए जिला प्रशासन को 6.27 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट सौंपा है।


उन्होंने अधिकारियों को शुक्रवार को डीडी सौंपते हुए पुलिस और प्रशासन से अनुरोध किया कि वे 20 दिसंबर को विरोध प्रदर्शनों के बाद समुदाय के सदस्यों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लें। इसी दिन सीएए के विरोध को लेकर प्रदर्शनों में राज्य के कई अन्य हिस्सों में हिंसा हुई थी।


बुलंदशहर के जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने संवाददाताओं से कहा,

‘‘यह यहां के लोगों का स्वागतयोग्य कदम है, जिन्होंने इस बात को महसूस किया कि हिंसा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सम्पति उन्हीं की है और इसमें उनके द्वारा दिए गए कर का धन शामिल है। सार्वजनिक सम्पत्ति के नुकसान का मतलब नागरिकों की सम्पत्ति का नुकसान होता है।’’



आपको बता दें कि एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि बवाल के बाद कमिश्नर और आइजी ने नुकसान की भरपाई के लिए प्रदर्शनकारी लोगों के खिलाफ नोटिस जारी करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद कुछ सभासदों ने नोटिस न भेजकर खुद ही भरपाई करने के लिए कहा था। शुक्रवार को सभासदों और समाज के अन्य लोगों ने नुकसान की भरपाई करने के लिए डिमांड ड्राफ्ट हमें सौंप दिया है।


एक स्थानीय पार्षद हाजी अकरम ने बताया कि समुदाय के लोगों ने चंदा एकत्र करके 6,27,507 रुपये एकत्र किए। प्रशासन ने इतनी ही राशि के मूल्य की सम्पत्ति नष्ट होने का आकलन किया है।


गौरतलब हो कि CAA के विरोध की आड़ में हुई हिंसा पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। न केवल उपद्रवियों की शिनाख्त और धरपकड़ में तेजी आई है, बल्कि नुकसान के आकलन के बाद वसूली की दिशा में भी पुलिस-प्रशासन ने कदम बढ़ा दिए हैं। 


(Edited by रविकांत पारीक )